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नेपाल बाढ़ में तबाही का आंकड़ा बढ़ा, 939 मौतें; 4000 से ज्यादा लोग अब भी लापता, मलबे से शव निकालना चुनौती

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ में मृतकों की संख्या बढ़कर 939 हो गई है, जबकि 4000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। रसुवा, नुवाकोट और धादिंग समेत कई इलाकों में राहत-बचाव अभियान जारी है। हाइड्रोपावर प्रोजेक्टों में फंसे लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

नई दिल्ली/काठमांडू: नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल और तिब्बत को मिलाकर आपदा में मृतकों की संख्या बढ़कर 939 हो गई है, जबकि 4000 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए राहत और बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। बाढ़ और मलबे के कारण कई कस्बों, सड़कों, पुलों, पनबिजली परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है।

नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने और भारी बारिश के बाद ल्हेन्दे खोला तथा भोटेकोशी नदियों में अचानक बाढ़ आ गई थी। इसका सबसे ज्यादा असर रसुवा, नुवाकोट और आसपास के इलाकों में देखने को मिला। बाढ़ के बाद कई इलाकों में बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया है, जिसके नीचे लोगों के दबे होने की आशंका है।

मलबे से उठ रही दुर्गंध, महामारी का खतरा बढ़ा

आपदा के करीब एक सप्ताह बाद प्रभावित इलाकों में एक नई चुनौती सामने आई है। मलबे और दलदल में दबे शवों के सड़ने से कई जगहों पर तेज दुर्गंध फैल रही है। इससे महामारी और संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।

रेस्क्यू एजेंसियों के सामने अब केवल मलबे से शव निकालने की चुनौती नहीं है, बल्कि प्रभावित इलाकों में सफाई, सैनिटेशन और बीमारियों की रोकथाम भी बड़ी चिंता बन गई है। राहत दलों के सामने दुर्गम इलाकों तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

त्रिशूली के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में 118 लोग फंसे

बाढ़ से पनबिजली परियोजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। त्रिशूली 3बी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में इंजीनियरों, अधिकारियों और श्रमिकों समेत करीब 118 लोगों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। इन लोगों से किसी तरह का संपर्क नहीं हो पा रहा है।

वहीं त्रिशूली 3ए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले करीब 40 से 42 इंजीनियर भी फंसे हुए बताए जा रहे हैं। आपदा के समय सभी कर्मचारी परियोजना में काम कर रहे थे। घटना के कई दिन बाद भी यहां राहत-बचाव अभियान शुरू नहीं हो पाने से स्थिति गंभीर बनी हुई है।

एक घर के मलबे से 24 शव बरामद

नुवाकोट जिले के भोटेकोशी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में एक घर के मलबे से 24 शव बरामद होने की जानकारी सामने आई है। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, बिदुर नगर पालिका-10 के वेत्रवंती इलाके में मलबे के भीतर से शव निकाले गए।

नुवाकोट के पुलिस अधीक्षक बिपिन रेग्मी के अनुसार बरामद शवों में 13 महिलाएं, 11 पुरुष और एक बच्चा शामिल है। राहत दल प्रभावित इलाकों में मलबा हटाकर लोगों और शवों की तलाश में जुटे हैं।

प्रिंसिपल की सूझबूझ से बची 900 छात्रों की जान

बाढ़ के बीच नुवाकोट स्थित त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी के समय रहते लिए गए फैसले ने करीब 900 छात्रों की जान बचा ली। बाढ़ की चेतावनी मिलते ही उन्होंने स्कूल खाली कराने का निर्णय लिया और सभी मौजूद छात्रों को पास की सुरक्षित पहाड़ी पर पहुंचाया।

समय पर स्कूल खाली कराने से बड़ी जनहानि टल गई। आपदा के बीच स्कूल प्रशासन की सतर्कता और त्वरित निर्णय की सराहना की जा रही है।

