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NEET-UG में बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध, फर्जी परीक्षार्थियों को बैठाने वाले सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश

30 गिरफ्तार, मेडिकल छात्रों और बायोमेट्रिक कर्मियों की मिलीभगत उजागर; अभ्यर्थियों से 10-12 लाख रुपये तक की डील

बिहार के लखीसराय में NEET UG परीक्षा में बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध लगाकर फर्जी परीक्षार्थियों को बैठाने का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने मेडिकल छात्रों, बायोमेट्रिक कर्मियों समेत 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये लेने की बात सामने आई है।

लखीसराय। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) में धांधली के एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। बिहार पुलिस की जांच में सामने आया है कि एक संगठित सॉल्वर गैंग ने परीक्षा केंद्रों की बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था में सेंध लगाकर वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह फर्जी परीक्षार्थियों को परीक्षा में बैठाया। मामले में अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है।

बायोमेट्रिक सत्यापन में सेंध लगाकर रची गई साजिश

पुलिस जांच के अनुसार गिरोह ने परीक्षा केंद्रों पर तैनात बायोमेट्रिक सत्यापन से जुड़े कुछ कर्मियों की कथित मिलीभगत से पूरी योजना को अंजाम दिया। इसी नेटवर्क की मदद से सॉल्वरों को वास्तविक अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा केंद्र के भीतर प्रवेश दिलाया गया और उन्होंने परीक्षा दी।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यह रैकेट काफी सुनियोजित तरीके से संचालित किया जा रहा था और इसके तार कई जिलों तक फैले हो सकते हैं।

मेडिकल कॉलेज का छात्र निकला मास्टरमाइंड

पुलिस सूत्रों के अनुसार राजगीर स्थित पावापुरी मेडिकल कॉलेज का छात्र रविशंकर इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक बताया जा रहा है। आरोप है कि उसने विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों को सॉल्वर के रूप में तैयार किया और उन्हें परीक्षा में बैठाने की व्यवस्था की।

गिरोह ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश करता था जो किसी भी कीमत पर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाना चाहते थे। इसके बाद उनके स्थान पर मेधावी छात्रों को परीक्षा में बैठाया जाता था।

पटना मेडिकल कॉलेज का छात्र बना बायोमेट्रिक स्टाफ

जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पुलिस के मुताबिक, पटना मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ वर्ष के छात्र मयंक कश्यप ने कथित रूप से फर्जी पहचान के जरिए बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में काम किया।

आरोप है कि इसी माध्यम से गिरोह ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया और फर्जी परीक्षार्थियों को केंद्र के अंदर प्रवेश दिलाने में सफलता हासिल की।

30 गिरफ्तार, नौ मेडिकल छात्र भी शामिल

पुलिस ने इस मामले में अब तक कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में नौ सॉल्वर शामिल हैं, जो विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के छात्र बताए जा रहे हैं। इसके अलावा बायोमेट्रिक एजेंसी से जुड़े कुछ कर्मी, गिरोह के संचालक और अन्य सहयोगी भी गिरफ्त में लिए गए हैं।

गिरफ्तार लोगों में एक वास्तविक परीक्षार्थी भी शामिल है, जिसने कथित रूप से इस साजिश में भागीदारी की थी।

10 से 12 लाख रुपये में तय होता था सौदा

लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार के अनुसार प्रारंभिक जांच में पता चला है कि प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये तक की रकम तय की जाती थी। इसमें एक से दो लाख रुपये अग्रिम लिए जाते थे, जबकि शेष भुगतान परीक्षा में सफलता और मेडिकल कॉलेज में नामांकन के बाद किया जाना था।

पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजैक्शन और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

एफआईआर दर्ज, जांच का दायरा बढ़ा

केंद्रीय विद्यालय लखीसराय के प्रभारी प्राचार्य एवं सिटी कोऑर्डिनेटर दिनेश कुमार भगत की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच लगातार आगे बढ़ रही है और आने वाले दिनों में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में बायोमेट्रिक सुरक्षा व्यवस्था को धता बताकर फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठाने की घटना ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह देश की मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े सबसे गंभीर संगठित परीक्षा घोटालों में से एक माना जाएगा।

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