राम मंदिर दान घोटाले में नया खुलासा, बनारस की एजेंसी के कर्मचारियों पर SIT का शिकंजा
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में वाराणसी कनेक्शन सामने आया है। एसआईटी ने वाराणसी की एक सिक्योरिटी एजेंसी से जुड़े छह कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। एजेंसी संचालक ने कर्मचारियों की तैनाती और जिम्मेदारी को लेकर बैंक प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं।
वाराणसी/अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। अब इस मामले में वाराणसी का कनेक्शन भी सामने आया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच में गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से छह कर्मचारी वाराणसी की एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी के माध्यम से नियुक्त किए गए थे।
इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों ने कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया, तैनाती और उनकी भूमिका की विस्तृत पड़ताल शुरू कर दी है।
22 कर्मचारियों में से छह पहुंचे जेल
जानकारी के अनुसार, संबंधित सिक्योरिटी एजेंसी ने कुल 22 कर्मचारियों को अयोध्या स्थित बैंक शाखा में हाउसकीपिंग कार्यों के लिए उपलब्ध कराया था। एसआईटी की जांच में इन्हीं कर्मचारियों में से छह को चढ़ावे की गिनती और कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कर्मचारियों की वास्तविक जिम्मेदारियां क्या थीं और उन्हें चढ़ावे से जुड़े संवेदनशील कार्यों तक पहुंच कैसे मिली।
एजेंसी मालिक ने बैंक प्रबंधन पर उठाए सवाल
सिक्योरिटी एजेंसी के संचालक ने दावा किया है कि उनकी कंपनी ने कर्मचारियों की भर्ती केवल हाउसकीपिंग सेवाओं के लिए की थी। उनका कहना है कि कर्मचारियों से किस प्रकार का कार्य कराया जा रहा था, इसकी जानकारी एजेंसी को नहीं थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों की तैनाती और कार्य निर्धारण पूरी तरह बैंक प्रबंधन के निर्देशों के अनुसार किया गया था और एजेंसी की भूमिका केवल मानव संसाधन उपलब्ध कराने तक सीमित थी।
बिना पुलिस सत्यापन के हुई नियुक्तियां
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया है कि कर्मचारियों की नियुक्ति कथित रूप से बिना पुलिस सत्यापन के की गई थी। एजेंसी संचालक का दावा है कि संबंधित बैंक शाखा के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक की सिफारिश पर सभी कर्मचारियों की नियुक्ति की गई थी।
उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों के नाम और बायोडाटा बैंक प्रबंधन की ओर से उपलब्ध कराए गए थे और उसी आधार पर उन्हें नियुक्त किया गया।
एसआईटी कर रही भर्ती प्रक्रिया की जांच
एसआईटी अब यह जांच कर रही है कि संवेदनशील धार्मिक स्थल और करोड़ों रुपये के चढ़ावे की व्यवस्था से जुड़े कार्यों में कर्मचारियों की तैनाती किन प्रक्रियाओं के तहत हुई थी। जांच टीम भर्ती प्रक्रिया, दस्तावेजों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।
सूत्रों के अनुसार, जांच का दायरा बैंक अधिकारियों, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े लोगों और अन्य संबंधित एजेंसियों तक भी बढ़ाया जा सकता है।
26 साल पुरानी एजेंसी पर उठे सवाल
यह सिक्योरिटी एजेंसी पिछले करीब 26 वर्षों से सुरक्षा, हाउसकीपिंग और कैश लॉजिस्टिक्स सेवाओं के क्षेत्र में कार्यरत है। एजेंसी का दावा है कि उसके लगभग 2,000 कर्मचारी विभिन्न राज्यों में सेवाएं दे रहे हैं और उसका मंदिर प्रशासन या धार्मिक संस्थानों के संचालन से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
एजेंसी संचालक का कहना है कि उनकी कंपनी ने केवल संविदा के तहत कर्मचारियों की उपलब्धता सुनिश्चित की थी और कर्मचारियों से कराए जा रहे कार्यों की निगरानी संबंधित संस्थान की जिम्मेदारी थी।
जांच के घेरे में पूरी व्यवस्था
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एसआईटी लगातार गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां चढ़ावे की गिनती, नकदी प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली से जुड़े प्रत्येक पहलू की समीक्षा कर रही हैं।
मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।



