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उत्तर प्रदेश में भू-उपयोग परिवर्तन आसान, शुल्क में 50% तक कटौती; 6000 वर्गमीटर तक विकास प्राधिकरण लेंगे फैसला

उत्तर प्रदेश में भू-उपयोग परिवर्तन अब आसान होगा। योगी कैबिनेट ने 6000 वर्गमीटर तक भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार विकास प्राधिकरणों को देने और परिवर्तन शुल्क में 50 प्रतिशत तक कटौती का फैसला किया है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जमीन के भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया अब पहले की तुलना में आसान और कम खर्चीली होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े नियमों में संशोधन को मंजूरी दी गई है।

सरकार ने एक ओर जहां भू-उपयोग परिवर्तन की अनुमति से जुड़ा अधिकार विकेंद्रीकृत किया है, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग उपयोग के लिए लिए जाने वाले परिवर्तन शुल्क में भी बड़ी कटौती की है। नई व्यवस्था के तहत 6000 वर्गमीटर तक की भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार संबंधित विकास प्राधिकरणों को दिया जाएगा।

6000 वर्गमीटर तक शासन की मंजूरी की जरूरत नहीं

कैबिनेट के फैसले का सबसे अहम पहलू यह है कि अब 6000 वर्गमीटर तक की जमीन के भू-उपयोग परिवर्तन के लिए शासन स्तर पर अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। संबंधित विकास प्राधिकरण ही ऐसे मामलों पर निर्णय ले सकेंगे।

वहीं, 6000 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाली भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों में शासन की अनुमति आवश्यक होगी।

इस फैसले से विकास प्राधिकरणों के स्तर पर ही अधिक मामलों का निस्तारण होने की उम्मीद है, जिससे अनुमति की प्रक्रिया में लगने वाला समय कम हो सकता है।

किस जमीन के लिए कितना लगेगा भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क?

सरकार ने भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क की विभिन्न दरों में भी संशोधन किया है। नई दरें इस प्रकार हैं:

भू-उपयोग परिवर्तन पुरानी दर नई दर
कृषि से औद्योगिक सर्किल रेट का 20% 15%
आवासीय उपयोग 50% 25%
कार्यालय उपयोग 100% 50%
वाणिज्यिक उपयोग 150% 75%
मिश्रित उपयोग 125% 65%

इसमें सबसे अधिक स्पष्ट कटौती आवासीय, कार्यालय और वाणिज्यिक उपयोग वाली श्रेणियों में दिखाई देती है। वाणिज्यिक उपयोग के लिए शुल्क 150 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत किया गया है।

कृषि भूमि पर उद्योग लगाने वालों को भी राहत

नई व्यवस्था में कृषि भूमि का औद्योगिक उपयोग में परिवर्तन करने पर लगने वाले शुल्क को सर्किल रेट के 20 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत किया गया है।

इसका सीधा संबंध उन मामलों से है जहां कृषि उपयोग वाली जमीन पर औद्योगिक गतिविधि प्रस्तावित है। शुल्क में कमी से ऐसे भू-उपयोग परिवर्तन की लागत कम होगी।

आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में बड़ी कटौती

आवासीय उपयोग के लिए भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क अब 50 प्रतिशत के बजाय 25 प्रतिशत होगा। इसी तरह कार्यालय उपयोग के लिए शुल्क 100 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया है।

वाणिज्यिक उपयोग के मामले में भी शुल्क में 50 प्रतिशत की कटौती की गई है। पहले जहां सर्किल रेट का 150 प्रतिशत शुल्क निर्धारित था, अब यह 75 प्रतिशत होगा।

मिश्रित उपयोग के मामलों में भी शुल्क 125 प्रतिशत से घटाकर 65 प्रतिशत कर दिया गया है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डिजिटलीकरण पर जोर

आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क का निर्धारण, उद्ग्रहण एवं संग्रहण) नियमावली, 2014 में तीसरे संशोधन को कैबिनेट ने मंजूरी दी है।

विभागीय विशेष सचिव राजेश कुमार राय के अनुसार, यह बदलाव ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, डी-रेगुलेशन और डिजिटलीकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से जुड़ा है। भूमि संबंधी सेवाओं को ऑनलाइन प्रणाली से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है।

दूसरे राज्यों की व्यवस्था का भी अध्ययन

भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े अधिकारों के विकेंद्रीकरण से पहले दूसरे राज्यों में लागू व्यवस्था का अध्ययन किया गया। इसी के आधार पर उत्तर प्रदेश में भी 6000 वर्गमीटर तक की भूमि के मामलों में विकास प्राधिकरणों को अधिकार देने का फैसला किया गया है।

सरकार के अनुसार, राजस्थान में इस तरह की व्यवस्था पहले से लागू है।

कुछ परियोजनाओं में पहले से था विकास प्राधिकरणों को अधिकार

उत्तर प्रदेश टाउनशिप नीति-2023 के तहत परियोजना के लिए लाइसेंस हासिल करने वाले विकासकर्ताओं की भूमि के भू-उपयोग परिवर्तन का अधिकार सरकार पहले ही विकास प्राधिकरणों को दे चुकी है।

इसी तरह मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण योजना के तहत जमीन को कृषि से आवासीय उपयोग में बदलने का अधिकार भी विकास प्राधिकरणों को पहले से दिया गया है।

नई व्यवस्था अब भू-उपयोग परिवर्तन से जुड़े अधिक मामलों को विकास प्राधिकरणों के स्तर पर निपटाने की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव है।

क्या बदला, एक नजर में

भू-उपयोग परिवर्तन की सीमा: 6000 वर्गमीटर तक विकास प्राधिकरण के स्तर पर फैसला।
6000 वर्गमीटर से अधिक: शासन की अनुमति आवश्यक।
कृषि से उद्योग: 20% से घटकर 15%।
आवासीय: 50% से घटकर 25%।
कार्यालय: 100% से घटकर 50%।
वाणिज्यिक: 150% से घटकर 75%।
मिश्रित उपयोग: 125% से घटकर 65%।

यह बदलाव जमीन के उपयोग को बदलने वाले आवेदकों, डेवलपर्स और औद्योगिक परियोजनाओं से जुड़े पक्षों के लिए सीधे तौर पर महत्वपूर्ण है। हालांकि किसी विशेष जमीन पर लागू प्रक्रिया, दस्तावेज और अन्य स्वीकृतियां संबंधित विकास प्राधिकरण तथा लागू नियमों के अनुसार निर्धारित होंगी।

 

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