आतंकवाद बंद करो, तभी मिलेगा सिंधु का पानी; राजनाथ सिंह का पाकिस्तान को कड़ा संदेश
हैदराबाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का पाकिस्तान को दोटूक संदेश, कहा— आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते; सिंधु जल संधि पर भारत का रुख राष्ट्रीय सुरक्षा के अनुरूप रहेगा।
Rajnath Singh On Pakistan: हैदराबाद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि आतंकवाद और बातचीत साथ नहीं चल सकते। सिंधु जल संधि, ऑपरेशन सिंदूर, पहलगाम आतंकी हमला और भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा बयान।
हैदराबाद। राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को लेकर शनिवार को बड़ा बयान सामने आया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि भारत अब आतंकवाद और बातचीत को एक साथ नहीं चलने देगा। उन्होंने कहा कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को पूरी तरह और विश्वसनीय तरीके से बंद नहीं करता, तब तक सिंधु नदी का पानी आतंकवाद के संरक्षकों तक नहीं पहुंचने दिया जाएगा।
हैदराबाद में आयोजित एक बुद्धिजीवी सम्मेलन को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत शांति और स्थिरता का समर्थक है, लेकिन देश की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो ताकतें आतंकवाद को बढ़ावा देती हैं, उन्हें भारत की नई नीति का सामना करना पड़ेगा।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद बदली रणनीति
राजनाथ सिंह ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने कई महत्वपूर्ण और निर्णायक कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह केवल एक कूटनीतिक निर्णय नहीं बल्कि आतंकवाद को संरक्षण देने वालों के लिए सख्त संदेश है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल विरोध दर्ज कराने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आवश्यक होने पर निर्णायक कार्रवाई भी करेगा।
सिंधु नदी का पानी आतंक के आकाओं तक नहीं पहुंचेगा
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने साफ संदेश दिया है कि “जिनके आंसू सूख चुके हैं, उन्हें हमसे पानी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि सिंधु नदी का पानी आतंकवादियों और मानवता के दुश्मनों के संरक्षकों तक नहीं पहुंचने दिया जाएगा।
रक्षा मंत्री का यह बयान भारत-पाकिस्तान संबंधों और जल कूटनीति के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर का भी किया जिक्र
राजनाथ सिंह ने हाल ही में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान ने दुनिया को भारत की सैन्य क्षमता और दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय कराया है।
उन्होंने कहा कि भारत अपनी संप्रभुता, नागरिकों की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए किसी भी स्तर तक कार्रवाई करने में सक्षम है।
प्रधानमंत्री मोदी के संदेश को किया याद
रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस प्रसिद्ध कथन को भी दोहराया जिसमें कहा गया था कि “खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।”
उन्होंने कहा कि भारत की नीति पूरी तरह स्पष्ट है। आतंकवाद और सामान्य संबंध एक साथ नहीं चल सकते। जब तक पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी और विश्वसनीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक संबंधों में सामान्य स्थिति की उम्मीद नहीं की जा सकती।
क्या है सिंधु जल संधि?
भारत और पाकिस्तान के बीच 19 सितंबर 1960 को सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता दोनों देशों के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को नियंत्रित करता है।
दशकों तक यह दुनिया के सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों में शामिल रहा, लेकिन लगातार बढ़ते सीमा पार आतंकवाद और सुरक्षा चुनौतियों के कारण भारत ने इसकी समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि
रक्षा मंत्री ने कहा कि कोई भी अंतरराष्ट्रीय समझौता राष्ट्रीय सुरक्षा से ऊपर नहीं हो सकता। भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को यह समझना होगा कि आतंकवाद को समर्थन देने की कीमत चुकानी पड़ेगी और भारत अब पहले जैसा नहीं रहा।
एनडीए सरकार की उपलब्धियों का भी किया उल्लेख
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने केंद्र की एनडीए सरकार के पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक समय अनुच्छेद 370 हटाना असंभव माना जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह ऐतिहासिक निर्णय सफलतापूर्वक लागू किया गया।
उन्होंने कहा कि आज जम्मू-कश्मीर में पर्यटन, निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। श्रीनगर के लाल चौक पर तिरंगा गर्व से लहरा रहा है और सामान्य जनजीवन तेजी से पटरी पर लौट रहा है।
भारत का स्पष्ट कूटनीतिक संदेश
विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल संधि और आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का सख्त रुख आने वाले समय में भारत-पाकिस्तान संबंधों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। रक्षा मंत्री का यह बयान स्पष्ट संकेत देता है कि भारत अब आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में नहीं है।




