मेरठ में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दिया नशामुक्ति का मंत्र, बोलीं- बेटियां संभालें कमान, घर-घर शुरू करें आंदोलन
मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के 38वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बेटियां नशे के खिलाफ घर-घर अभियान शुरू करें और समाज को नशामुक्त बनाने में भूमिका निभाएं।
मेरठ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने युवाओं से नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि नशा किसी समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि यह धीरे-धीरे व्यक्ति के सपनों, स्वास्थ्य, परिवार की उम्मीदों और राष्ट्र की प्रगति को नुकसान पहुंचाता है।
राज्यपाल बुधवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के 38वें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने युवाओं को समाज परिवर्तन का वाहक बनने का आह्वान किया।
बेटियां आगे आएं, घर-घर चलाएं नशा मुक्ति अभियान
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सरकार नशा मुक्ति के लिए लगातार प्रयास कर रही है और बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा,
“अगर आपके घर में कोई नशा नहीं करता, लेकिन आसपास कोई व्यक्ति नशे का सेवन करता है तो उसे समझाइए और रोकने का प्रयास कीजिए। बेटियां आगे आएं और घर में नशे के खिलाफ आंदोलन शुरू करें।”
उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के नशे की लत में पड़ने से केवल उसका जीवन प्रभावित नहीं होता, बल्कि उसके माता-पिता के त्याग, परिवार की उम्मीदों और राष्ट्र के भविष्य पर भी असर पड़ता है।
शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री नहीं, चरित्र निर्माण भी
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जित करना नहीं है, बल्कि अच्छे चरित्र, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदारी की भावना का विकास करना भी है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों में सही सोच, सामाजिक जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित करनी चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी संपत्ति उसके युवा हैं। सरकारें बजट उपलब्ध कराती हैं, लेकिन नई सोच और नवाचार के लिए विश्वविद्यालयों को आगे आना होगा।
चौधरी चरण सिंह के आदर्शों से प्रेरणा लेने की अपील
आनंदीबेन पटेल ने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन सादगी, ईमानदारी, संघर्ष और जनसेवा का उदाहरण है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे महापुरुषों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें और किसी भी विचारधारा को अपनाने से पहले उसके उद्देश्य को समझें।
75 प्रतिशत से अधिक पदक बेटियों के नाम
दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। समारोह में विभिन्न विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को कुल 199 पदक प्रदान किए गए।
राज्यपाल ने कहा कि इस वर्ष 75 प्रतिशत से अधिक पदक बेटियों ने हासिल किए हैं। यह उनकी प्रतिभा, मेहनत और समर्पण का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित कर रही हैं और समाज को नई दिशा दे रही हैं।
66,971 उपाधियां डिजी लॉकर में भेजीं गईं
समारोह में राज्यपाल ने बटन दबाकर 66,971 उपाधियों को डिजी लॉकर में भेजने की प्रक्रिया का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और भारतीय लोककला एवं हस्तशिल्प संरक्षण में योगदान देने वाली रसीला बेन कांजीभाई डुंगरिया को मानद डी.लिट. उपाधि से सम्मानित किया गया।
रिसर्च और इनोवेशन पर दिया जोर
राज्यपाल ने कहा कि भारत को अनुसंधान के क्षेत्र में और मजबूत बनने की जरूरत है। जैव प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और आधुनिक तकनीक के क्षेत्रों में शोध ही विकास का आधार है।
उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि देश अंतरिक्ष विज्ञान में लगातार नई ऊंचाइयां हासिल कर रहा है। युवाओं को शोध और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए।
समारोह में विश्वविद्यालय के अधिकारी, शिक्षक, छात्र-छात्राएं और कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।




