लखनऊ में बाढ़ से बचाव के लिए बनेगा 182 करोड़ का बांध, 601 करोड़ की विकास परियोजनाओं को मंजूरी
लखनऊ में गोमती नदी के बाएं किनारे आईआईएम रोड से हार्डिंग ब्रिज तक 182.16 करोड़ रुपये से बांध बनेगा। ग्रीन कॉरिडोर के पास 148.87 करोड़ से 12 पंपिंग स्टेशन बनेंगे। यूपी में 601.44 करोड़ की विकास परियोजनाओं को मंजूरी मिली।
लखनऊ। राजधानी में बाढ़ और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश शासन ने बड़ी विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी है। आवास एवं शहरी नियोजन अनुभाग-1 की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के विभिन्न विकास प्राधिकरणों की कुल 601.44 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली परियोजनाओं को स्वीकृति दी गई है। इनमें लखनऊ की दो महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। इनके पूरा होने पर गोमती नदी के आसपास के इलाकों में बाढ़ के खतरे को कम करने और शहर में बारिश के पानी की निकासी बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
गोमती नदी के किनारे 182.16 करोड़ रुपये से बनेगा बांध
लखनऊ विकास क्षेत्र में गोमती नदी के बाएं किनारे आईआईएम रोड से हार्डिंग ब्रिज तक बांध बनाने की परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसकी अनुमानित लागत 182.16 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।
इस बांध का प्रमुख उद्देश्य गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में आसपास के रिहायशी इलाकों को बाढ़ के प्रभाव से बचाना है। खासतौर पर फैजुल्लाहगंज क्षेत्र के लिए इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने से किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। बांध बनने से ऐसे क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ग्रीन कॉरिडोर के पास 148.87 करोड़ से बनेंगे 12 पंपिंग स्टेशन
लखनऊ में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए ग्रीन कॉरिडोर के समानांतर 12 स्थानों पर पंपिंग स्टेशन बनाने की योजना को भी स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना पर 148.87 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
योजना के तहत चार स्थानों पर 600 केएलडी क्षमता और आठ स्थानों पर 400 केएलडी क्षमता के पंपिंग स्टेशन बनाए जाएंगे। इन स्टेशनों के माध्यम से बारिश के दौरान निचले इलाकों और सड़कों पर जमा होने वाले पानी की निकासी को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा।
शहर में कई स्थानों पर तेज बारिश के बाद जलभराव की समस्या सामने आती है। ऐसे में पंपिंग स्टेशनों की स्थापना से जल निकासी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
लखनऊ की दोनों परियोजनाओं पर खर्च होंगे करीब 331 करोड़
शासन की ओर से स्वीकृत लखनऊ की दोनों प्रमुख परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 331.03 करोड़ रुपये है। इसमें गोमती नदी के किनारे बांध निर्माण पर 182.16 करोड़ और 12 पंपिंग स्टेशन बनाने पर 148.87 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का प्रस्ताव है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल बाढ़ के खतरे को कम करना ही नहीं, बल्कि राजधानी की जल निकासी व्यवस्था को भी मजबूत करना है। हालांकि, इनका वास्तविक लाभ निर्माण कार्य पूरा होने और व्यवस्था के प्रभावी संचालन के बाद ही सामने आएगा।
वाराणसी से झांसी तक कई शहरों में होंगे विकास कार्य
601.44 करोड़ रुपये की स्वीकृत परियोजनाओं में लखनऊ के अलावा प्रदेश के कई अन्य शहर भी शामिल हैं। वाराणसी में मास्टर प्लान रोड के चौड़ीकरण की योजना है। बांदा में सड़क निर्माण और चौड़ीकरण, जबकि सहारनपुर में सड़क सुधार से जुड़े कार्य कराए जाएंगे।
बरेली में आरसीसी नालों और पुलियों का निर्माण प्रस्तावित है। वहीं मुजफ्फरनगर में जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने से संबंधित कार्य होंगे। इसके अतिरिक्त रायबरेली, चित्रकूट, मुरादाबाद, शाहजहांपुर और झांसी में भी सड़क, नाला, प्रकाश व्यवस्था तथा अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है।
विकास प्राधिकरणों से एक सप्ताह में मांगा गया प्रस्तावों का ब्योरा
शासन ने संबंधित विकास प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे स्वीकृत परियोजनाओं से संबंधित प्रस्ताव, लागत का विस्तृत विवरण और उनकी आवश्यकता एवं उपयोगिता की जानकारी उपलब्ध कराएं। इसके लिए हस्ताक्षरित प्रति एक सप्ताह के भीतर भेजने को कहा गया है।
निर्देश के अनुसार, अधिकतम 20 एमबी आकार की पीडीएफ फाइल ईमेल के माध्यम से उपलब्ध करानी होगी। शासन का उद्देश्य परियोजनाओं की उपयोगिता और खर्च से जुड़ी जानकारी जुटाकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है।
बाढ़ और जलभराव से राहत देने पर जोर
लखनऊ में गोमती नदी के किनारे बांध और ग्रीन कॉरिडोर के पास पंपिंग स्टेशन बनाने की स्वीकृति को शहरी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इन परियोजनाओं से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सुरक्षा और बारिश के पानी की निकासी में सुधार की उम्मीद है। वहीं प्रदेश के दूसरे शहरों में सड़क, नाला, पुलिया और प्रकाश व्यवस्था से जुड़े कार्यों के जरिए शहरी सुविधाओं को बेहतर बनाने की योजना है।