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 22 यात्री लापता

आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 22 यात्रियों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनकी तलाश के लिए रेस्क्यू टीमें अभियान चला रही हैं। इसके अलावा नेपाल के गजुरी गांवपालिका क्षेत्र में कई भारतीय पर्यटकों के फंसे होने की भी जानकारी सामने आई है।

भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए भारतीय अधिकारी भी नेपाल के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में हैं। इससे पहले कई भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

नेपाल से सटे यूपी के जिलों में भी बढ़ी चिंता

नेपाल में आई भीषण बाढ़ का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी महसूस किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के महराजगंज और कुशीनगर जिलों में नदियों का जलस्तर बढ़ने के बाद हाई अलर्ट जारी किया गया है।

नेपाल से निकलने वाली नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासन को सतर्क रहने और स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय स्तर पर भी लोगों को नदी और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने का अभियान जारी

विदेश मंत्रालय के अनुसार नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे पहले 149 भारतीय नागरिकों को बचाए जाने की जानकारी दी गई थी, जबकि लापता भारतीयों की सूची में 275 नागरिकों के नाम सामने आए थे। भारतीय मूल के 128 लोगों से संपर्क नहीं हो पाने की भी जानकारी दी गई थी।

भारत और नेपाल की एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान में समन्वय कर रही हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए बचाव दल कठिन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं।

नेपाल पुलिस ने करोड़ों की नकदी और सोना सुरक्षित पहुंचाया

आपदा के दौरान नेपाल पुलिस ने एग्रीकल्चर डेवलपमेंट बैंक की त्रिशूली धुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ रुपये नकद, लगभग 50 करोड़ रुपये मूल्य का सोना और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए। बाढ़ के बीच बैंक की संपत्ति और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित निकालना भी राहत अभियान का अहम हिस्सा रहा।

भारत पहुंचने वाले चार शव नेपाल को सौंपे गए

नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के बाद नारायणी नदी के तेज बहाव में बहकर भारतीय क्षेत्र में पहुंचे चार शवों को नेपाल प्रहरी को सौंप दिया गया। भारत-नेपाल सीमा के ठूठीबारी मुख्य गेट को निर्धारित प्रक्रिया के तहत खोला गया और शव नेपाल पुलिस के सुपुर्द किए गए।

चार शवों में तीन महिलाएं और एक पुरुष शामिल थे। सीमा पर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद शवों को नेपाल भेजा गया।

सफाई अभियान में जुटे स्थानीय लोग

बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रभावित इलाकों में सफाई और मलबा हटाने का अभियान भी तेज किया जा रहा है। नुवाकोट की लिखु ग्रामीण नगरपालिका के स्वयंसेवक देवीघाट समेत प्रभावित क्षेत्रों में सफाई और राहत कार्यों के लिए जुटे हैं।

स्थानीय लोग अपने उजड़े आशियानों को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि बड़े पैमाने पर मलबा, क्षतिग्रस्त सड़कें और पुल राहत कार्यों की गति को प्रभावित कर रहे हैं।

राहत और पुनर्वास की बड़ी चुनौती

नेपाल में बाढ़ के बाद अब सरकार और राहत एजेंसियों के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ हजारों लापता लोगों की तलाश और मलबे से शवों को निकालना है, तो दूसरी तरफ विस्थापित लोगों के लिए भोजन, पानी, स्वास्थ्य सुविधा और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था करनी है।

बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कें और पुल राहत सामग्री पहुंचाने में भी बाधा बन रहे हैं। पनबिजली परियोजनाओं में फंसे लोगों की स्थिति ने चिंता और बढ़ा दी है।

मृतकों और लापता लोगों की संख्या बढ़ने की आशंका

अब तक 939 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं और 4000 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी है। राहत और बचाव दल जैसे-जैसे मलबा हटाकर प्रभावित इलाकों तक पहुंच रहे हैं, मृतकों और लापता लोगों की संख्या में बदलाव की आशंका बनी हुई है।

नेपाल में आई यह आपदा अपने पीछे बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान छोड़ गई है। आने वाले दिनों में सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने और महामारी के खतरे को रोकने की होगी।

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