‘डरो मत, मोदी जी…’, राहुल गांधी ने PM को दी खुली बहस की चुनौती, विदेशी कनेक्शन पर पूछे सवाल
Rahul Gandhi PM Modi Debate: राहुल गांधी ने विदेशी कनेक्शन, अमेरिकी डील, अडाणी और एपस्टीन मामले पर पीएम मोदी को खुली बहस की चुनौती दी। एक्स पर पोल शुरू कर भाजपा नेताओं को किया टैग।
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खुली बहस की मांग को एक बार फिर तेज कर दिया है। मंगलवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोल शुरू किया। इसमें उन्होंने भारतीय युवाओं से पूछा कि क्या वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उन्हें आमने-सामने बैठकर चर्चा करते देखना चाहते हैं। इस पोस्ट के जरिए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री पर तंज भी कसा और लिखा- ‘डरो मत, मोदी जी।’
राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को भी टैग किया। इनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शामिल हैं। उन्होंने इन नेताओं से प्रधानमंत्री को उनकी बहस की चुनौती स्वीकार करने के लिए मनाने की अपील की।
एक्स पर पोल में दिए दो विकल्प, मोदी सरकार पर साधा निशाना
राहुल गांधी ने अपने एक्स पोल में लोगों को दो विकल्प दिए। पहला विकल्प ‘हां- मोदी जी, डरो मत’ और दूसरा ‘नहीं- मोदी जी, डर गए’ रखा गया। इस तरह उन्होंने बहस की मांग को सोशल मीडिया पर भी राजनीतिक चर्चा का विषय बनाने की कोशिश की।
यह पोस्ट उनकी उस पिछली चुनौती के बाद आई है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री से विदेशी कनेक्शन से जुड़े आरोपों पर सार्वजनिक बहस करने की मांग की थी। राहुल गांधी ने कहा था कि चर्चा के लिए प्रधानमंत्री अपनी पसंद की जगह और मंच चुन सकते हैं। उन्होंने यहां तक सुझाव दिया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत को बहस का निर्णायक बनाया जा सकता है।
बोले- कोई भी जगह चुन लीजिए, मीडिया और युवा भी रहेंगे मौजूद
राहुल गांधी ने अपनी पिछली पोस्ट में कहा था कि प्रधानमंत्री को चुनौती दिए हुए 24 घंटे बीत चुके हैं। उन्होंने सार्वजनिक मंच पर दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने चर्चा कराने की मांग की थी।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कोई भी मंच और जगह चुन सकते हैं। बहस के दौरान मीडिया और देश के युवा भी मौजूद रहें। राहुल के प्रस्ताव के मुताबिक, दोनों नेता एक मेज पर आमने-सामने बैठेंगे और प्रधानमंत्री अपनी पसंद का निर्णायक चुनने के लिए स्वतंत्र होंगे।
राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री चाहें तो मोहन भागवत को भी निर्णायक बना सकते हैं। उन्होंने इस बहस के जरिए विदेशी ताकतों से कथित संबंधों और राष्ट्रहित से जुड़े सवालों पर खुलकर चर्चा करने की बात कही।
अमेरिकी डील, अडाणी और एपस्टीन मामले पर जवाब मांगेंगे राहुल
राहुल गांधी ने बहस के लिए कई मुद्दे भी गिनाए हैं। इनमें भारत की वित्तीय व्यवस्था, आर्थिक ढांचा, अमेरिका के साथ हुई डील और उसके समय को लेकर सवाल शामिल हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि अमेरिकी डील किस तरह हुई, इसे इतनी जल्दी क्यों किया गया और कैबिनेट को इसकी जानकारी दिए बिना फैसला क्यों लिया गया। इसके अलावा उन्होंने अडाणी मामले की जांच और उससे जुड़े मामलों को लेकर भी सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने एपस्टीन से जुड़े मुद्दे का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि इन सभी विषयों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा होनी चाहिए, ताकि देश के सामने तथ्यों की स्थिति स्पष्ट हो सके।
मानहानि का मुकदमा करने की भी दी चुनौती
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को उनके आरोपों के संबंध में मानहानि का मुकदमा दायर करने की चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ पहले से कई मानहानि के मामले चल रहे हैं और विदेशी कनेक्शन से जुड़े आरोपों पर भी प्रधानमंत्री कानूनी कार्रवाई कर सकते हैं।
राहुल गांधी के मुताबिक, यदि प्रधानमंत्री इन आरोपों को गलत मानते हैं तो उन्हें कानूनी रास्ता अपनाने के साथ सार्वजनिक बहस में भी शामिल होना चाहिए। उन्होंने अपनी पोस्ट के अंत में प्रधानमंत्री को दिवाली की शुभकामनाएं भी दीं।
पीएम मोदी के बयान के बाद बढ़ा राजनीतिक टकराव
राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच यह बयानबाजी उस समय तेज हुई है, जब प्रधानमंत्री ने गुजरात में सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस कार्यक्रम में विपक्ष की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने विपक्ष पर लोकतांत्रिक जिम्मेदारियां निभाने के बजाय बाधा उत्पन्न करने वाली ताकत बनने का आरोप लगाया था। उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ ताकतें देश को बांटने की साजिश कर रही हैं और विदेशी ताकतों के कथित समर्थन को लेकर भी सवाल उठाए थे।
इसके बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के आरोपों को चुनौती देते हुए विदेशी सहायता और वित्तीय व्यवस्था से जुड़े अपने दावों पर खुली बहस की मांग की। फिलहाल दोनों नेताओं के बीच प्रस्तावित बहस को लेकर कोई सहमति सामने नहीं आई है। ऐसे में यह राजनीतिक मुद्दा आने वाले दिनों में भी चर्चा में रह सकता है।




