नोएडा भूखंड घोटाला: वरिष्ठ PCS अधिकारी हरिश्चंद्र बर्खास्त, 4000 करोड़ की जमीन आवंटन में अनियमितता का मामला

उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा के करीब 4000 करोड़ रुपये के लीजबैक मामले में वरिष्ठ PCS अधिकारी हरीश चंद्र को सेवा से बर्खास्त कर दिया। जांच में नियमों के उल्लंघन और भ्रामक रिपोर्ट के आरोप सिद्ध पाए गए।
लखनऊ/नोएडा। उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा के करीब 4000 करोड़ रुपये के लीजबैक एवं भूखंड मामले में वरिष्ठ PCS अधिकारी हरीश चंद्र को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह कार्रवाई उनके नोएडा प्राधिकरण में सचिव के पद पर तैनाती के दौरान सामने आई कथित गंभीर अनियमितताओं से जुड़ी विभागीय जांच के आधार पर की गई है। वर्तमान में हरीश चंद्र कोलकाता में खाद्य एवं रसद विभाग के स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे।
शासन के आदेश के मुताबिक, विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई में आरोप सिद्ध पाए गए। कार्रवाई के आधार में 6 जनवरी 2022 को लोक सेवा आयोग, प्रयागराज की ओर से दी गई सहमति और इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के 3 सितंबर 2026 के आदेश में सामने आए तथ्य भी शामिल किए गए हैं।
4000 करोड़ रुपये की जमीन से जुड़ा है मामला
यह मामला नोएडा प्राधिकरण में हरीश चंद्र की तैनाती के दौरान शाहदरा गांव की जमीन से जुड़ा है। जांच के अनुसार सेक्टर 140-A, 141, 142 और 143 में प्राधिकरण की ओर से अर्जित और कब्जे में ली गई जमीन के लीजबैक में नियमों के उल्लंघन के आरोप लगे थे।
जांच रिपोर्ट में करीब 4,00,447 वर्गमीटर जमीन का उल्लेख है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 4000 करोड़ रुपये आंकी गई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि समिति के समक्ष ऐसी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई जिसमें महत्वपूर्ण तथ्यों को शामिल नहीं किया गया।
सर्वे और लीजबैक प्रक्रिया पर उठे सवाल
जांच के मुताबिक शाहदरा गांव की आबादी के निस्तारण के लिए सर्वे कराया गया था। आरोप यह था कि आबादी के निर्धारण के लिए उपलब्ध सैटेलाइट इमेज का इस्तेमाल नहीं किया गया और सर्वे रिपोर्ट में कुछ ऐसे भू-मालिकों, निजी कंपनियों और गांव के बाहर के लोगों को भी शामिल किया गया, जिनके संबंध में जांच में आपत्तियां सामने आईं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि लीजबैक से संबंधित समिति के समक्ष जमीन और संबंधित पक्षों के बारे में पूरी जानकारी नहीं रखी गई। समिति में जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, प्राधिकरण बोर्ड और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका थी।
निजी कंपनियों और बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाने का आरोप
जांच में यह भी उल्लेख किया गया कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज कुछ निजी कंपनियों से संबंधित जानकारी को सर्वे में पूरी तरह दर्ज नहीं किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों में एस्टर इलेक्ट्रिक प्राइवेट लिमिटेड, महानंदा इलेक्ट्रॉनिक प्राइवेट लिमिटेड और प्रयास गारमेंट लिमिटेड का भी उल्लेख है।
जांच अधिकारी के अनुसार, तथ्यों को छिपाने और भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत करने से संबंधित निजी पक्षों को अनुचित लाभ पहुंचने तथा सरकारी जमीन को नुकसान होने की स्थिति बनी।
2013 में शुरू हुई थी विभागीय कार्रवाई
इस मामले में विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया काफी पहले शुरू हुई थी। उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार 27 सितंबर 2013 को गंभीर अनियमितताओं के आरोपों की जांच के लिए मेरठ के मंडलायुक्त को जांच सौंपी गई थी। बाद में विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही आगे बढ़ी।
इसके बाद 6 जनवरी 2022 को लोक सेवा आयोग, प्रयागराज की सहमति और 3 सितंबर 2026 को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ के आदेश में सामने आए तथ्यों को शासन की कार्रवाई के आधार में शामिल किया गया।
हरीश चंद्र की मौजूदा तैनाती कहां थी?
बर्खास्तगी के समय हरीश चंद्र खाद्य एवं रसद विभाग में कोलकाता स्थित स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर तैनात थे। इससे पहले वह नोएडा प्राधिकरण में सचिव के पद पर कार्यरत रह चुके हैं।
क्या है Noida Land Scam का पूरा विवाद?
संक्षेप में मामला नोएडा प्राधिकरण द्वारा अर्जित जमीन के लीजबैक और आबादी निस्तारण की प्रक्रिया में कथित नियम उल्लंघन से संबंधित है। विभागीय जांच में हरीश चंद्र पर तथ्यों को छिपाने, नियमों के विपरीत रिपोर्ट प्रस्तुत करने और इससे संबंधित पक्षों को अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोप सिद्ध पाए गए। इसी विभागीय कार्रवाई के आधार पर सरकार ने अब उन्हें सेवा से बर्खास्त किया है।
4000 करोड़ रुपये यहां जांच में उल्लिखित जमीन के अनुमानित बाजार मूल्य को संदर्भित करता है। इसे सीधे तौर पर नकद घोटाले या इतनी राशि के प्रत्यक्ष भुगतान के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए। जांच रिपोर्ट में करीब 4,00,447 वर्गमीटर भूमि के बाजार मूल्य का अनुमान लगभग 4000 करोड़ रुपये बताया गया है।




