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मंत्री पर भड़के स्पीकर सतीश महाना, बोले- काम कराने के लिए ही तो बैठे हो

 

“यूपी विधानसभा के बजट सत्र में स्पीकर सतीश महाना मंत्री दिनेश प्रताप सिंह पर भड़के। खाद संकट, AI रोबोट विवाद और CAG रिपोर्ट पर सदन में तीखी बहस। पढ़ें LIVE अपडेट्स।”

लखनऊ, 19 फरवरी 2026। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के नौवें दिन गुरुवार को सदन में तीखी बहस, हल्की नोकझोंक और कई बार हास्य के पल देखने को मिले। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच किसानों, औद्योगिक निवेश, भ्रष्टाचार और प्रशिक्षण योजनाओं जैसे मुद्दों पर जमकर चर्चा हुई। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कई मौकों पर हस्तक्षेप कर व्यवस्था बनाए रखी।

स्पीकर और मंत्री के बीच तीखी टिप्पणी

सत्र के दौरान कृषि मंत्री दिनेश प्रताप सिंह जब स्पीकर के विधानसभा क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों का उल्लेख करने लगे तो अध्यक्ष ने उन्हें टोका। मंत्री ने कहा कि उन्होंने फोन कर क्षेत्र के कार्यों की जानकारी ली और काम करवाया। इस पर सतीश महाना ने दो टूक कहा—
“अगर आपको काम करवाना नहीं है तो आप वहां क्यों हैं? काम करवाने के लिए ही तो बैठे हैं। मेरे लिए क्यों गिना रहे हैं, बाकी सदस्यों को बताइए।”

इस टिप्पणी के बाद सदन में हल्की हंसी गूंज उठी।

समय सीमा पर सख्ती

पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप निर्धारित समय से अधिक बोलने लगे तो स्पीकर ने चेताया— “अच्छा नहीं लगेगा कि आपका माइक बंद करना पड़े।”

इसी तरह सपा विधायक आरके वर्मा के बिना स्पष्ट सवाल रखे लंबा बोलने पर अध्यक्ष ने चुटकी लेते हुए पास बैठे विधायक से पूछा— “आपको समझ में आया कि क्या सवाल पूछा गया?” और मंत्री से कहा— “आप भी दो मिनट ऐसे ही जवाब दे दीजिए।”

किसानों के मुद्दे पर हंगामा

सपा विधायक राजेंद्र चौधरी और अन्य सदस्यों ने खाद की कमी का मुद्दा उठाया। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने जवाब देते हुए कहा कि सपा शासन में किसानों को बीज और खाद के लिए भटकना पड़ता था। उन्होंने दावा किया कि किसानों की आय पहले 54 हजार रुपये थी, जो अब 1.09 लाख रुपये से अधिक हो चुकी है।

मंत्री के जवाब से असंतुष्ट सपा सदस्यों ने हंगामा किया। इस पर स्पीकर ने कहा— “सब खड़े होकर बोलिए, आज किसी को नहीं रोकूंगा।” इसके बाद सदस्य शांत हो गए।

विधान परिषद में भी किसानों के मुद्दे पर सपा सदस्यों ने वॉकआउट किया।

औद्योगिक निवेश और भ्रष्टाचार पर आरोप-प्रत्यारोप

सपा विधायक संदीप सिंह ने 2024 से जनवरी 2026 तक किन जिलों में नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुईं, इसका ब्यौरा मांगा। औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल नंदी ने कहा—
“ऐसा कोई जिला नहीं है जहां औद्योगिक इकाई स्थापित न हुई हो। हमने निवेशकों का भरोसा जीता है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासन में एनओसी और अन्य प्रक्रियाओं में वसूली होती थी, जिससे निवेशक पलायन करते थे।

CAG रिपोर्ट और सरकार का दावा

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सदन में सीएजी रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब सरप्लस रेवेन्यू वाला राज्य बन गया है।
उन्होंने बताया कि 2021-22 में 33,430 करोड़ रुपये का सरप्लस था, जो 2024-25 में बढ़कर 59,326 करोड़ रुपये हो गया।
“रेवेन्यू ज्यादा आ रहा है, खर्च कम है। यह आंकड़ा घर में नहीं बनता, सीएजी की रिपोर्ट है,” उन्होंने कहा।

एआई रोबोट पर चर्चा की मांग खारिज

नोएडा की गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़े एआई रोबोट कार्यक्रम का मुद्दा भी उठा। सपा विधायकों ने चर्चा की मांग की, जिसे स्पीकर ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कार्यक्रम राज्य सरकार द्वारा आयोजित नहीं था।

भ्रष्टाचार के आरोप

सपा विधायक रागिनी सोनकर ने वाराणसी में मंडी सड़क निर्माण में कथित अनियमितता का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि 12 लाख रुपये के काम का 3 करोड़ रुपये भुगतान किया गया और 4 लाख की टाइल्स के बदले 34 लाख रुपये का भुगतान हुआ। सरकार की ओर से इस पर विस्तृत जवाब बाद में देने की बात कही गई।

बजट सत्र के नौवें दिन सत्ता और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप, तंज और तथ्यात्मक दावों के बीच चर्चा जारी रही। किसानों, उद्योग, वित्तीय प्रबंधन और कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर बहस ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। संभावना है कि मुख्यमंत्री आगामी दिनों में बजट पर अपनी बात रखेंगे, जिससे सत्र और भी गर्मा सकता है।

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