संसद बजट सत्र 2026 में गतिरोध, विपक्षी शोर-शराबे से सदन स्थगित
“बजट सत्र 2026 के पहले चरण के अंतिम दिन विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। नई दिल्ली में चल रहे संसद के बजट सत्र में कई महत्वपूर्ण समितियों की रिपोर्ट पेश होनी थी”
नई दिल्ली | बजट सत्र 2026 के पहले चरण के अंतिम दौर में गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों के सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन में व्यवधान उत्पन्न हुआ और स्पीकर को बैठक स्थगित करनी पड़ी।
संसद के इस महत्वपूर्ण सत्र में सरकार की ओर से कई अहम रिपोर्ट और विधायी कार्य सूचीबद्ध थे, लेकिन हंगामे के चलते निर्धारित एजेंडा पूरा नहीं हो सका।
आज की कार्यसूची में क्या था शामिल?
लोकसभा सचिवालय की ओर से जारी कार्यसूची के अनुसार:
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बीजेपी सांसद मनोज तिवारी और चंद्र प्रकाश जोशी को बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस न रखने पर पेनल्टी चार्ज से संबंधित समिति की चौथी रिपोर्ट पेश करनी थी।
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सांसद भर्तृहरि महताब और अरुण भारती (LJP-RV) को वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास रणनीति पर 29वीं रिपोर्ट सदन में रखनी थी।
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सांसद डी पुरंदेश्वरी और भर्तृहरि महताब को विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025 पर संयुक्त समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय-सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव रखना था।
हालांकि, विपक्षी हंगामे के कारण इन सभी प्रस्तावों पर चर्चा और प्रस्तुति बाधित रही।
बजट सत्र 2026 का पूरा कार्यक्रम
संसद का बजट सत्र दो चरणों में आयोजित हो रहा है:
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पहला चरण: 31 जनवरी 2026 से 13 फरवरी 2026 तक
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दूसरा चरण: 9 मार्च 2026 से 2 अप्रैल 2026 तक
बुधवार को लोकसभा और राज्यसभा में यूनियन बजट 2026-27 पर चर्चा जारी रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्र के अंतिम दिनों में बढ़ता गतिरोध आगामी चुनावी समीकरणों और आर्थिक मुद्दों पर विपक्ष की रणनीतिक आक्रामकता को दर्शाता है।
बजट सत्र 2026 के दौरान लगातार हो रहा हंगामा सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव का संकेत माना जा रहा है। संसद में कार्यवाही बाधित होने से विधायी प्रक्रिया प्रभावित होती है और महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों में देरी की संभावना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, बैंकिंग नियमों और शिक्षा विधेयक जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति अपना रहा है, जबकि सरकार विकास और आर्थिक स्थिरता के एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।




