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बागपत हादसे में उजड़े कई परिवार, रामेश्वर यादव ने तड़पकर कहा था- ‘मुझे बचा लो’; नहीं बच सकी जान

बागपत EPE हादसे में 13 लोगों की मौत हुई। रामेश्वर यादव के आखिरी शब्द थे- मुझे बचा लो। हादसे में कई परिवारों ने पिता, पत्नी और बच्चों को खो दिया।

मेरठ। ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (EPE) पर रविवार देर रात हुए भीषण सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां एक झटके में छीन लीं। हादसे में 13 लोगों की मौत हुई, जबकि कई लोग घायल होकर मेरठ मेडिकल कालेज के ट्रामा सेंटर में भर्ती हैं। हादसे के बाद सामने आ रही पीड़ित परिवारों की कहानियां हर किसी को झकझोर रही हैं।

अल्लापुर गांव निवासी 60 वर्षीय रामेश्वर यादव भी अपने बेटे यादराम यादव, पुत्रवधू खुशी, 11 वर्षीय पोते श्रीनिवास और छह वर्षीय पोती छाया के साथ राजस्थान के बागड़धाम गए थे। लौटते समय हादसे में रामेश्वर की मौके पर ही मौत हो गई। उनके बेटे यादराम, बहू और दोनों बच्चे घायल हैं।

यादराम ने बताया कि हादसे के बाद घायल पिता ने मदद के लिए आखिरी बार गुहार लगाई थी—“मुझे बचा लो… कोई गाड़ी में ले चलो, किराया दे दूंगा।” लेकिन हादसे के बाद हालात इतने भयावह थे कि आसपास दूर-दूर तक मदद करने वाला कोई नजर नहीं आ रहा था। परिवार के लोग खुद भी बदहवास थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि किसे संभालें और किसे तलाशें।

रामेश्वर की मौत, पत्नी और बच्चों की बची जान

हादसे में रामेश्वर यादव की मौत हो गई, जबकि उनके बेटे यादराम, पत्नी खुशी और दोनों बच्चे घायल हैं। सभी का मेरठ मेडिकल कालेज में उपचार चल रहा है।

यादराम ने बताया कि परिवार बागड़धाम से लौट रहा था। हादसे ने कुछ ही पलों में परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया। पिता को खोने के साथ ही परिवार के अन्य सदस्य अस्पताल पहुंच गए।

छत्रपाल की पत्नी की मौत, खुद भी गंभीर हालत में

इसी गांव के छत्रपाल भी अपनी पत्नी भगवती के साथ बागड़धाम गए थे। हादसे में भगवती की मौके पर ही मौत हो गई। छत्रपाल की हालत इतनी गंभीर है कि उन्हें अभी तक अपनी पत्नी के निधन की जानकारी तक नहीं दी जा सकी है।

मेरठ मेडिकल कालेज के ट्रामा सेंटर में भर्ती छत्रपाल बोलने की स्थिति में भी नहीं हैं। वह केवल इशारों के माध्यम से जवाब दे पा रहे हैं। अस्पताल के बाहर उनके स्वजन उनके ठीक होने की दुआ कर रहे हैं।

मां को नहीं पता, बेटा जितेंद्र अब इस दुनिया में नहीं

बदायूं के जरीफनगर थाना क्षेत्र के मदारपुर निवासी नेमपाल भी पत्नी सुल्तानश्री और 11 वर्षीय बेटे जितेंद्र के साथ बागड़धाम गए थे। हादसे में जितेंद्र की मौत हो गई, जबकि सुल्तानश्री और नेमपाल घायल हैं।

सबसे दर्दनाक स्थिति यह है कि सुल्तानश्री को अभी तक बेटे जितेंद्र की मौत की जानकारी नहीं है। वह अस्पताल में सामान्य तरीके से बातचीत कर रही हैं। परिवार के अन्य सदस्य बदायूं से मेडिकल कालेज पहुंच चुके हैं।

