कौशांबी में बारूद का कहर: पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में 15 मौतें, चार एक ही परिवार के; पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई

Kaushambi Blast: कौशांबी की अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 15 लोगों की मौत हो गई, जिसमें 10 बच्चे शामिल हैं। लापरवाही के आरोप में इंस्पेक्टर समेत 9 पुलिसकर्मी निलंबित किए गए हैं।
कौशांबी। प्रयागराज-कौशांबी सीमा पर मनौरी के पास चिल्ला शहबाजी गांव में अवैध रूप से संचालित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने कई परिवारों को उजाड़ दिया है। सोमवार को हुए इस हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। इनमें 10 बच्चे, चार पुरुष और एक महिला शामिल हैं। हादसे में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिन्हें स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में वेंटिलेटर पर रखा गया है।
वहीं, मामले में पुलिस की लापरवाही भी सामने आने के बाद एक इंस्पेक्टर, छह उपनिरीक्षक और दो सिपाहियों समेत नौ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई पिपरी थाना और संबंधित चौकी में पिछले दो वर्षों के दौरान तैनात रहे पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई है।
दो साल पहले निलंबित हो चुका था फैक्ट्री का लाइसेंस
प्रशासन के अनुसार, जिस पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ, उसका लाइसेंस वर्ष 2024 में ही निलंबित कर दिया गया था। इसके बावजूद आबादी के बीच पटाखों का अवैध कारोबार जारी रहा। आरोप है कि नौशाद के बेटे आदिल ने बिना लाइसेंस के फैक्ट्री का संचालन जारी रखा।
फैक्ट्री के आसपास कई मकान और एक बूंदी का कारखाना भी स्थित था। सोमवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे पटाखे बनाने के लिए बारूद और अन्य ज्वलनशील पदार्थों का मिश्रण किए जाने के दौरान अचानक जोरदार धमाका हो गया। कुछ ही मिनट में पूरा मकान ढह गया और आसपास के कई भवन भी क्षतिग्रस्त हो गए।
धमाका इतना तेज कि ढाई किलोमीटर तक सुनाई दी आवाज
विस्फोट की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इसकी आवाज करीब ढाई किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। लगभग 500 मीटर के दायरे में सरिया और मकानों के मलबे के टुकड़े बिखर गए। धमाके से हाईटेंशन लाइन का पिलर भी क्षतिग्रस्त हुआ।
हादसे के बाद पुलिस, प्रशासन, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अग्निशमन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। एयरफोर्स के करीब 50 जवानों ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग किया। जेसीबी की मदद से मलबा हटाकर दबे लोगों की तलाश की गई।
एक ही परिवार के चार लोगों की मौत
हादसे में कई परिवारों ने अपने सदस्यों को खो दिया। एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हुई है, जबकि दो अन्य परिवारों के तीन-तीन सदस्यों की जान चली गई। मृतकों में बड़ी संख्या बच्चों की है, जिससे पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है।
मृतकों में प्रियांजलि (5), प्रवीण सिंह (13), जाह्नवी (12), आदित्य (12), रवि (8), ज्ञान सिंह (40), आदित्य (8), अंजू (23), विक्रम सरोज (35), अंश (6) और नन्हा (4) समेत अन्य लोग शामिल हैं। कुछ मृतकों की पहचान अभी पूरी तरह नहीं हो सकी है।
मानव अंगों से हुई सुनील की पहचान
हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एक मजदूर के शरीर के पूरे हिस्से नहीं मिल सके। 30 वर्षीय सुनील मौर्य पटाखा फैक्ट्री के पास स्थित बूंदी कारखाने में काम करता था। उसका कटा हुआ हाथ प्रयागराज और पैर कौशांबी के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा।
सुनील की पत्नी ने हाथ की पहचान की, जबकि उसकी बहन उमा देवी ने पैर देखकर भाई की पहचान की। पुलिस अब डीएनए जांच के जरिए इसकी आधिकारिक पुष्टि कराएगी।
नौ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
विस्फोट के बाद अवैध फैक्ट्री के संचालन और निगरानी में लापरवाही को लेकर पुलिस विभाग ने कड़ा कदम उठाया है। आईजी रेंज अजय कुमार मिश्रा के निर्देश पर एक निरीक्षक, छह उपनिरीक्षक और दो बीट आरक्षियों को निलंबित किया गया है।
निलंबित पुलिसकर्मियों में निरीक्षक शिवचरण राम तथा उपनिरीक्षक विकास सिंह, विनय सिंह, अजीत कुमार सिंह, अभिषेक गुप्ता, मनीष पाल और अमित द्विवेदी शामिल हैं। इससे पहले कौशांबी पुलिस ने दो बीट आरक्षियों को भी निलंबित किया था।
छह लोगों के खिलाफ मुकदमा
गया प्रसाद की तहरीर पर पिपरी थाने में नौशाद, उसकी पत्नी कहकसा बानो, भाई शकील, उसकी पत्नी शबाना, बेटे आदिल और बेटी साइना के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने अवैध फैक्ट्री संचालन से जुड़े कई लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि मुख्य आरोपी के फरार होने की बात सामने आई है।
मुख्यमंत्री ने आर्थिक सहायता का किया एलान
हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। प्रशासन ने मामले में दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का भरोसा दिया है।
हादसे की जांच के साथ अब यह भी सवाल उठ रहा है कि लाइसेंस निलंबित होने के बावजूद आबादी के बीच अवैध पटाखा फैक्ट्री कैसे चलती रही और संबंधित अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी। पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय होने की संभावना है।



