संभल हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द की, यूपी सरकार पर 10 लाख जुर्माना

संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुल्ला अफरोज की NSA के तहत निवारक हिरासत रद्द कर दी। कोर्ट ने यूपी सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत लगाई।
नई दिल्ली। 2024 के संभल हिंसा मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत उसकी निवारक हिरासत को रद्द कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस हिरासत में आरोपी के कथित तौर पर दिए गए कबूलनामे को अपने आप में NSA के तहत प्रिवेंटिव डिटेंशन का आधार नहीं बनाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत भी लगाई है।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश भी पलटा
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मुल्ला अफरोज की हिरासत को बरकरार रखने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को भी रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत का यह फैसला उस याचिका पर आया, जिसमें अफरोज ने NSA के तहत अपनी निवारक हिरासत को चुनौती दी थी।
मुल्ला अफरोज पर 2024 में संभल में हुई हिंसा में कथित भूमिका का आरोप है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने अक्टूबर 2025 में उसके खिलाफ NSA के तहत कार्रवाई की थी।
पुलिस कस्टडी के कथित कबूलनामे पर कोर्ट ने उठाया सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट का मुख्य सवाल इस बात को लेकर था कि क्या पुलिस हिरासत के दौरान आरोपी से प्राप्त कथित कबूलनामे को निवारक हिरासत के आदेश का आधार बनाया जा सकता है।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल ऐसे कथित कबूलनामे के आधार पर NSA के तहत निवारक हिरासत का आदेश कायम नहीं रखा जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने हिरासत आदेश को रद्द कर दिया और उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत लगाई।
8 सितंबर को भी सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था सवाल
इस मामले की पिछली सुनवाई 8 सितंबर को हुई थी। उस दौरान पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से सवाल किया था कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे के आधार पर NSA के तहत निवारक हिरासत का आदेश किस तरह उचित ठहराया जा सकता है।
राज्य की ओर से दलील दी गई थी कि उपलब्ध सामग्री से यह संभावना सामने आती है कि आरोपी दोबारा हिंसा कर सकता है या सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। राज्य ने इसी संभावित खतरे को निवारक हिरासत के औचित्य से जोड़ा था। हालांकि, अंतिम आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत के लिए कथित पुलिस-कस्टडी कबूलनामे को पर्याप्त आधार नहीं माना।
क्या है पूरा मामला?
संभल में नवंबर 2024 में शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस मामले में कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए। मुल्ला अफरोज पर हिंसा के पीछे कथित साजिश में भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया था। बाद में उसे NSA के तहत निवारक हिरासत में लिया गया।
अफरोज ने अपनी हिरासत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, संबंधित जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पक्षकार बनाया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का क्या मतलब?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सीधा असर मुल्ला अफरोज की NSA के तहत निवारक हिरासत पर पड़ा है। अदालत ने हिरासत आदेश को रद्द करने के साथ उस आदेश को बरकरार रखने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को भी निरस्त कर दिया है।
हालांकि, यह फैसला अपने आप में 2024 की संभल हिंसा से जुड़े मूल आपराधिक आरोपों पर अंतिम निर्णय नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश विशेष रूप से NSA के तहत निवारक हिरासत की वैधता से संबंधित है।




