उत्तर प्रदेश में ‘राजभवन’ अब कहलाएगा ‘जन भवन’
“केंद्र सरकार के निर्देश पर उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के आधिकारिक आवास ‘राजभवन’ का नाम बदलकर ‘जन भवन’ कर दिया गया है। यह फैसला औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और शासन को अधिक जनोन्मुखी बनाने की पहल माना जा रहा है।”
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सांकेतिक बदलाव करते हुए राज्यपाल के आधिकारिक आवास ‘राजभवन’ का नाम बदलकर ‘जन भवन’ कर दिया गया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन में यह निर्णय लिया गया है, जिसे तत्काल प्रभाव से लागू भी कर दिया गया है।
गृह मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से सभी राज्यों को निर्देश दिए गए थे कि राज्यपालों के आवासों के नाम अधिक जनोन्मुखी और औपनिवेशिक प्रभाव से मुक्त किए जाएं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश सरकार ने यह फैसला लिया।
क्यों रखा गया नाम ‘जन भवन’?
सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक स्तर पर राज्यपाल आवास का नाम ‘लोक भवन’ रखने पर विचार किया गया था। हालांकि, लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय पहले से ही ‘लोक भवन’ के नाम से संचालित है। एक ही नाम होने से प्रशासनिक भ्रम की संभावना को देखते हुए ‘जन भवन’ नाम को अंतिम रूप दिया गया।
‘जन भवन’ नाम जनता से सीधे जुड़ाव, पारदर्शिता और संवैधानिक पदों की जनसेवा भावना को दर्शाता है।
सभी सरकारी दस्तावेजों में होगा नया नाम
नाम परिवर्तन के बाद अब राज्यपाल कार्यालय से संबंधित सभी शासकीय, प्रशासनिक और वैधानिक कार्यों में ‘जन भवन’ नाम का ही प्रयोग किया जाएगा।
इसके तहत—सरकारी पत्राचार, आधिकारिक दस्तावेज, निमंत्रण पत्र, साइन बोर्ड और संकेतक
सभी में चरणबद्ध तरीके से ‘राजभवन’ की जगह ‘जन भवन’ नाम अंकित किया जाएगा।
देशभर में बदले जा रहे हैं ‘राज’ से जुड़े नाम
उत्तर प्रदेश के अलावा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम, उत्तराखंड, ओडिशा, गुजरात और त्रिपुरा सहित आठ राज्यों ने अपने राजभवन का नाम बदलकर ‘लोक भवन’ कर दिया है।
वहीं, लद्दाख में उपराज्यपाल के निवास-कार्यालय का नाम अब ‘लोक निवास’ कर दिया गया है, जो पहले ‘राज निवास’ कहलाता था।
औपनिवेशिक विरासत से मुक्ति का संदेश
गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ‘राज’ शब्द ब्रिटिश शासन की मानसिकता का प्रतीक रहा है, जिसे लोकतांत्रिक भारत में बदलना आवश्यक है। इससे पहले—
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राजपथ → कर्तव्य पथ
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सरकारी दस्तावेजों में ‘इंडिया’ की जगह ‘भारत’ का प्रयोग
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बीटिंग रिट्रीट समारोह में अंग्रेजी धुनों को हटाया जाना
जैसे कई कदम इसी सोच के तहत उठाए जा चुके हैं।
जनता के लिए, जनता के नाम से
‘जन भवन’ नाम यह संदेश देता है कि संवैधानिक पद जनता से ऊपर नहीं, बल्कि जनता के लिए होते हैं। यह बदलाव केवल नाम का नहीं, बल्कि शासन की सोच और दिशा का प्रतीक माना जा रहा है।



