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सीओ जियाउल हक हत्याकांड: राजा भैया को CBI कोर्ट से राहत, पांचों के खिलाफ कार्यवाही समाप्त

सीओ जियाउल हक हत्याकांड में कुंडा विधायक राजा भैया को CBI कोर्ट से राहत मिली है। अदालत ने दोबारा जांच के बाद CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए पांच लोगों के खिलाफ आगे की कार्यवाही समाप्त कर दी।

प्रयागराज/प्रतापगढ़। सीओ जियाउल हक हत्याकांड में कुंडा विधायक और जनसत्ता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया को लखनऊ की विशेष CBI अदालत से कानूनी राहत मिली है। विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा सिंह की अदालत ने मामले की दोबारा जांच के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की ओर से दाखिल क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली। इसके साथ ही राजा भैया समेत पांच नामजद लोगों के खिलाफ आगे की अदालती कार्यवाही समाप्त कर दी गई।

अदालत के आदेश के मुताबिक राजा भैया के अलावा हरिओम श्रीवास्तव, गुलशन यादव, गुड्डू सिंह और रोहित सिंह के खिलाफ भी कार्यवाही आगे नहीं बढ़ेगी। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, विशेषज्ञ राय और दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद आगे कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया।

CBI की दोबारा जांच के बाद दाखिल हुई थी क्लोजर रिपोर्ट

सीओ जियाउल हक की पत्नी परवीन आजाद की ओर से दाखिल शिकायत और पहले की जांच को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CBI ने मामले की दोबारा जांच शुरू की थी। जांच पूरी करने के बाद CBI ने दिसंबर 2023 में फिर से क्लोजर रिपोर्ट अदालत में दाखिल की थी।

CBI की रिपोर्ट में राजा भैया और अन्य नामजद लोगों के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने की बात कही गई थी। परवीन आजाद ने इस क्लोजर रिपोर्ट का विरोध किया और आरोपियों की भूमिका की दोबारा जांच की मांग की थी। अदालत ने उपलब्ध सामग्री का परीक्षण करने के बाद CBI की अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया।

2 मार्च 2013 को हुई थी सीओ जियाउल हक की हत्या

यह मामला 2 मार्च 2013 को प्रतापगढ़ के हथिगवां थाना क्षेत्र के बलीपुर गांव में हुई घटना से जुड़ा है। उस दिन ग्राम प्रधान नन्हे यादव की हत्या के बाद तत्कालीन कुंडा क्षेत्राधिकारी जियाउल हक मौके पर पहुंचे थे। इसी दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

हत्याकांड के बाद मामले में कई एफआईआर दर्ज हुईं और जांच CBI को सौंपी गई। घटना में नामजद आरोपियों में राजा भैया समेत अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की गई। बाद में मामले की जांच और न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय तक जारी रही।

जियाउल हक हत्याकांड में 10 आरोपियों को हो चुकी है उम्रकैद

मुख्य हत्याकांड से जुड़े एक मामले में लखनऊ की विशेष CBI अदालत ने अक्टूबर 2024 में 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। अदालत ने फूलचंद यादव, पवन यादव, मंजीत यादव, घनश्याम सरोज, रामलखन गौतम, छोटेलाल यादव, राम आसरे, पन्नालाल पटेल, शिवराम पासी और जगत बहादुर पटेल को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी।

वहीं, राजा भैया समेत पांच लोगों से संबंधित अलग शिकायत और CBI की दोबारा जांच वाली प्रक्रिया में अदालत ने अब CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। इसलिए इस आदेश को उसी कार्यवाही के संदर्भ में समझना महत्वपूर्ण है।

अदालत ने आगे की कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना

अदालत के आदेश के अनुसार उपलब्ध रिकॉर्ड और CBI की जांच सामग्री का परीक्षण करने के बाद नामजद आरोपियों के खिलाफ संज्ञान लेकर आगे कार्यवाही चलाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिला। अदालत ने CBI की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार करते हुए संबंधित कार्यवाही समाप्त कर दी।

कानूनी रूप से यह आदेश CBI की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने और इस मामले में संबंधित आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्यवाही समाप्त करने से जुड़ा है। इसे अलग से उन 10 आरोपियों की दोषसिद्धि से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, जिन्हें 2024 में मुख्य हत्याकांड में सजा सुनाई गई थी।

फैसले के बाद राजा भैया ने क्या कहा?

अदालत के फैसले के बाद राजा भैया ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।’

जनसत्ता दल के नेताओं और समर्थकों ने अदालत के फैसले पर खुशी जताई। पार्टी नेता दिनेश तिवारी ने कहा कि फैसले के बाद कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में खुशी का माहौल है। पार्टी से जुड़े अन्य नेताओं और समर्थकों ने भी एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी।

अब क्या हुआ?

लखनऊ की विशेष CBI अदालत द्वारा क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद राजा भैया, हरिओम श्रीवास्तव, गुलशन यादव, गुड्डू सिंह और रोहित सिंह के खिलाफ इस शिकायत से संबंधित आगे की न्यायिक कार्यवाही समाप्त हो गई है। यह फैसला 2013 के जियाउल हक हत्याकांड से जुड़े इस विशेष जांच प्रकरण में आया है।

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