कौशल किशोर के बदले तेवर, भाजपा के कुछ नेताओं पर साधा निशाना; बोले- उसूलों पर न चलने वाले खत्म हो जाते हैं

कौशल किशोर के बदले तेवर से भाजपा की अंदरूनी सियासत चर्चा में है। लोकसभा चुनाव में भितरघात के आरोपों के बाद अब उन्होंने 13 सितंबर को आत्मसम्मान समारोह का ऐलान किया है।
लखनऊ। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री और भाजपा नेता कौशल किशोर के तेवर इन दिनों बदले नजर आ रहे हैं। लंबे समय से पार्टी से जुड़े कौशल किशोर ने लोकसभा चुनाव में अपनी हार के लिए भाजपा के ही कुछ लोगों पर भितरघात का आरोप लगाया था। उनका दावा रहा है कि पार्टी के भीतर कुछ लोगों ने सपा प्रत्याशी के पक्ष में माहौल बनाने का काम किया। अब सोशल मीडिया पर उनकी एक पोस्ट ने एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है।
कौशल किशोर ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में ‘गेंद’ का उदाहरण देते हुए लिखा कि गेंद जितनी ऊपर जानी थी, जा चुकी है और अब नीचे आ रही है। उन्होंने कहा कि नीचे आने की गति भी बढ़ती जा रही है और इसे कोई कम नहीं कर सकता।
बोले- पोस्ट भाजपा के खिलाफ नहीं
सोशल मीडिया पोस्ट पर उठ रहे सवालों के बीच कौशल किशोर से इस संबंध में बातचीत की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पोस्ट भाजपा के खिलाफ नहीं थी। उनका कहना था कि उन्होंने भाजपा के खिलाफ कभी एक शब्द नहीं कहा है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग उसूलों पर नहीं चलते, वे चाहे कोई संगठन हों या व्यक्ति, एक समय के बाद खत्म हो जाते हैं। उन्होंने सिक्के का उदाहरण देते हुए कहा कि वह जिस तेजी से ऊपर जाता है, उसी तरह उससे अधिक तेजी से नीचे भी आता है।
उनकी इस टिप्पणी के बाद राजनीतिक गलियारों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं। हालांकि कौशल किशोर ने इसे भाजपा के खिलाफ टिप्पणी मानने से इनकार किया है।
पार्टी छोड़ने की अटकलों पर क्या बोले कौशल
कौशल किशोर से जब दल बदलने की संभावनाओं को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने ऐसी अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी जयदेवी भाजपा से विधायक हैं और वह स्वयं भाजपा के कर्मठ कार्यकर्ता हैं।
उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से जहां कार्यक्रम में बुलाया जाता है, वहां वह जाते हैं और जहां नहीं बुलाया जाता, वहां नहीं जाते। उन्होंने भाजपा से अपने जुड़ाव को स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका पार्टी से संबंध बना हुआ है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कौशल किशोर कभी सीधे तो कभी इशारों में भाजपा के कुछ नेताओं पर सवाल उठाते रहे हैं। ऐसे में उनकी ताजा टिप्पणी को भी पार्टी के भीतर चल रही खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है।
लोकसभा चुनाव में भितरघात का लगाया था आरोप
लोकसभा चुनाव में हार के बाद कौशल किशोर ने पार्टी के भीतर भितरघात का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि उन्हें सिधौली विधानसभा क्षेत्र से भी अपेक्षा के मुताबिक समर्थन नहीं मिला और करीब साढ़े 55 हजार मतों का अंतर रहा।
उन्होंने दावा किया था कि चुनाव में पार्टी के ही कुछ लोगों ने उनके खिलाफ काम किया और सपा प्रत्याशी के पक्ष में वोट डालने का माहौल बनाया। कौशल किशोर के मुताबिक, इस संबंध में उन्होंने संबंधित लोगों के नाम लेकर शिकायत भी की थी।
उनका आरोप था कि शिकायत के बावजूद संबंधित लोगों पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके उलट, उन्होंने दावा किया कि ऐसे लोगों को संगठन में महत्वपूर्ण पद भी दिए गए।
कम्युनिस्ट विचारधारा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर
कौशल किशोर का राजनीतिक सफर कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़कर शुरू हुआ था। बाद में उन्होंने राष्ट्रवादी कम्युनिस्ट पार्टी का गठन किया। वर्ष 2002 में उन्होंने मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और विधायक निर्वाचित हुए।
वर्ष 2002-03 में मुलायम सिंह यादव सरकार में उन्हें श्रम राज्य मंत्री बनाया गया था। हालांकि बाद में उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उस समय वह श्रमिक थाने खोलने की मांग को लेकर सक्रिय थे और लखनऊ के विधायक निवास दारुलशफा तथा सीतापुर के महमूदाबाद में श्रमिक थाना खोलने की पहल की थी।
वर्ष 2014 में कौशल किशोर भाजपा में शामिल हुए। इसके बाद उन्होंने मोहनलालगंज सुरक्षित लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और 16वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। वर्ष 2019 में भी उन्होंने इसी सीट से जीत दर्ज की।
केंद्र सरकार में रहे राज्य मंत्री
कौशल किशोर सात जुलाई 2021 से 11 जून 2024 तक केंद्र सरकार में आवास एवं शहरी मामलों के राज्य मंत्री रहे। वह पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चे से भी जुड़े रहे हैं और परख महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
उनकी पत्नी जयदेवी मलिहाबाद सुरक्षित विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। लोकसभा चुनाव में कौशल किशोर की हार के बाद उनके राजनीतिक भविष्य और पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हुई थीं।
13 सितंबर को ‘आत्मसम्मान समारोह’
कौशल किशोर ने 13 सितंबर को प्रेरणा स्थल पर ‘आत्मसम्मान समारोह’ आयोजित करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि कार्यक्रम में लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे लोग शामिल होंगे।
कौशल किशोर इसे गैरराजनीतिक कार्यक्रम बता रहे हैं। उनका कहना है कि इसमें किसी एक वर्ग के बजाय सभी वर्गों के लोगों को आमंत्रित किया गया है। हालांकि, जिस तरह उन्होंने लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के भीतर भितरघात के आरोप लगाए हैं और अब अपने समर्थकों के साथ इस कार्यक्रम की तैयारी कर रहे हैं, उससे इसे उनके राजनीतिक प्रभाव के प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है।




