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‘पापा, मुझे बचा लो…’ आखिरी कॉल के बाद बुझ गया सुखमनी का जीवन दीप

लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले 23 वर्षीय युवक को नम आंखों से दी गई अंतिम विदाई, अरदास के दौरान फूट-फूटकर रोया परिवार

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड में 23 वर्षीय सुखमनी सिंह की दर्दनाक मौत हो गई। अंतिम समय में पिता को किए गए फोन में उसने कहा था, ‘पापा, मुझे बचा लो।’ गुरुद्वारे में अरदास के बाद नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। पढ़ें पूरी भावुक कहानी।

खनऊ, 23 जून। अलीगंज स्थित एनिमेशन प्रशिक्षण संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड ने एक और परिवार के सपनों को हमेशा के लिए राख में बदल दिया। हादसे में जान गंवाने वाले आलमबाग के आदर्श नगर निवासी 23 वर्षीय सुखमनी सिंह को मंगलवार को गमगीन माहौल में अंतिम विदाई दी गई। गुरुद्वारे में अरदास के बाद जब उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए पहुंचा तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।

सुखमनी की मां किरन कौर का रो-रोकर बुरा हाल था। वह बार-बार बेटे की आखिरी बात याद कर बेसुध हो जा रही थीं। बिलखते हुए वह कह रही थीं, “बेटा सुबह घर से निकला था तो बोला था कि मां, आज देर से आऊंगा। हमें क्या पता था कि वह हमेशा के लिए हमसे दूर चला जाएगा।”

आग में फंसे बेटे ने पिता को किया था आखिरी फोन

हादसे के सबसे दर्दनाक पहलुओं में से एक वह आखिरी फोन कॉल है, जिसने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। सुखमनी के पिता प्रभजोत सिंह ने बताया कि दोपहर करीब दो बजे बेटे का फोन आया था।

उन्होंने भारी मन से बताया, “सुखमनी रोते हुए कह रहा था, ‘पापा, आग लग गई है, मुझे बचा लो… मैं अंदर फंस गया हूं।’ उसकी आवाज में डर साफ महसूस हो रहा था। फोन आते ही हम तुरंत घटनास्थल के लिए निकले, एम्बुलेंस को भी सूचना दी, लेकिन जब तक हम वहां पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।”

पिता की आंखों में बेटे को न बचा पाने का दर्द साफ दिखाई दे रहा था। परिवार के लोगों का कहना है कि वह अंतिम बातचीत शायद जीवनभर उनका पीछा करती रहेगी।

गुरुद्वारे में अरदास, नम आंखों से दी गई विदाई

अंतिम संस्कार से पहले गुरुद्वारे में सुखमनी की आत्मा की शांति के लिए विशेष अरदास आयोजित की गई। अरदास में शामिल परिजन, मित्र और क्षेत्रवासी भावुक हो उठे। जैसे ही सुखमनी का पार्थिव शरीर वहां पहुंचा, पूरे माहौल में शोक की लहर दौड़ गई।

इसके बाद विप रोड स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। हर चेहरे पर दर्द था और हर आंख में आंसू। लोग एक होनहार युवक के असमय चले जाने पर गहरा दुख व्यक्त कर रहे थे।

परिवार के सपनों का सहारा था सुखमनी

सुखमनी सिंह एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते थे, लेकिन उनके सपने बड़े थे। उनके पिता प्रभजोत सिंह सेना की एएमसी शाखा में कार्यरत हैं, जबकि मां किरन कौर हाल ही में सेना से सेवानिवृत्त हुई हैं। परिवार ने बेटे के उज्ज्वल भविष्य के लिए अनेक सपने संजोए थे।

एनिमेशन के क्षेत्र में करियर बनाने के उद्देश्य से सुखमनी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। परिवार को विश्वास था कि वह अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर एक सफल मुकाम हासिल करेंगे और परिवार का नाम रोशन करेंगे। लेकिन एक दर्दनाक हादसे ने उन सभी उम्मीदों को पलभर में समाप्त कर दिया।

मिलनसार और संस्कारी युवक के रूप में थी पहचान

पड़ोसियों और परिचितों के अनुसार सुखमनी बेहद विनम्र, मिलनसार और संस्कारी युवक थे। वह सभी का सम्मान करते थे और अपने लक्ष्य को लेकर गंभीर रहते थे। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उनके व्यवहार ने हर किसी का दिल जीता था।

आदर्श नगर के निवासियों के अनुसार सुखमनी की मौत केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले की अपूरणीय क्षति है। उनके निधन से पूरे इलाके में शोक का माहौल है।

हादसे ने खड़े किए कई सवाल

सुखमनी की अंतिम यात्रा में शामिल लोगों के मन में एक ही सवाल था कि आखिर ऐसी लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है। जिस भवन में प्रशिक्षण संस्थान संचालित हो रहा था, वहां सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होते और राहत कार्य समय पर पहुंचता तो शायद कई जिंदगियां बचाई जा सकती थीं। एक होनहार युवक की मौत ने न केवल उसके परिवार को उजाड़ दिया है, बल्कि पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।

कार्रवाई तेज, जांच जारी

उल्लेखनीय है कि अलीगंज अग्निकांड में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है जबकि चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर सात दिनों के भीतर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं।

एफएसएल और एसआईटी की टीम घटनास्थल की जांच कर रही है तथा हादसे के कारणों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। पीड़ित परिवारों को उम्मीद है कि जांच के जरिए सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को कड़ी सजा मिलेगी।

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