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मेक इन इंडिया को बड़ी उड़ान: भारत में बनेंगे सैन्य हेलीकॉप्टर, अडाणी-लियोनार्डो का एमओयू

“भारत में सैन्य हेलीकॉप्टर निर्माण को लेकर अडाणी डिफेंस और इटली की लियोनार्डो के बीच एमओयू हुआ। इस साझेदारी से मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और रक्षा उत्पादन को मजबूती मिलेगी।”

नई दिल्ली। भारत में सैन्य हेलीकॉप्टर निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और इटली की प्रतिष्ठित एयरोस्पेस कंपनी लियोनार्डो ने रणनीतिक साझेदारी की है। इस साझेदारी के तहत भारत में आधुनिक सैन्य हेलीकॉप्टरों के निर्माण के लिए एक संयुक्त उद्यम स्थापित किया जाएगा।

 मेक इन इंडिया को नई उड़ान

यह समझौता भारत सरकार की मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूती देगा। दोनों कंपनियां मिलकर भारत में एक पूर्ण हेलीकॉप्टर मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम विकसित करेंगी, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी और लागत में कमी आएगी।

 दिल्ली में एमओयू पर हस्ताक्षर

अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस और लियोनार्डो के बीच यह एमओयू नई दिल्ली में हस्ताक्षरित हुआ। इस समझौते के तहत भारतीय सशस्त्र बलों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए AW169M और AW109 ट्रैकर जैसे अत्याधुनिक हेलीकॉप्टरों का निर्माण भारत में किया जाएगा।

 तकनीक ट्रांसफर और MRO सुविधा

लियोनार्डो इस करार के अंतर्गत अपनी उन्नत रक्षा तकनीक भारत के साथ साझा करेगी। इसके साथ ही मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधाएं और पायलट प्रशिक्षण केंद्र भी देश में ही विकसित किए जाएंगे।

 भारत में हेलीकॉप्टरों की कमी

फिलहाल भारत में जनसंख्या के अनुपात में हेलीकॉप्टरों की संख्या बेहद कम है। देश में कुल 250 से भी कम हेलीकॉप्टर हैं, जबकि अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में भारत को 1,000 से अधिक हेलीकॉप्टरों की आवश्यकता होगी।

 क्या बोले अधिकारी

अडाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के निदेशक जीत अडाणी ने कहा कि यह साझेदारी रक्षा और नागरिक विमानन दोनों क्षेत्रों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। वहीं, सीईओ आशीष राजवंशी ने इसे भारतीय सशस्त्र बलों की भविष्य की जरूरतों के लिए बेहद अहम बताया।

लियोनार्डो हेलीकॉप्टर्स के एमडी जियान पिएरो कुटिलो ने कहा कि भारत लियोनार्डो के लिए एक तेजी से उभरता हुआ रणनीतिक बाजार है।

भारत में सैन्य हेलीकॉप्टर निर्माण को लेकर अडाणी-लियोनार्डो की यह साझेदारी न केवल रक्षा क्षेत्र को मजबूत करेगी, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा विनिर्माण हब बनाने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगी।

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