दिल्ली में इंटरनेट बंद करने पर केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी माफी, गृह सचिव ने सुरक्षा का दिया हवाला
दिल्ली इंटरनेट बंदी मामले में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी। केंद्र ने सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला दिया, जबकि DMRC ने भी हलफनामा दाखिल किया।
नई दिल्ली। दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद करने के मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगी है। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर कहा कि इंटरनेट सेवा निलंबित करने का फैसला राजधानी में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकने के उद्देश्य से लिया गया था। इस मामले में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने भी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर माफी मांगी है।
मामला 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़ा है। अदालत ने इंटरनेट सेवाएं निर्बाध रखने संबंधी अपने आदेश के उल्लंघन को लेकर केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस आयुक्त और DMRC अध्यक्ष को अवमानना नोटिस जारी किया था।
इंटरनेट बंदी मामले में गृह सचिव ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट के अवमानना नोटिस के जवाब में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने बुधवार देर रात चार पन्नों का हलफनामा दाखिल किया। इसमें उन्होंने बिना शर्त माफी मांगने के साथ ही इंटरनेट सेवा बंद करने के फैसले के पीछे प्रशासनिक कारण भी बताए।
हलफनामे के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने का अनुरोध किया था। केंद्र ने स्थिति की गंभीरता, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए इस कदम को उचित और जरूरी बताया।
गृह सचिव के अनुसार, 24 घंटे के लिए सेलुलर इंटरनेट सेवाएं बंद करने का उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी में शांति व्यवस्था बनाए रखना था। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत के आदेश का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया।
9 और 10 अक्टूबर को कब बंद रहा इंटरनेट?
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली में 9 अक्टूबर की रात 10 बजे से 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवा निलंबित की गई थी। यह प्रतिबंध चार किलोमीटर के दायरे में लागू किया गया था।
इंटरनेट बंदी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। अदालत की ओर से इंटरनेट सेवाएं निर्बाध रखने के निर्देश के उल्लंघन का मुद्दा अवमानना कार्यवाही में उठा।
इसके बाद केंद्रीय गृह सचिव ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए माफी मांगी और प्रतिबंध लगाने के फैसले का कारण स्पष्ट किया।
DMRC ने भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया हलफनामा
दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी। DMRC की चेयरपर्सन डी. थारा की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया कि 10 अक्टूबर को सुरक्षा संबंधी प्रतिबंधों के बावजूद मेट्रो नेटवर्क के अधिकांश हिस्सों में परिचालन जारी रहा।
DMRC ने मेट्रो सेवाएं पूरी तरह बंद होने के आरोपों को खारिज करते हुए प्रतिबंधों और परिचालन की स्थिति का विवरण दिया।
57 से घटाकर 45 मेट्रो स्टेशनों पर किए गए प्रतिबंध
DMRC के हलफनामे के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने 8 अक्टूबर को शुरुआती पत्र के माध्यम से 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने का अनुरोध किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के निर्देश के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई।
समीक्षा के बाद प्रभावित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई। DMRC के अनुसार, इन स्टेशनों पर भी 10 अक्टूबर की रात 10 बजे तक सभी प्रतिबंध हटा लिए गए थे।
निगम ने अदालत को बताया कि वह न्यायालय के आदेशों का सम्मान करता है और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय बनाकर मेट्रो सेवाएं सुचारू रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
अब मामले में आगे क्या होगा?
दिल्ली में इंटरनेट सेवा निलंबित करने और मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामों तथा अवमानना नोटिस के संदर्भ में महत्वपूर्ण हो गया है। केंद्र ने सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला दिया है, जबकि DMRC ने मेट्रो परिचालन की स्थिति स्पष्ट की है।
हालांकि, माफी मांगने और अपने फैसले के पक्ष में तर्क देने के बाद मामले में अदालत का अंतिम रुख क्या होगा, यह आगे की न्यायिक कार्यवाही से स्पष्ट होगा।




