पेन मेडिसिन विभाग ने लगाया निशुल्क बोन डेंसिटी जांच शिविर

लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में ISSP फाउंडेशन डे पर निशुल्क BMD-DEXA स्कैन शिविर आयोजित किया गया। 100 से अधिक मरीजों की हड्डियों की मजबूती की जांच की गई और ऑस्टियोपोरोसिस की शुरुआती पहचान पर विशेषज्ञों ने जागरूक किया।
लखनऊ। राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के पेन मेडिसिन विभाग में इंडियन सोसाइटी फॉर स्टडी ऑफ पेन (ISSP) के स्थापना दिवस (9 जुलाई) के अवसर पर निशुल्क BMD-DEXA स्कैन शिविर का आयोजन किया गया। इस स्वास्थ्य शिविर में 100 से अधिक मरीजों की हड्डियों की मजबूती (Bone Mineral Density) की जांच निशुल्क की गई।
इस आयोजन में बायोएलीट लाइफ साइंसेज ने भी सहयोग प्रदान किया। विशेषज्ञों ने बताया कि DEXA Scan के माध्यम से हड्डियों की घनत्व की सटीक जांच होती है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी का प्रारंभिक चरण में पता लगाया जा सकता है और समय रहते उपचार संभव हो जाता है।
क्रोनिक पेन मरीजों के लिए बड़ी पहल
ISSP के मानद राष्ट्रीय सचिव प्रो. डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि Pain Medicine आज क्रोनिक दर्द से पीड़ित मरीजों के लिए एक प्रभावी और आधुनिक चिकित्सा पद्धति बन चुकी है। उन्होंने कहा कि देशभर के मरीज अब www.issp-pain.org� के माध्यम से अपने शहर के विशेषज्ञ पेन फिजिशियन से संपर्क कर सकते हैं।
विश्वस्तरीय तकनीक से बिना बड़े ऑपरेशन इलाज
पेन मेडिसिन यूनिट की प्रभारी प्रो. डॉ. शिवानी रस्तोगी ने बताया कि लोहिया संस्थान की MIPSI Lab देश की अग्रणी लैब में शामिल है। यहां कमर दर्द, स्लिप डिस्क, घुटना दर्द, ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया, कैंसर पेन, ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोआर्थराइटिस सहित कई जटिल रोगों का उपचार आधुनिक तकनीकों जैसे रेडियो फ्रीक्वेंसी, काइफोप्लास्टी, स्पाइन एंडोस्कोपी और पेन बायोलॉजिकल थेरेपी से बिना बड़े ऑपरेशन के किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान उत्तर भारत का पहला सरकारी संस्थान है जहां द्विवर्षीय FNB Pain Medicine पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस उपलब्धि का श्रेय उन्होंने संस्थान के निदेशक प्रो. सी.एम. सिंह, विभागाध्यक्ष डॉ. पी.के. दास और एनेस्थिसियोलॉजी विभाग की पूरी टीम को दिया।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि लगातार कमर दर्द, जोड़ों का दर्द या हड्डियों की कमजोरी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें और समय-समय पर बोन डेंसिटी जांच अवश्य कराएं।




