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एसजीपीजीआई का 30वाँ दीक्षांत समारोह पारंपरिक गरिमा एवं उत्साह के साथ सम्पन्न

एसजीपीजीआई लखनऊ का 30वां दीक्षांत समारोह राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में सम्पन्न हुआ। समारोह में 279 विद्यार्थियों को उपाधियां दी गईं और उत्कृष्ट शोध व चिकित्सा सेवाओं के लिए सम्मान प्रदान किए गए।

लखनऊ । एसजीपीजीआई लखनऊ का 30वाँ दीक्षांत समारोह दिनांक 14 जुलाई 2026 को संस्थान के श्रुति सभागार में पारंपरिक गरिमा एवं उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। समारोह की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश की माननीया राज्यपाल एवं एसजीपीजीआईएमएस की कुलाध्यक्ष श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी ने की।

समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा शिक्षा, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, श्री बृजेश पाठक जी तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की सचिव एवं महानिदेशक, श्रीमती नेहा शर्मा, आईएएस की भी गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह का शुभारंभ पारंपरिक शैक्षणिक शोभायात्रा (Academic Procession) के भव्य आगमन के साथ हुआ। इसके उपरांत माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी ने 30वें दीक्षांत समारोह के औपचारिक शुभारंभ की घोषणा की।

स्वागत उद्बोधन श्रीमती नेहा शर्मा, आईएएस, सचिव एवं महानिदेशक, चिकित्सा शिक्षा, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आर. के. धीमन ने संस्थान की प्रगति, उपलब्धियों तथा आगामी पाँच वर्षों की विकास-दृष्टि (Vision) पर आधारित रिपोर्ट प्रस्तुत की। (संलग्न) इसके उपरांत निदेशक द्वारा दीक्षांत उपदेश (Convocation Sermon) दिया गया तथा सभी उपाधि प्राप्तकर्ताओं को शपथ दिलाई गई। माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी द्वारा सभी उपाधियाँ डिजिलॉकर (DigiLocker) पर वर्चुअल रूप से अपलोड की गईं।

संस्थान में शोध एवं नैदानिक उत्कृष्टता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 13 संकाय सदस्यों एवं रेज़िडेंट चिकित्सकों को सम्मानित किया गया। माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी द्वारा प्रो. एस. एस. अग्रवाल पुरस्कार, प्रो. एस. आर. नाइक पुरस्कार, प्रो. आर. के. शर्मा पुरस्कार, डॉ. सब्यसाची सरकार पुरस्कार, तथा सर्वाधिक पेटेंट, सर्वाधिक इंट्राम्यूरल एवं एक्स्ट्राम्यूरल अनुसंधान अनुदान प्राप्त करने वाले उत्कृष्ट प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

इस वर्ष पहली बार संस्थान के सर्वश्रेष्ठ संकाय सदस्य को विभिन्न कठोर मूल्यांकन मानकों के आधार पर “राज्यपाल स्वर्ण पदक (Governor’s Gold Medal)” से सम्मानित किया गया। यह प्रतिष्ठित सम्मान नेफ्रोलाजी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर नारायण प्रसाद को माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी द्वारा प्रदान किया गया।

इस अवसर पर माननीया राज्यपाल द्वारा दो पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया—

“Essentials of Breast Surgery: A Handbook for Trainees and Surgeons”
लेखक: प्रो. सबरेत्नम मयिलवगानन, एंडोक्राइन सर्जरी विभाग एवं प्रो. गौरव अग्रवाल, विभागाध्यक्ष, एंडोक्राइन सर्जरी।

“From Hope to Healing: A Practical Guide to Transplant System in India”
लेखक: प्रो. राजेश हर्षवर्धन, विभागाध्यक्ष, अस्पताल प्रशासन।

इसके उपरांत एसजीपीजीआई द्वारा गोद लिए गए गांवों के विद्यालयों के बच्चों ने माँ की भूमिका एवं उनके अमूल्य स्थान पर आधारित एक प्रेरणादायक प्रस्तुति तथा गुजराती लोकनृत्य प्रस्तुत किया, जिसकी उपस्थित जनसमूह ने अत्यंत सराहना की। माननीया राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी ने बच्चों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कृत भी किया।

उत्तर प्रदेश के माननीय उपमुख्यमंत्री श्री बृजेश पाठक ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी विजेताओं को उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण एवं उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए बधाई दी। उत्तीर्ण विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “आज डिग्री प्राप्त करते समय आपने जो शपथ ली है, उसे अपने संपूर्ण व्यावसायिक जीवन में सदैव निभाएं। अपने प्रत्येक मरीज को ईश्वर का स्वरूप मानकर करुणा, सम्मान और पूर्ण समर्पण के साथ उनकी सेवा करें।”

इसके उपरांत उत्तर प्रदेश की माननीया राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने बहराइच की पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) श्रीमती हर्षिता तिवारी तथा मुख्य विकास अधिकारी श्री सुनील कुमार धनवंता को एचपीवी (HPV) टीकाकरण प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। माननीय राज्यपाल ने पाँच आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी किट वितरित कीं। माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने 30वें दीक्षांत समारोह में उपाधि एवं पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि एसजीपीजीआई आज देश ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ-साथ हमें अपनी कमियों को भी पहचानना चाहिए तथा निरंतर सुधार के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। उन्होंने आंगनवाड़ी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया तथा कहा कि भावी पीढ़ी के बेहतर स्वास्थ्य की दृष्टि से एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है।

माननीय राज्यपाल ने आरोग्य मंदिर तथा आयुष्मान भारत योजना की महत्ता पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि ये पहलें प्रत्येक नागरिक तक सुलभ, समान एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि समर्पण, नवाचार और उत्कृष्टता के बल पर अगले वर्ष राष्ट्रीय रैंकिंग में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करें।”
उपाधियों के वितरण से पूर्व एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आर. के. धीमन ने मंचासीन अतिथियों का पौधे भेंट कर सम्मानित किया।
इसके उपरांत संस्थान के विभिन्न पाठ्यक्रमों के कुल 279 उत्तीर्ण विद्यार्थियों को कार्यकारी कुलसचिव कर्नल वरुण बाजपेयी, अधिष्ठाता (डीन) प्रो. शालीन कुमार तथा निदेशक प्रो. आर. के. धीमन द्वारा उपाधियाँ प्रदान की गईं।

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