Breaking NewsE-paperउत्तर प्रदेशराजनीतिराज्यलखनऊसमाचार

TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का देशव्यापी आंदोलन तेज, सांसदों से अध्यादेश लाने की मांग

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में प्राथमिक शिक्षक देशव्यापी आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षक सांसदों से मिलकर अध्यादेश लाने की मांग करेंगे और मानसून सत्र में समाधान नहीं मिलने पर दिल्ली कूच की चेतावनी दी है।

लखनऊ: शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में देशभर के प्राथमिक शिक्षक अब आंदोलन को तेज करने की तैयारी में हैं। शिक्षकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के करीब एक साल बाद भी केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे शिक्षकों में नाराजगी बढ़ रही है।

अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ (एआईपीटीएफ) ने अपनी सभी राज्य इकाइयों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के सांसदों से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपें और टीईटी अनिवार्यता खत्म करने के लिए संसद में अध्यादेश लाने की मांग करें।

सांसदों को सौंपा जाएगा ज्ञापन

एआईपीटीएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि देशभर के करीब 25 लाख प्राथमिक शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह अभियान चलाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने क्षेत्र के सांसदों से मुलाकात कर उन्हें टीईटी अनिवार्यता से शिक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों और शिक्षकों की समस्याओं से अवगत कराएंगे।

यदि सांसद अपने क्षेत्र में मौजूद होंगे तो शिक्षक उनके आवास पर जाकर ज्ञापन सौंपेंगे, जबकि संसद के मानसून सत्र के दौरान दिल्ली में मौजूद सांसदों से मुलाकात की जाएगी।

मानसून सत्र में फैसला नहीं हुआ तो दिल्ली कूच की चेतावनी

शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि संसद के मानसून सत्र में प्राथमिक शिक्षकों के पक्ष में कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो देशभर के शिक्षक दिल्ली कूच करने के लिए मजबूर होंगे।

वहीं, कुछ शिक्षक संगठनों ने राजधानी लखनऊ में भी बड़े स्तर पर रैली आयोजित करने की घोषणा की है।

आरटीई अधिनियम में संशोधन वापस लेने की मांग

शिक्षक संगठनों की मांग है कि आरटीई अधिनियम-2009 के अनुच्छेद 23(2) में अगस्त 2017 में राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा किए गए संशोधन को वापस लिया जाए।

शिक्षकों का कहना है कि टीईटी की अनिवार्यता लागू होने से लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों की सेवा प्रभावित हो सकती है। इसलिए सरकार को अध्यादेश लाकर इस व्यवस्था में बदलाव करना चाहिए।

माध्यमिक शिक्षक भी करेंगे आंदोलन

इधर, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है।

संगठन ने शासन स्तर पर लंबित 15 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालयों पर 31 जुलाई को धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इस दिन को संगठन ने ‘चेतावनी दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया है।

लखनऊ में 7 अगस्त को होगा प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डा. जितेंद्र कुमार सिंह पटेल ने पदाधिकारियों से स्कूलों का दौरा कर शिक्षकों से संपर्क बढ़ाने और आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।

संगठन के प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि कई मंडलों में वर्ष 2000 से पहले नियुक्त तदर्थ शिक्षकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया अब भी लंबित है। इसके अलावा वर्ष 2023 से कार्यवाहक प्रधानाचार्यों का वेतन भी लंबित होने का मुद्दा उठाया गया है।

शिक्षक संगठनों ने सरकार से जल्द समाधान की मांग की

शिक्षक संगठनों का कहना है कि टीईटी अनिवार्यता सहित लंबित मांगों पर जल्द निर्णय लिया जाना चाहिए, ताकि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा बनी रहे और शिक्षा व्यवस्था पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

अब शिक्षकों की नजर संसद के मानसून सत्र पर है। संगठनों ने साफ किया है कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button