राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में बड़ा खुलासा: SIT ने शासन को सौंपी रिपोर्ट
चढ़ावा चोरी, कमीशनखोरी और नियुक्तियों में अनियमितताओं के मिले संकेत; ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल, 25 से 30 लोगों पर कार्रवाई की तैयारी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में SIT ने शासन को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में कथित चोरी, कमीशनखोरी, नियुक्तियों में अनियमितता और ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। अयोध्या राम मंदिर विवाद से जुड़ी पूरी जानकारी पढ़ें।
लखनऊ/अयोध्या, 23 जून। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में कथित गबन और वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मंगलवार को उत्तर प्रदेश शासन को सौंप दी। रिपोर्ट में चढ़ावा चोरी, कमीशनखोरी, नियुक्तियों में कथित भाई-भतीजावाद और दान राशि की गणना प्रक्रिया में गंभीर खामियों के संकेत मिलने का दावा किया गया है। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण साक्ष्यों, गवाहों के बयान और वित्तीय लेनदेन से जुड़े तथ्यों का उल्लेख किया गया है।
एसआईटी में शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरन एस तथा विशेष सचिव वित्त नील रतन ने अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को गोपनीय रिपोर्ट सौंपी। अब यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल
सूत्रों के अनुसार एसआईटी रिपोर्ट में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र तथा निर्माण सहायक गोपाल राव के नामों का उल्लेख होने की चर्चा है। जांच एजेंसी ने कुछ पदाधिकारियों को प्रत्यक्ष रूप से संदेह के घेरे में रखा है, जबकि कुछ को निगरानी और प्रशासनिक लापरवाही का जिम्मेदार माना है।
रिपोर्ट में पदाधिकारियों के करीबी रिश्तेदारों और परिचितों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें चंपत राय के करीबी माने जाने वाले टिन्नू यादव, डॉ. अनिल मिश्र के रिश्तेदारों और गोपाल राव से जुड़े कुछ लोगों के नाम भी सामने आने की बात कही जा रही है।
25 से 30 लोगों की भूमिका संदिग्ध
एसआईटी की प्रारंभिक जांच में करीब 25 से 30 लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इनमें गणना प्रक्रिया से जुड़े कर्मचारी, आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मी तथा अन्य सहयोगी शामिल बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इन लोगों के खिलाफ जल्द ही एफआईआर दर्ज किए जाने की सिफारिश की गई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि दान राशि की गणना के दौरान बड़ी रकम गायब होने के संकेत मिले हैं। कुछ मामलों में कथित कमीशनखोरी के आरोपों की भी जांच की गई है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
सवा साल तक चलता रहा कथित गबन
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि दान राशि में कथित हेराफेरी का सिलसिला करीब सवा वर्ष तक चलता रहा। इस दौरान मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती रही और चढ़ावे की राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
विशेष रूप से महाकुंभ और माघ मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के अयोध्या पहुंचने से दान राशि में भारी बढ़ोतरी हुई। जांच में आशंका जताई गई है कि इसी अवधि में सबसे अधिक अनियमितताएं हुईं। सूत्रों के अनुसार कुछ दिनों में लाखों रुपये तक की राशि गायब होने के संकेत मिले हैं।
नियुक्तियों में भाई-भतीजावाद की आशंका
एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया है कि दान राशि की गणना का कार्य स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से कराया जा रहा था, लेकिन कर्मचारियों की नियुक्ति आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए हुई। आरोप है कि नियुक्तियों में पारदर्शिता का अभाव था और प्रभावशाली लोगों के परिचितों को प्राथमिकता दी गई।
जांच में टिन्नू यादव नामक व्यक्ति की भूमिका विशेष रूप से चर्चा में रही है। आरोप है कि उनके प्रभाव से बड़ी संख्या में परिचितों को गणना कार्य से जोड़ा गया। एसआईटी ने इस संबंध में दस्तावेज और बयान एकत्र किए हैं।
गणना प्रक्रिया की खामियों का उठाया गया लाभ
जांच रिपोर्ट के अनुसार दानपात्रों से निकाली गई पूरी नकदी को पहले एक स्थान पर एकत्र किया जाता था। इसके बाद गणना शुरू होती थी। प्रारंभिक स्तर पर कुल राशि का कोई स्वतंत्र रिकॉर्ड नहीं होने के कारण गणना के दौरान धनराशि में हेराफेरी की संभावना बनी रहती थी।
एसआईटी का मानना है कि इसी प्रक्रिया की खामियों का फायदा उठाकर कुछ लोगों ने कथित तौर पर दान राशि का गबन किया। गणना पूरी होने के बाद जो राशि दर्ज की जाती थी, वही आधिकारिक रिकॉर्ड बन जाती थी, जिससे अनियमितताओं का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
ट्रस्ट के पुनर्गठन और ऑडिट की सिफारिश
सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में मंदिर ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। इनमें ट्रस्ट की प्रशासनिक संरचना की समीक्षा, स्वतंत्र वित्तीय ऑडिट, दान राशि की गणना की नई व्यवस्था और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की सिफारिश शामिल है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह केवल प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है। एसआईटी को विस्तृत जांच जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं और अगले दो सप्ताह में अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सकती है। शासन स्तर पर रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।
सरकार की नजर अंतिम रिपोर्ट पर
राम मंदिर देश की करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावा प्रकरण से जुड़े आरोपों ने व्यापक चर्चा पैदा कर दी है। शासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं।




