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वैश्वीकरण खतरनाक, विश्व गुरु बनना है तो सत्य के पीछे शक्ति जरूरी:मोहन भागवत

मोहन भागवत लखनऊ बयान: “लखनऊ विश्वविद्यालय में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि वैश्वीकरण बाजारीकरण है और खतरनाक है। भारत को विश्व गुरु बनने के लिए सत्य के पीछे शक्ति लानी होगी। शिक्षा-स्वास्थ्य को व्यवसाय न बनाने पर भी दिया जोर। “

लखनऊ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने लखनऊ विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में आयोजित शोधार्थी संवाद कार्यक्रम में वैश्वीकरण और शिक्षा व्यवस्था पर अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण का अर्थ आज बाजारीकरण बन गया है, जो खतरनाक है। भारत यदि विश्व गुरु बनना चाहता है तो उसे सत्य के पीछे शक्ति लानी होगी।

वसुधैव कुटुंबकम’ की अवधारणा

भागवत ने कहा कि भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना में विश्वास करता है। जब तक सब सुखी नहीं होंगे, तब तक कोई एक व्यक्ति भी पूर्ण रूप से सुखी नहीं हो सकता।

उन्होंने उपभोगवादी जीवनशैली से बचने की सलाह देते हुए कहा कि पश्चिमी देशों ने जड़वाद को बढ़ावा दिया है। उनकी सोच बलशाली बनकर दूसरों को पीछे छोड़ने की रही है, जबकि भारत का दर्शन सबको साथ लेकर चलने का है।

शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवसाय नहीं

संघ प्रमुख ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य को व्यवसाय नहीं बनाया जाना चाहिए। यह सभी के लिए सुलभ और समान रूप से उपलब्ध होना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिमी प्रभाव के चलते हमारी पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था को हटाकर ऐसी प्रणाली थोपी गई, जिससे केवल ‘काले अंग्रेज’ तैयार हों। अब समय है कि जो बिगड़ा है, उसे सुधारा जाए।

शोध की भूमिका पर जोर

भागवत ने शोधार्थियों से कहा कि भारत की दिशा और दशा बदलने में शोध की बड़ी भूमिका है। उन्होंने संघ को लेकर होने वाले दुष्प्रचार का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ को पढ़कर नहीं, बल्कि अंदर से समझना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संघ किसी के विरोध में नहीं है और उसे लोकप्रियता या शक्ति की चाह नहीं है। शोधार्थियों को प्रामाणिकता के साथ सत्य को सामने लाना चाहिए।

धर्म और पर्यावरण पर विचार

भागवत ने कहा कि सृष्टि जिन नियमों से चलती है, वही धर्म है। धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि धूल का एक भी कण धर्मनिरपेक्ष नहीं हो सकता।

उन्होंने पर्यावरण के प्रति मित्र भाव रखने और निःस्वार्थ भाव से देश सेवा करने का संदेश दिया।

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