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प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों पर लगाई रोक

हाईकोर्ट ने नियुक्तियों में उपयुक्तता की समीक्षा के लिए डीओपीटी को आदेश भेजने को कहा था; सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर 10 सप्ताह में मांगा जवाब

उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) IAS संजय प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उन निर्देशों पर रोक लगा दी है जिनमें उनके आचरण पर टिप्पणी करते हुए DoPT को रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया गया था। जानिए पूरा मामला।

लखनऊ/नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजय प्रसाद को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें उनके आचरण पर गंभीर टिप्पणी करते हुए भविष्य की नियुक्तियों के लिए उनकी उपयुक्तता की समीक्षा कराने का निर्देश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति अतुल चन्दुरकर की खंडपीठ ने संजय प्रसाद की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के विवादित निर्देशों के अमल पर रोक लगा दी। साथ ही मामले में नोटिस जारी कर संबंधित पक्षों से 10 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि विशेष अनुमति याचिका दाखिल करने की अनुमति दी जाती है। मामले में नोटिस जारी किया जाए और प्रतिवादी पक्ष 10 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करे। अगली सुनवाई तक हाईकोर्ट के आदेश में दिए गए विवादित निर्देशों पर रोक रहेगी।

इस आदेश के साथ ही फिलहाल संजय प्रसाद के खिलाफ हाईकोर्ट द्वारा दिए गए प्रशासनिक निर्देश प्रभावहीन हो गए हैं।

हाईकोर्ट ने क्यों की थी टिप्पणी?

दरअसल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश में पुलिस सुधारों को लागू करने में हो रही देरी और प्रशासनिक स्तर पर उत्पन्न बाधाओं पर नाराजगी जताई थी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि संजय प्रसाद का व्यवहार न्यायालय के अधिकार और गरिमा को कमजोर करने की “जानबूझकर और सुनियोजित कोशिश” जैसा है। हाईकोर्ट ने यह भी माना था कि अदालत द्वारा समय-समय पर सुझाए गए पुलिस सुधारों को लागू करने में प्रशासनिक स्तर पर लगातार अड़चनें पैदा की गईं।

डीओपीटी को भेजने के दिए थे निर्देश

हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को आदेश की प्रति भेजने का निर्देश दिया था ताकि भविष्य में किसी भी महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति या पदस्थापना के समय संजय प्रसाद की उपयुक्तता का आकलन करते हुए इस आदेश पर भी विचार किया जा सके।

इसके साथ ही अदालत ने कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) के समक्ष भी इस आदेश को रखने की बात कही थी।

प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा

हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणियों के बाद यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया था। संजय प्रसाद उत्तर प्रदेश शासन के सबसे प्रभावशाली अधिकारियों में गिने जाते हैं और वर्तमान में गृह विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंतरिम राहत दिए जाने के बाद फिलहाल उनके खिलाफ हाईकोर्ट के निर्देशों पर अमल नहीं होगा। हालांकि मामले की अंतिम सुनवाई और सुप्रीम कोर्ट के विस्तृत फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।

अब इस मामले में संबंधित पक्षों को 10 सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट मामले की विस्तृत सुनवाई करेगा और तय करेगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणियां और निर्देश विधिसम्मत थे या नहीं।

तब तक के लिए संजय प्रसाद को बड़ी कानूनी राहत मिल गई है और हाईकोर्ट के आदेश के प्रभाव पर रोक बनी रहेगी।

 

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