Breaking NewsE-paperMain Slidesउत्तर प्रदेशनई दिल्लीभारतराजनीतिराज्यलखनऊसमाचार

यूपी का बड़ा घोटाला, 97 आरोपी, 35 जेल में; कहां गए करोड़ों रुपये?

“Chitrakoot Treasury Scam में 2018 से 2025 के बीच 43.13 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला सामने आया है। 97 आरोपी, 35 जेल में, मृत पेंशनरों और फर्जी खातों से रकम निकाली गई। एसआईटी जांच जारी।”

चित्रकूट। Chitrakoot Treasury Scam उत्तर प्रदेश का अब तक का सबसे गंभीर वित्तीय घोटाला बनता जा रहा है। चित्रकूट कोषागार में वर्ष 2018 से 2025 के बीच अधिकारियों, कर्मचारियों और दलालों की मिलीभगत से करीब 43.13 करोड़ रुपये का गबन किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि यह खेल सात वर्षों तक चलता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी।

फर्जी भुगतान आदेशों से निकाले गए करोड़ों

जांच में सामने आया है कि फर्जी भुगतान आदेश तैयार कर 93 पेंशनरों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए। इनमें से चार खाते मृत पेंशनरों के नाम पर दोबारा खोले गए थे, जबकि एक खाता राजेंद्र कुमार नामक ऐसे व्यक्ति के नाम से संचालित हुआ, जिसका कोई वास्तविक अस्तित्व ही नहीं मिला।

97 आरोपी, 35 जेल में

वरिष्ठ कोषाधिकारी रमेश सिंह की तहरीर पर 17 अक्टूबर को कर्वी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज की गई। इस मामले में अब तक 97 लोग आरोपी बनाए गए हैं, जिनमें कोषागार अधिकारी, कर्मचारी, दलाल और खाताधारक शामिल हैं।
पुलिस अब तक 24 पेंशनर और 8 दलाल सहित 35 आरोपियों को जेल भेज चुकी है। मुख्य आरोपियों में सहायक कोषाधिकारी विकास सचान और पटल सहायक अशोक वर्मा भी शामिल हैं। एक आरोपी संदीप श्रीवास्तव की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है।

95 बैंक खाते सीज, 3.98 करोड़ की रिकवरी

एसआईटी और पुलिस की कार्रवाई में 95 बैंक खातों को सीज किया गया है। इनमें भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक और आर्यावर्त बैंक के खाते शामिल हैं।
अब तक 3.98 करोड़ रुपये की रिकवरी हो चुकी है, लेकिन शेष राशि का कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है।

कैसे हुआ घोटाले का खुलासा

10 सितंबर 2025 को नेवरा थाना क्षेत्र निवासी जगतराम तिवारी ने शिकायत की कि उनके खाते में बिना जानकारी के 45 लाख रुपये ट्रेजरी से आ गए। इसी तरह खंडेहा निवासी कमला देवी के खाते में 31 लाख रुपये ट्रांसफर हुए।
इन शिकायतों के बाद ऑडिट कराया गया, जिसमें करोड़ों रुपये के फर्जी लेनदेन का खुलासा हुआ।

तीन खातों से 10 करोड़ से ज्यादा की निकासी

जांच में पाया गया कि सिर्फ तीन खातों से 10 करोड़ रुपये से अधिक की रकम निकाली गई।
सबसे अधिक राशि शिव प्रसाद, रामखेलावन, राजेंद्र कुमार, गिरिजेश, धनपति देवी और लक्ष्मी देवी के खातों में भेजी गई।

कमीशन का पूरा सिंडिकेट

घोटाले में खाताधारक को 10 प्रतिशत और बिचौलिये को 20 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था।
रकम ट्रांसफर होने के 24 से 48 घंटे के भीतर निकाल ली जाती थी।
सिंडिकेट ने खासतौर पर ऐसे बुजुर्ग सेवानिवृत्त शिक्षकों को निशाना बनाया, जो तकनीकी रूप से जागरूक नहीं थे।

वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में

घोटाले की अवधि में तीन वरिष्ठ कोषाधिकारी कार्यरत रहे। नियम के अनुसार उनके हस्ताक्षर के बिना एक पैसा भी ट्रेजरी से नहीं निकल सकता। इसके बावजूद वर्षों तक यह गबन चलता रहा, जिससे विभागीय लापरवाही या मिलीभगत के आरोप गहराते जा रहे हैं।

एसआईटी और ईडी जांच जारी

मामले की जांच एसआईटी कर रही है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी फाइलें खंगालनी शुरू कर दी हैं। आशंका जताई जा रही है कि घोटाले की कुल राशि 100 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।

Related Articles

Back to top button