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राज्यसभा में वंदे मातरम् पर गर्मा-गर्मी: अमित शाह बोले—“नेहरू ने टुकड़े किए, तब देश भी बंटा”

“राज्यसभा में वंदे मातरम् पर गृहमंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। आपातकाल, सेंसरशिप, तुष्टिकरण और नेहरू द्वारा गीत के “टुकड़े” किए जाने का जिक्र किया। कहा—वंदे मातरम् आज़ादी का उद्घोष है और शहीद जवान सीमा पर यही कहते हैं।”

नई दिल्ली। राज्यसभा में सोमवार को वंदे मातरम् को लेकर हुई चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस, पर तीखे प्रहार किए। शाह ने कहा कि जो लोग वंदे मातरम् के महत्व को नहीं समझते, वही इसे चुनाव से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सीमा पर जब कोई जवान बलिदान देता है, तो उसके अंतिम शब्द होते हैं—“वंदे मातरम्”। वही नारा स्वतंत्रता संग्राम के दौरान आज़ादी का उद्घोष बना और आज भी करोड़ों भारतीयों के लिए प्रेरणा स्रोत है।

कांग्रेस पर निशाना: “वंदे मातरम् का विरोध क्यों?”

अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई सांसद वंदे मातरम् का विरोध करते हैं, जबकि यह राष्ट्रभावना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् को लेकर विपक्ष की राजनीति लोगों को भ्रमित करने की कोशिश है।

“तिरंगा फहराते वक्त वंदे मातरम् भूलना नहीं चाहिए”

शाह ने कहा कि हर भारतीय को यह याद रखना चाहिए कि तिरंगा फहराते समय वंदे मातरम् का उच्चारण करना गौरव का क्षण होता है।

आपातकाल और सेंसरशिप का उल्लेख

अपने संबोधन में शाह ने आपातकाल का मुद्दा भी उठाया और कहा—

  • देश में आपातकाल लगाया गया

  • आकाशवाणी और अखबारों पर ताले लगाए गए

  • वंदे मातरम् को सार्वजनिक स्थानों पर सीमित कर दिया गया

  • वंदे मातरम् बोलने वालों को जेल में डाल दिया गया

उन्होंने कहा कि कांग्रेस बताती है कि वंदे मातरम् पर चर्चा क्यों जरूरी है—
“क्योंकि आपातकाल में सबसे पहले आप लोगों ने ही इसे दबाया था।”

“नेहरू ने वंदे मातरम् के टुकड़े किए”

अमित शाह ने तर्क दिया कि जब यह गीत 100 वर्ष का हुआ, तब भी कांग्रेस सरकार में इसके प्रति सम्मान नहीं दिखा।

उन्होंने कहा—

  • “नेहरू ने वंदे मातरम् के टुकड़े कर दिए।”

  • “जब वंदे मातरम् के टुकड़े हुए, देश भी बंट गया।”

  • “अगर तुष्टिकरण की राजनीति न होती, तो देश का बंटवारा भी नहीं होता।”

चर्चा की मांग—“सदन चलने दें”

अमित शाह ने विपक्ष से कहा कि वे सदन चलने दें, सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना का स्वर है और इस पर चर्चा होना आवश्यक है।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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