सुपर अल नीनो से खरीफ फसलों पर संकट, कम पानी वाली फसलों की खेती अपनाने की सलाह
सुपर अल नीनो और कमजोर मानसून के कारण उत्तर प्रदेश में धान और मक्का की खेती पर सूखे का खतरा बढ़ गया है। कृषि विभाग ने किसानों को डीएसआर तकनीक, कम पानी वाली फसलें, आधुनिक सिंचाई और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अपनाने की सलाह दी है।
गोरखपुर। उत्तर प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान किसानों की चिंता बढ़ गई है। Super El Niño और मानसून की धीमी रफ्तार के कारण धान और मक्का जैसी प्रमुख फसलों पर सूखे का खतरा मंडराने लगा है। इसे देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए कम पानी वाली फसलों, आधुनिक सिंचाई तकनीकों और फसल बीमा अपनाने की सलाह दी है।
क्या है Super El Niño?
सुपर अल नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि की स्थिति है। इसके प्रभाव से वैश्विक मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे भारत सहित कई क्षेत्रों में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका रहती है। कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों, विशेषकर धान और मक्का की खेती पर पड़ सकता है।
कृषि विभाग ने किसानों को किया अलर्ट
गोरखपुर के जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजमंगल चौधरी ने बताया कि संभावित सूखे के प्रभाव को कम करने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है। विभाग गांव-गांव अभियान चलाकर किसानों को बदलते मौसम के अनुसार खेती की तकनीक अपनाने की सलाह दे रहा है, ताकि उत्पादन और आय पर प्रतिकूल असर कम हो।
DSR तकनीक से 40 प्रतिशत तक पानी की बचत
कृषि विभाग ने किसानों को डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) यानी धान की सीधी बुआई की पद्धति अपनाने की सलाह दी है। इस तकनीक से पारंपरिक रोपाई की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत तक पानी की बचत संभव है। विभाग ने कहा है कि जहां पर्याप्त सिंचाई उपलब्ध हो, वहीं धान की खेती की जाए।
कम पानी वाली फसलों को दें प्राथमिकता
जिन क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता कम है, वहां किसानों को कम अवधि और कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती करने की सलाह दी गई है। इनमें प्रमुख रूप से—
- अरहर
- मूंग
- उड़द
- तिल
- मूंगफली
- ज्वार
- बाजरा
जैसी दलहन, तिलहन और मोटे अनाज शामिल हैं।
आधुनिक सिंचाई और मेड़बंदी पर जोर
कृषि विभाग ने किसानों को ड्रिप सिंचाई, स्प्रिंकलर सिस्टम, खेतों की मेड़बंदी, वर्षा जल संरक्षण और मल्चिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करने की सलाह दी है। इन उपायों से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है और पानी की खपत कम होती है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ उठाएं
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी प्राकृतिक आपदा या मौसम जनित नुकसान से बचाव के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा अवश्य कराएं। साथ ही खाद और बीज खरीदने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का उपयोग करने की भी सलाह दी गई है।
पूर्वांचल में मानसून की देरी से बढ़ी चिंता
मौसम वैज्ञानिक कैलाश पांडेय के अनुसार पूर्वांचल में मानसून सामान्य से पीछे चल रहा है और इसके और विलंब होने की संभावना है। ऐसे में किसानों के सामने सिंचाई और उत्पादन दोनों की चुनौती बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि विभाग की सलाह पर समय रहते अमल करने से नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।




