राम मंदिर ट्रस्ट में बड़ा प्रशासनिक बदलाव, 3 साल के लिए नियुक्त होगा पहला प्रोफेशनल CEO

Ayodhya Ram Mandir CEO Selection अंतिम चरण में पहुंच गया है। 5,585 आवेदनों में से 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू हुआ। Search Committee अब 3 नामों का पैनल राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपेगी।
अयोध्या। Ayodhya Ram Mandir CEO Selection: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले पूर्णकालिक Chief Executive Officer (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। ट्रस्ट के अनुसार Search Committee ने 16 शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के अंतिम चरण के इंटरव्यू पूरे कर लिए हैं। अब समिति इन उम्मीदवारों के मूल्यांकन के बाद तीन नामों का पैनल तैयार करेगी और इसे श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेजेगी। अंतिम नियुक्ति का फैसला ट्रस्ट करेगा।
5,585 आवेदनों से शुरू हुई थी प्रक्रिया
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए चयन प्रक्रिया की शुरुआत बड़े पैमाने पर आवेदन से हुई थी। कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 3,877 उम्मीदवारों ने विस्तृत CV जमा किए।
उम्मीदवारों को केवल शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर प्रबंधन क्षमता, कर्मचारियों और बड़े आयोजनों को संभालने का अनुभव, नेतृत्व क्षमता, भाषा दक्षता, रणनीतिक सोच और भविष्य का विजन जैसे मानकों पर परखा गया।
यानी यह नियुक्ति केवल प्रशासनिक पद भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि राम मंदिर ट्रस्ट के बढ़ते राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व को देखते हुए एक पेशेवर नेतृत्व तैयार करने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
111 उम्मीदवार ऑनलाइन चरण में पहुंचे
पहले चरण की स्क्रीनिंग के बाद करीब 111 उम्मीदवारों को ऑनलाइन इंटरैक्शन के लिए बुलाया गया।
इस चरण में उम्मीदवारों की Communication Skills, Professional Experience, Vision, Personality, Leadership Qualities और Technological Acumen का आकलन किया गया।
इसके बाद चयन प्रक्रिया को और सीमित करते हुए 16 उम्मीदवारों को आमने-सामने बातचीत के लिए चुना गया।
अयोध्या में 16 उम्मीदवारों का इंटरव्यू
अंतिम चरण के इंटरव्यू 11 और 12 अगस्त 2026 को अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र परिसर में आयोजित किए गए।
इन 16 उम्मीदवारों में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े अनुभवी लोग शामिल थे। इनमें Army Veterans, Retired IAS Officers, Retired IPS Officers और सरकारी तथा गैर-सरकारी क्षेत्र के अनुभवी पेशेवर शामिल बताए गए हैं।
इससे साफ है कि ट्रस्ट CEO पद के लिए ऐसे व्यक्ति की तलाश में है, जिसके पास प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ बड़े संस्थान को व्यवस्थित तरीके से चलाने की क्षमता भी हो।
तीन नामों का पैनल होगा तैयार
अंतिम इंटरव्यू पूरा होने के बाद अब Search Committee सभी उम्मीदवारों के प्रदर्शन और योग्यता का मूल्यांकन करेगी।
इसके बाद समिति तीन नामों का पैनल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेजेगी।
इन तीन नामों में से किसे पहला Full-Time CEO बनाया जाएगा, इसका अंतिम निर्णय ट्रस्ट करेगा।
तीन साल का होगा CEO का कार्यकाल
चयनित CEO की नियुक्ति तीन वर्ष के कॉन्ट्रैक्ट पर होगी। संतोषजनक प्रदर्शन के आधार पर कार्यकाल को आगे बढ़ाया जा सकता है।
CEO के वेतन और अन्य सुविधाओं का निर्धारण आपसी बातचीत के आधार पर किया जाएगा।
यह नियुक्ति ऐसे समय हो रही है जब राम मंदिर और उससे जुड़े धार्मिक एवं प्रशासनिक कार्यों का दायरा लगातार बढ़ रहा है।
CEO की जिम्मेदारी कितनी बड़ी होगी?
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी। CEO ट्रस्ट के सीधे supervision में काम करेगा और प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ भविष्य की विकास योजनाओं की निगरानी करेगा।
CEO की प्रमुख जिम्मेदारियों में Trust Administration, Statutory Compliance, Regulatory Compliance, Financial Transparency और Government Agencies के साथ Security Coordination शामिल होंगे।
इसके अलावा धार्मिक अनुष्ठानों और प्रमुख पर्वों की व्यवस्थाओं की निगरानी, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा, विशिष्ट अतिथियों के लिए व्यवस्थाएं तथा ट्रस्ट के दैनिक कामकाज को सुचारू रूप से चलाना भी CEO की जिम्मेदारी होगी।
राम मंदिर में बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या के बीच अहम पद
राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही में बड़ा बदलाव आया है। ऐसे में मंदिर से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्था को पेशेवर तरीके से संचालित करना एक बड़ी चुनौती है।
एक Full-Time CEO की नियुक्ति से ट्रस्ट के प्रशासनिक कामकाज को एक केंद्रीकृत पेशेवर नेतृत्व मिलने की उम्मीद है।
CEO को मंदिर प्रशासन, श्रद्धालु सुविधाओं, सुरक्षा एजेंसियों, सरकारी विभागों और ट्रस्ट के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा।
नियुक्ति के पीछे क्यों बढ़ी जरूरत?
राम मंदिर ट्रस्ट के सामने सिर्फ मंदिर संचालन की जिम्मेदारी नहीं है। इसके साथ श्रद्धालुओं की सुविधाएं, धार्मिक आयोजनों का प्रबंधन, सुरक्षा, वित्तीय व्यवस्था, अतिथि प्रबंधन और भविष्य की परियोजनाओं का संचालन भी जुड़ा हुआ है।
ऐसे में CEO पद को एक महत्वपूर्ण institutional leadership position माना जा रहा है।
हाल के दिनों में मंदिर से जुड़े दान और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों वाले मामले ने भी प्रशासनिक और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। इसी व्यापक संदर्भ में एक पेशेवर CEO की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब ट्रस्ट के फैसले पर नजर
फिलहाल Search Committee के सामने 16 उम्मीदवारों का अंतिम मूल्यांकन है। इसके बाद तीन नामों का पैनल ट्रस्ट को भेजा जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इन तीन नामों में से किस अनुभवी अधिकारी या पेशेवर को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला Full-Time CEO बनाया जाता है।
यह नियुक्ति सिर्फ एक प्रशासनिक पद की नियुक्ति नहीं होगी, बल्कि आने वाले वर्षों में Ayodhya Ram Mandir Administration के संचालन और विस्तार की दिशा तय करने में इसकी अहम भूमिका होगी।
अयोध्या में राम मंदिर का धार्मिक महत्व पहले से ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित है। अब मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था को कितना पेशेवर और पारदर्शी बनाया जाता है, इस पर भी सभी की नजर रहेगी।


