लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 119 आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ पुलिस ने विभूतिखंड स्थित समिट बिल्डिंग में संचालित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई में 119 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 103 लैपटॉप, 177 मोबाइल फोन समेत बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण बरामद किए गए।
लखनऊ। कमिश्नरेट पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 119 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म के जरिए विशेष रूप से अमेरिका के नागरिकों को सरकारी एजेंसियों और प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम पर झांसे में लेकर करोड़ों रुपये की साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था।
पुलिस ने विभूतिखंड क्षेत्र स्थित समिट बिल्डिंग के 11वें तल पर चल रहे फर्जी अंतरराष्ट्रीय कॉल सेंटर पर छापेमारी कर इस बड़े नेटवर्क का खुलासा किया। कार्रवाई के दौरान 103 लैपटॉप, 177 कॉलिंग मोबाइल फोन, कई डिजिटल उपकरण, महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
पुलिस की सुनियोजित कार्रवाई में बड़ा खुलासा
यह कार्रवाई पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर के निर्देशन में की गई। संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध एवं मुख्यालय) अपर्णा कुमार के पर्यवेक्षण तथा पुलिस उपायुक्त अपराध अनिल कुमार यादव के मार्गदर्शन में साइबर क्राइम सेल और साइबर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।
अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरण यादव और सहायक पुलिस आयुक्त साइबर के नेतृत्व में गठित टीम ने एक सुनियोजित रणनीति के तहत पूरे नेटवर्क का खुलासा किया।
सरकारी एजेंसियों के नाम पर विदेशी नागरिकों को फंसाते थे
जांच में सामने आया है कि गिरोह इंटरनेट आधारित कॉलिंग प्लेटफॉर्म और अत्याधुनिक तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर विदेशी नागरिकों, विशेषकर संयुक्त राज्य अमेरिका के लोगों को निशाना बनाता था।
आरोपी खुद को प्रतिष्ठित कंपनियों, बैंक अधिकारियों या अमेरिकी सरकारी एजेंसियों का प्रतिनिधि बताकर लोगों को फोन करते थे और उन्हें कानूनी कार्रवाई, बैंक खाते बंद होने या तकनीकी समस्या का डर दिखाकर रकम वसूलते थे।
ठगी की रकम गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए हासिल की जाती थी, जिससे धन के लेन-देन का पता लगाना मुश्किल हो जाता था।
ऑपरेशन मैनेजर समेत कई प्रमुख आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने गिरोह के कथित ऑपरेशन मैनेजर ललित खैराजानी और विक्रम सिंह परमार समेत कई प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि गिरोह से जुड़े लोग देश के विभिन्न राज्यों जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, झारखंड, उत्तराखंड, नागालैंड, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश से जुड़े हुए थे और लखनऊ में किराए के फ्लैटों एवं अपार्टमेंट्स में रहकर इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे।
हाईटेक तरीके से चलता था पूरा नेटवर्क
पुलिस के अनुसार कॉल सेंटर में विदेशी नंबरों पर कॉल करने के लिए इंटरनेट आधारित कॉलिंग सिस्टम, विशेष सॉफ्टवेयर और डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाता था। कर्मचारियों को विदेशी लहजे में बातचीत करने और पीड़ितों को विश्वास में लेने का प्रशिक्षण भी दिया जाता था।
गिरोह का संचालन कॉरपोरेट कार्यालय की तरह किया जा रहा था, जहां अलग-अलग टीमों को कॉलिंग, भुगतान संग्रह, तकनीकी सहायता और डेटा प्रबंधन जैसे कार्य सौंपे गए थे।
नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी
कमिश्नरेट पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क देश के कई शहरों और विदेशों तक फैला हुआ है।
साइबर सेल अब बैंक खातों, क्रिप्टो वॉलेट, डिजिटल भुगतान चैनलों और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच कर रही है। जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
साइबर अपराध के खिलाफ बड़ा संदेश
लखनऊ पुलिस की इस कार्रवाई को हाल के वर्षों में साइबर अपराध के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधियों के विरुद्ध विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे संगठित गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।



