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‘पासपोर्ट नहीं दिखाऊंगी’,चुनाव आयोग पर बरसी ममता की मंत्री

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सियासी संग्राम तेज हो गया है। राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री शशि पांजा ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए इसे मतदाताओं का उत्पीड़न करार दिया है।

कोलकाता के केशव एकेडमी स्थित सुनवाई केंद्र से बाहर निकलते ही मंत्री शशि पांजा ने कहा कि वह अपना पासपोर्ट कतई नहीं दिखाएंगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह उनका लोकतांत्रिक विरोध है और आयोग की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

‘2002 से वोटर, फिर भी नोटिस क्यों?’

शशि पांजा ने बताया कि उनका नाम वर्ष 2002 से मतदाता सूची में दर्ज है और वह तीन बार निर्वाचित विधायक रह चुकी हैं। इसके बावजूद उन्हें SIR सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया गया, जबकि उनके परिवार के अन्य सदस्यों को कोई नोटिस नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि नोटिस में उनके द्वारा दी गई जानकारी को अधूरी बताया गया, जिससे उनकी वैधता पर संदेह जताया गया। मंत्री ने सवाल किया कि वर्षों से मतदान कर रहे एक जनप्रतिनिधि की नागरिकता पर संदेह करना आखिर किस एजेंडे का हिस्सा है?

11 अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग पर नाराजगी

मंत्री के अनुसार, आधार कार्ड और अन्य सत्यापित दस्तावेज जमा करने के बावजूद उनसे 11 वैकल्पिक दस्तावेजों की मांग की गई। उन्होंने इसे सामान्य प्रक्रिया नहीं बल्कि सुनियोजित ‘हैरसमेंट’ करार दिया।

शशि पांजा ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग कुछ विशेष निर्देशों के तहत काम कर रहा है, जिसका उद्देश्य सत्तारूढ़ दल के नेताओं और आम मतदाताओं को परेशान करना है।

टीएमसी का आरोप—भाजपा की साजिश

तृणमूल कांग्रेस पहले से ही SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर हमलावर है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस पूरी कवायद को भाजपा की साजिश बता चुकी हैं। शशि पांजा ने कहा कि जब एक कैबिनेट मंत्री को इस तरह की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है, तो आम नागरिकों की स्थिति की कल्पना की जा सकती है।

मंत्री ने साफ किया कि वह अपनी उच्च शिक्षा से जुड़े प्रमाण पत्र देने को तैयार हैं, लेकिन पासपोर्ट न दिखाना उनका संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। अब सभी की नजरें राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।

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