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ईरान ने खार्ग द्वीप को बनाया ‘किला’, अमेरिकी हमले की आशंका से हाई अलर्ट

खार्ग द्वीप को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ गया है। ईरान ने द्वीप को सैन्य किले में बदल दिया है, जबकि अमेरिका कब्जे की रणनीति पर विचार कर रहा है। इससे स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज और वैश्विक तेल सप्लाई पर असर की आशंका बढ़ी।

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की योजना पर विचार कर रहा है। इस आशंका के बीच ईरान ने द्वीप की सुरक्षा को अभेद्य किले में तब्दील करना शुरू कर दिया है।

खार्ग द्वीप ईरान के लिए बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि देश के कुल कच्चे तेल निर्यात का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस द्वीप पर नियंत्रण को लेकर किसी भी सैन्य कार्रवाई का असर न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी रणनीति के तहत इस द्वीप पर कब्जा कर ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश की जा सकती है, ताकि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोल दे। यह जलमार्ग दुनिया के तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है।

इधर, संभावित खतरे को देखते हुए ईरान ने खार्ग द्वीप पर व्यापक सैन्य तैयारियां शुरू कर दी हैं। बताया जा रहा है कि द्वीप के तटीय इलाकों में बड़ी मात्रा में बारूदी सुरंगें बिछाई गई हैं और उभयचर हमलों को रोकने के लिए विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइल प्रणालियों (MANPADs) की भी तैनाती बढ़ा दी गई है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका इस द्वीप पर जमीनी हमला करता है, तो उसे भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ सकता है।

हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों से तनाव साफ नजर आ रहा है।

इस बीच, खार्ग द्वीप को लेकर बढ़ा विवाद सीधे तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति से जुड़ा है, जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि हालात इसी तरह बिगड़ते रहे, तो यह संघर्ष व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ने की आशंका है।

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