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गोरखनाथ मंदिर खिचड़ी मेला 2026: त्रेतायुगीन परंपरा, सीएम योगी के राज में बदला स्वरूप

“Gorakhnath Temple Khichdi Mela 2026 में मकर संक्रांति पर भव्य रूप में मनाया जाएगा। त्रेतायुगीन परंपरा वाले इस मेले में सीएम योगी के नेतृत्व में सुरक्षा, परिवहन और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं।”

गोरखपुर। Gorakhnath Temple Khichdi Mela उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था का केंद्र है। 15 जनवरी को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर लगने वाला यह विश्व प्रसिद्ध खिचड़ी मेला त्रेतायुग से चली आ रही सनातन परंपरा का जीवंत उदाहरण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में इस ऐतिहासिक मेले का स्वरूप और अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आधुनिक बन गया है।

श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए गोरखनाथ मंदिर मार्ग को दुल्हन की तरह सजाया गया है। आधुनिक तकनीक से लैस सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और प्रशासनिक सतर्कता ने Gorakhnath Temple Khichdi Mela को नए मानकों तक पहुंचा दिया है।

यूपी रोडवेज और रेलवे की विशेष व्यवस्था

श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर परिवहन निगम ने विशेष योजना तैयार की है। यूपी रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक लव कुमार सिंह के अनुसार, 13 रूटों से 450 खिचड़ी मेला स्पेशल बसें चलाई जाएंगी। इन बसों का संचालन 13 जनवरी सुबह 4 बजे से 16 जनवरी तक किया जाएगा।

इसके अलावा पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा खिचड़ी मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन और कई प्रमुख ट्रेनों को नकहा जंगल स्टेशन पर अस्थायी ठहराव दिया गया है।

24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम

Gorakhnath Temple Khichdi Mela के दौरान श्रद्धालुओं की सहायता के लिए मंदिर परिसर और रोडवेज बस स्टेशन पर 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। किसी भी समस्या के समाधान के लिए प्रशासनिक अमला लगातार निगरानी करेगा।

त्रेतायुगीन परंपरा का धार्मिक महत्व

गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ बताते हैं कि बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाने की परंपरा त्रेतायुग से चली आ रही है। मान्यता है कि गुरु गोरखनाथ ने भिक्षा में प्राप्त अन्न से खिचड़ी बनाकर मकर संक्रांति पर भोग अर्पित करने की परंपरा शुरू की थी, जो आज भी अनवरत जारी है।

सीएम योगी करेंगे प्रथम खिचड़ी अर्पण

मकर संक्रांति की भोर में गोरक्षपीठाधीश्वर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ परंपरा के अनुसार सबसे पहले बाबा गोरखनाथ को खिचड़ी अर्पित करेंगे। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाएंगे।

सामाजिक समरसता का प्रतीक

Gorakhnath Temple Khichdi Mela केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और भाईचारे का प्रतीक है। यहां बिना किसी भेदभाव के सभी समुदायों के लोग रोजगार, व्यापार और सेवा से जुड़े रहते हैं। खिचड़ी मेले में चढ़ाया गया अन्न वर्षभर जरूरतमंदों में वितरित किया जाता है।

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