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गोंडा के हमजा बने ‘हेमंत सिंह’, लखनऊ में कराई घर वापसी: बोले– “हमारे पूर्वज हिंदू थे, मुगलों ने कराया था धर्मांतरण”

गोंडा के युवक हमजा अली ने लखनऊ में हिंदू धर्म अपनाकर नाम बदलकर हेमंत सिंह रखा। विश्व हिंदू रक्षा परिषद कार्यालय में “घर वापसी” का दावा, महादेव भक्ति और पूर्वजों को लेकर बयान चर्चा में।

लखनऊ, 20 जून (हि.स.)। राजधानी लखनऊ में शनिवार को एक युवक ने मुस्लिम धर्म छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने का दावा किया। गोंडा निवासी युवक हमजा अली ने स्वेच्छा से अपना नाम बदलकर हेमंत सिंह रख लिया और इसे “घर वापसी” बताया। इसी कार्यक्रम में बाराबंकी की एक महिला ने भी धर्म परिवर्तन कर हिंदू धर्म अपनाने का दावा किया।

लखनऊ में ‘घर वापसी’ कार्यक्रम, नाम बदलकर हेमंत सिंह बना युवक

गोमतीनगर स्थित एक संगठन कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में संगठन के पदाधिकारियों की मौजूदगी में युवक हमजा अली ने हिंदू धर्म अपनाने की घोषणा की। युवक ने कहा कि वह बचपन से ही भगवान शिव का भक्त रहा है और लंबे समय से हिंदू रीति-रिवाजों में आस्था रखता है।

युवक ने दावा किया कि उसके पूर्वज हिंदू थे और ऐतिहासिक परिस्थितियों में उनका धर्म परिवर्तन हुआ था। उसने कहा कि वह अब स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाकर नया जीवन शुरू कर रहा है।

“परिवार माने या न माने, मैंने निर्णय ले लिया है”

हमजा अली से हेमंत सिंह बने युवक ने बताया कि वह बालिग है और अपने निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र है। उसने कहा कि पिछले 5–6 वर्षों से वह नियमित नमाज नहीं पढ़ रहा था और धीरे-धीरे इस्लाम से दूरी बना ली थी।

युवक ने यह भी दावा किया कि वह कभी मदरसे नहीं गया और धार्मिक शिक्षा से भी उसका जुड़ाव सीमित रहा। उसने कहा कि वह चाहता है कि उसके परिवार के अन्य सदस्य भी हिंदू धर्म अपनाएं।

बाराबंकी की महिला ने भी बदला धर्म, बनी ‘संजना’

इसी कार्यक्रम में बाराबंकी की एक महिला ने भी इस्लाम छोड़कर हिंदू धर्म अपनाने का दावा किया। महिला ने बताया कि उसका पूर्व नाम शबनम था, जिसे बदलकर अब उसने संजना रख लिया है।

महिला ने कहा कि उसने स्वेच्छा से यह निर्णय लिया है और उस पर किसी प्रकार का दबाव नहीं है। उसने बताया कि उसे बचपन से ही हिंदू धर्म में रुचि रही है और वह आगे भी पूजा-पाठ करती रहेगी।

संगठन का दावा: हेल्पलाइन से मिल रही ‘घर वापसी’ में मदद

कार्यक्रम से जुड़े संगठन के अध्यक्ष ने दावा किया कि उनकी हेल्पलाइन पर देशभर से लोग संपर्क कर रहे हैं और कई लोग “घर वापसी” के लिए आगे आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन धर्मांतरण नहीं कराता, बल्कि केवल “घर वापसी” में मदद करता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि इससे पहले भी कई लोगों की घर वापसी कराई जा चुकी है और भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम जारी रहेंगे।

संगठन ने लगाए गंभीर आरोप, सीमावर्ती क्षेत्रों में सम्मेलन की घोषणा

संगठन के अध्यक्ष ने यह भी दावा किया कि पश्चिम बंगाल और अन्य क्षेत्रों में “सनातन संस्कृति के प्रचार” के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि 28 जून को बांग्लादेश सीमा के पास एक राष्ट्रीय सम्मेलन भी प्रस्तावित है।

स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज

इस घटना के बाद लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अलग-अलग सामाजिक संगठनों की ओर से इस तरह के “घर वापसी” कार्यक्रमों को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

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