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क्या उल्टा पड़ गया ‘ट्रंप कार्ड’? ईरान युद्ध में फंसते दिख रहे अमेरिकी राष्ट्रपति

ईरान के खिलाफ जारी जंग में डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। बढ़ती ऊर्जा कीमतें, NATO सहयोगियों से दूरी और राजनीतिक संकट ने अमेरिका को मुश्किल में डाल दिया है।

नई दिल्ली। Donald Trump के लिए ईरान के खिलाफ शुरू किया गया सैन्य अभियान अब उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। लगभग एक महीने से जारी इस संघर्ष ने न केवल वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका दिया है, बल्कि अमेरिका को कूटनीतिक रूप से भी दबाव में ला खड़ा किया है।

28 फरवरी को शुरू हुए इस संघर्ष में अमेरिका और Iran के बीच तनाव लगातार बढ़ता गया है। शुरुआत में इसे सीमित सैन्य अभियान बताया गया था, लेकिन अब हालात इसके उलट दिख रहे हैं। ईरान लगातार जवाबी हमले कर रहा है और खाड़ी क्षेत्र में तेल-गैस आपूर्ति को प्रभावित कर रहा है।

 बढ़ती चुनौती, घटता नियंत्रण

विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप इस संघर्ष पर अपना नियंत्रण खोते दिख रहे हैं। एक ओर जहां उन्होंने दावा किया कि युद्ध “सैन्य रूप से जीत लिया गया है”, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई देती है। ऊर्जा कीमतों में उछाल और आपूर्ति बाधाओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाला है।

 सहयोगियों से दूरी

NATO देशों के साथ भी अमेरिका के रिश्तों में खटास नजर आ रही है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में सहयोग न देने पर सहयोगी देशों को “कायर” तक कह दिया। इससे अमेरिका की कूटनीतिक स्थिति कमजोर हुई है।

 ऊर्जा संकट और रणनीतिक दबाव

Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिसका असर आम लोगों तक पहुंच रहा है।

 दोराहे पर ट्रंप

विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रंप के सामने अब दो विकल्प हैं—

  • युद्ध को और तेज कर सैन्य दबाव बढ़ाना
  • या “जीत” का दावा कर पीछे हटना

पहला विकल्प लंबे और महंगे युद्ध में फंसाने वाला हो सकता है, जबकि दूसरा विकल्प अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।

 राजनीतिक जोखिम

इस युद्ध का असर ट्रंप की घरेलू राजनीति पर भी पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई, संभावित सैनिक तैनाती और लंबा खिंचता संघर्ष उनके राजनीतिक भविष्य के लिए खतरा बन सकता है। खासकर आगामी चुनावों को देखते हुए यह स्थिति और संवेदनशील हो गई है।

कुल मिलाकर, जिस रणनीति से ट्रंप ने अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की थी, वही अब उनके लिए चुनौती बनती दिख रही है। युद्ध जितना लंबा खिंचता जा रहा है, उतना ही यह सवाल गहराता जा रहा है कि क्या यह “ट्रंप कार्ड” अब उनके ही खिलाफ पड़ रहा है।

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