पश्चिम एशिया संकट के बीच केंद्र सरकार अलर्ट, PM मोदी शाम को करेंगे हाई लेवल मीटिंग
“पश्चिम एशिया संकट 2026 के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक आपूर्ति की समीक्षा के लिए हाई लेवल बैठक बुलाई। जानें भारत पर असर, ऊर्जा संकट और सरकार की तैयारी।”
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के बीच भारत सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रविवार शाम एक हाई लेवल मंत्री-स्तरीय बैठक बुलाई है।
इस बैठक में देश के लिए बेहद अहम तीन क्षेत्रों—पेट्रोलियम, बिजली और उर्वरक—की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अंतरराष्ट्रीय संकट के बावजूद देश में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई प्रभावित न हो।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में वैश्विक ऊर्जा संकट, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और सप्लाई चेन में आ रही बाधाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि उपभोक्ताओं और उद्योगों पर इसका असर कम से कम पड़े।
ऊर्जा संकट का बढ़ता असर
पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है। भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। प्रधानमंत्री पहले भी इस संकट को “राष्ट्रीय परीक्षा” बता चुके हैं और इससे निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर दे चुके हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का कारण
Strait of Hormuz दुनिया का सबसे अहम तेल परिवहन मार्ग है, जहां से करीब 20% वैश्विक ऊर्जा गुजरती है।
हालिया संघर्ष के बाद इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही सीमित हो गई है, जिससे तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भारत
संघर्ष शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों—सऊदी अरब, यूएई, कतर, फ्रांस, इजरायल और ईरान—के नेताओं से बातचीत कर हालात पर चर्चा की है। भारत कूटनीतिक स्तर पर भी स्थिति को स्थिर करने की कोशिश में जुटा है।




