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जौहर विश्वविद्यालय पर ED की नजर, 494 करोड़ के खर्च का ब्योरा नहीं दे पाया आजम खान का ट्रस्ट

आजम खान के जौहर ट्रस्ट पर ED की कार्रवाई के तहत रामपुर में आवास, जौहर विश्वविद्यालय और करीबियों के ठिकानों पर छापेमारी की गई। 494 करोड़ रुपये के खर्च और ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

रामपुर, उत्तर प्रदेश। समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान से जुड़े जौहर ट्रस्ट पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई से रामपुर में राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। बुधवार सुबह करीब सात बजे ईडी की टीम ने आजम खान के जेल रोड स्थित आवास, जौहर विश्वविद्यालय और उनके कुछ करीबियों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी शुरू की।

कार्रवाई का मुख्य केंद्र मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण व उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन बताए जा रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, विश्वविद्यालय के निर्माण पर करीब 494 करोड़ रुपये खर्च होने का ब्योरा ट्रस्ट से मांगा गया था, लेकिन आयकर विभाग के समक्ष इसका पूरा हिसाब और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

494 करोड़ रुपये के खर्च का हिसाब जांच के केंद्र में

आयकर विभाग ने ट्रस्ट से वर्ष 2015 से 2020 के दौरान हुई आय और व्यय का विवरण मांगा था। इसके साथ ही जौहर विश्वविद्यालय के लिए जमीन की खरीद, इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और निर्माण कार्यों पर खर्च की गई राशि से संबंधित दस्तावेज भी मांगे गए थे।

जांच में यह भी देखा जा रहा है कि विश्वविद्यालय और ट्रस्ट की गतिविधियों में इस्तेमाल हुई धनराशि का स्रोत क्या था और संबंधित खर्चों के समर्थन में पर्याप्त वित्तीय दस्तावेज उपलब्ध हैं या नहीं।

आयकर विभाग ने ट्रस्ट का पंजीकरण किया निरस्त

मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह है कि आयकर विभाग ने 23 जून को जौहर ट्रस्ट का पंजीकरण निरस्त कर दिया था। विभाग की कार्रवाई में आय-व्यय का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं कराने समेत अन्य कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था।

इसके बाद ट्रस्ट को नोटिस जारी कर वित्तीय रिकॉर्ड और विश्वविद्यालय के निर्माण से जुड़े खर्च का प्रमाण उपलब्ध कराने को कहा गया था।

11 संदिग्ध फर्मों के रिकॉर्ड भी मांगे गए

जांच का एक अन्य पहलू उन 11 फर्मों से जुड़ा है, जिनके बारे में आयकर विभाग ने जानकारी मांगी थी। इन फर्मों पर ट्रस्ट को दान के नाम पर करोड़ों रुपये देने का उल्लेख जांच में सामने आया है।

विभाग ने इन लेनदेन से संबंधित रिकॉर्ड और दस्तावेज मांगे थे। अब ईडी की कार्रवाई के बाद इन वित्तीय लेनदेन की जांच का दायरा और बढ़ने की संभावना है।

जुलाई में ईडी ने मांगा था मुकदमों का ब्योरा

आजम खान के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर भी ईडी ने जुलाई में पुलिस-प्रशासन से जानकारी मांगी थी। इसके बाद से ही रामपुर में ईडी की संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज थीं।

बुधवार सुबह की छापेमारी को इसी जांच की आगे की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, छापेमारी के दौरान क्या-क्या दस्तावेज या अन्य सामग्री मिली, इसकी आधिकारिक विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।

2022 में भी जौहर विश्वविद्यालय पहुंची थी ईडी

जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों में ईडी की दिलचस्पी नई नहीं है। वर्ष 2022 में भी ईडी की टीम विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों की प्रारंभिक पड़ताल के लिए रामपुर पहुंची थी।

अब ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड, विश्वविद्यालय के निर्माण पर हुए खर्च और धन के स्रोत से जुड़े सवालों की जांच फिर से चर्चा में है।

आजम खान से जुड़े मामलों का क्या है मामला?

आजम खान के खिलाफ उत्तर प्रदेश में कई आपराधिक और वित्तीय मामलों में कार्रवाई हो चुकी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके खिलाफ दर्ज मामलों में कई मुकदमों में अदालतों से फैसले भी आ चुके हैं।

वर्तमान में आजम खान रामपुर जेल में सजा काट रहे हैं। जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े निर्माण, जमीन और वित्तीय मामलों को लेकर भी उनके खिलाफ पहले से कानूनी कार्रवाई होती रही है।

हाल ही में रामपुर विकास प्राधिकरण की ओर से जौहर विश्वविद्यालय परिसर में कथित रूप से बिना स्वीकृत नक्शे के बनाए गए 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का मामला भी सामने आया था। मंडलायुक्त द्वारा ध्वस्तीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगाए जाने से उन्हें इस मामले में अस्थायी राहत मिली थी।

आगे क्या होगा?

ईडी की मौजूदा कार्रवाई के बाद जांच एजेंसी ट्रस्ट के वित्तीय दस्तावेज, बैंक लेनदेन, दान देने वाली संस्थाओं और विश्वविद्यालय के निर्माण में खर्च हुई राशि से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर सकती है। हालांकि, किसी वित्तीय अनियमितता या मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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