सुल्तानश्री के चार बेटे और एक बेटी है। जितेंद्र उनका सबसे छोटा बेटा था। उन्होंने बताया कि हादसे के समय सभी लोग गाड़ी में बैठे-बैठे सो रहे थे। अचानक वाहन डिवाइडर पर चढ़ गया और पलट गया। इसके बाद सभी लोग सड़क पर जा गिरे।

सोनिया की गोद हुई सूनी, दोनों बच्चों और पिता को खोया

हादसे की सबसे दर्दनाक कहानियों में बदायूं के अल्लापुर गांव की सोनिया की कहानी भी है। हादसे में सोनिया ने अपने दोनों बच्चों और पिता प्रेम सिंह यादव को खो दिया। खुद सोनिया और उनके पति विकास भी घायल हुए हैं।

प्रेम सिंह यादव अपनी बेटी सोनिया, दामाद विकास और नाती चार वर्षीय सौरभ तथा दो वर्षीय नातिन दीक्षा के साथ बागड़धाम गए थे। ईपीई पर वाहन पलटने के बाद सोनिया और विकास घायल हो गए, जबकि दोनों बच्चों की मौत हो गई। सोनिया के पिता प्रेम सिंह यादव भी हादसे में जान गंवा बैठे।

मेडिकल कालेज के ट्रामा सेंटर में जब सोनिया को दोनों बच्चों और पिता की मौत की जानकारी हुई तो वह बेसुध हो गईं। परिवार के अनुसार, अपने बच्चों के शव लेकर सोनिया और उनके पति उपचार अधूरा छोड़कर बदायूं लौट गए।

ट्रामा सेंटर में घायल, बाहर अपनों के लिए दुआ

मेरठ मेडिकल कालेज के ट्रामा सेंटर में हादसे के घायलों का उपचार चल रहा है। दलीप, छत्रपाल और नेमपाल समेत कई घायल भर्ती हैं। वहीं अस्पताल के बाहर उनके स्वजन चिंता और बेबसी में इंतजार कर रहे हैं।

इंद्रपाल, दुर्गेश, यशपाल, मुनीश, मुन्नालाल, कर्मवीर, मुकेश और कर्मपाल समेत अन्य स्वजन अपनों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। किसी के परिवार में मौत का मातम है तो कोई घायल परिजन की जिंदगी के लिए अस्पताल में डटा हुआ है।

झपकी आने से हादसे की आशंका, चालक घायल

परिजनों ने हादसे की वजह वाहन चालक को झपकी आना बताया है। उनका कहना है कि चालक विपिन के पास ही उसका भाई सुगड़पाल बैठा था, जिसकी हादसे में मौत हो गई। चालक विपिन घायल है और उसका उपचार चल रहा है।

हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

32 लोग सवार थे वाहन में

एडीजी जोन भानु भास्कर के अनुसार, रविवार रात थाना खेकड़ा के बड़ागांव टोल प्लाजा के पास वाहन पलटने से हादसा हुआ। वाहन में करीब 32 लोग सवार थे। हादसे में 13 लोगों की मौत हुई है।

गंभीर घायलों को मेरठ मेडिकल कालेज और अन्य घायलों को बागपत के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। सभी लोग राजस्थान के बागड़धाम से लौट रहे थे। घायलों के उपचार में सहयोग के लिए मेडिकल पुलिस को भी लगाया गया है।

एक हादसा, कई परिवारों की जिंदगी बदल गई

ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का यह हादसा सिर्फ 13 लोगों की मौत का आंकड़ा नहीं है। इसके पीछे कई परिवारों की ऐसी कहानियां हैं, जिनमें किसी ने पिता खोया, किसी ने जीवनसाथी और किसी की गोद हमेशा के लिए सूनी हो गई।

अस्पताल में भर्ती घायल अपने दर्द से जूझ रहे हैं, जबकि बाहर खड़े परिजन अपनों की सलामती की उम्मीद लगाए हुए हैं। हादसे की तस्वीरें और पीड़ितों की आपबीती इस दुर्घटना की भयावहता को बयां कर रही हैं।

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