25 साल बाद एक मंच पर केंद्रीय और राज्य निर्वाचन आयोग, चुनावी सिस्टम में होगा बड़ा बदलाव
“दिल्ली के भारत मंडपम में 24 फरवरी को चुनाव आयोग की महा बैठक। 25 साल बाद राज्य निर्वाचन आयोग भी होंगे शामिल, कॉमन वोटर रोल और EVM शेयरिंग पर मंथन।”
नई दिल्ली। देश की चुनावी व्यवस्था में बड़े सुधार की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग 24 फरवरी 2026 को दिल्ली के भारत मंडपम में एक ऐतिहासिक बैठक करने जा रहा है। इस बैठक की खास बात यह है कि करीब 25 साल बाद सभी राज्यों के राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) भी इसमें शामिल होंगे।
इस बैठक में देश के सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), राज्य निर्वाचन आयुक्त, कानूनी और तकनीकी विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे। पिछली बार इस स्तर की बैठक वर्ष 1999 में आयोजित की गई थी।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अध्यक्षता में होगी बैठक
बैठक की अध्यक्षता मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार करेंगे। इसे लेकर केंद्रीय चुनाव आयोग की ओर से भेजा गया आधिकारिक पत्र 6 फरवरी को उत्तराखंड राज्य निर्वाचन आयोग और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को प्राप्त हो चुका है, जिसके बाद तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
कॉमन वोटर रोल पर सबसे बड़ा मंथन
इस बैठक का पहला और सबसे अहम एजेंडा कॉमन वोटर रोल (Common Voter Roll) है। इसके तहत प्रस्ताव है कि लोकसभा, विधानसभा, नगर निकाय और पंचायत चुनावों के लिए एक ही मतदाता सूची का इस्तेमाल किया जाए।
यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो अलग-अलग चुनावों के लिए अलग-अलग वोटर लिस्ट बनाने की जरूरत खत्म हो जाएगी और चुनाव प्रक्रिया ज्यादा सरल, पारदर्शी और समयबद्ध हो सकेगी।
EVM शेयरिंग पर भी होगी चर्चा
दूसरा बड़ा मुद्दा EVM Sharing को लेकर है। बैठक में इस बात पर चर्चा होगी कि राज्यों में उपलब्ध EVM का इस्तेमाल न सिर्फ लोकसभा और विधानसभा चुनावों में, बल्कि नगर निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में भी किया जा सके।
इससे चुनावी खर्च कम होगा और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो पाएगा।
ECI Net डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रस्तुति
हाल ही में लॉन्च किए गए ECI Net डिजिटल प्लेटफॉर्म को लेकर भी बैठक में विस्तृत प्रस्तुति दी जाएगी। केंद्रीय चुनाव आयोग राज्य निर्वाचन आयुक्तों को इस प्लेटफॉर्म और EVM के प्रभावी इस्तेमाल की जानकारी देगा और उनसे सुझाव भी लेगा।
चुनावी प्रक्रियाओं में होगा समन्वय
केंद्रीय चुनाव आयोग का लक्ष्य है कि इस बैठक के जरिए केंद्रीय और राज्य निर्वाचन आयोगों के बीच समन्वय को मजबूत किया जाए, ताकि भविष्य में देश की चुनावी प्रणाली को और ज्यादा पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम और भरोसेमंद बनाया जा सके।



