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राम मंदिर दान राशि विवाद पर शिवपाल यादव का बड़ा बयान, बोले- चंदे में हुआ भारी गबन

अयोध्या राम मंदिर दानपात्र प्रकरण पर तेज हुई सियासत, एसआईटी ने शुरू की जांच

अयोध्या राम मंदिर दान राशि चोरी मामले पर सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने चंदे में भारी हेराफेरी की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं एसआईटी ने रामजन्मभूमि परिसर पहुंचकर दानपात्रों और धनराशि गणना प्रक्रिया की जांच शुरू कर दी है।

लखनऊ/अयोध्या। अयोध्या स्थित राम मंदिर की दान राशि में कथित गड़बड़ी और चोरी के मामले ने राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने इस मामले को गंभीर बताते हुए दान राशि में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की आशंका जताई है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

मीडिया से बातचीत के दौरान शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चंदे में भारी गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक तथ्य जनता के सामने आ सकें।

दान राशि मामले में बढ़ी राजनीतिक हलचल

राम मंदिर दान राशि चोरी प्रकरण सामने आने के बाद विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। शिवपाल यादव ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े संस्थानों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है और यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था राम मंदिर से जुड़ी हुई है, इसलिए इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जानी चाहिए।

एसआईटी ने शुरू की जांच

राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले की जांच तेज कर दी है। सोमवार को एसआईटी के सदस्य अयोध्या स्थित रामजन्मभूमि परिसर पहुंचे और दानपात्रों में जमा धनराशि की गणना और उसकी निगरानी व्यवस्था का विस्तृत निरीक्षण किया।

जांच टीम ने परिसर में मौजूद अधिकारियों, ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों तथा कर्मचारियों के साथ बैठक कर धनराशि के संग्रहण, गणना और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

अधिकारियों के साथ हुई लंबी बैठक

सूत्रों के अनुसार एसआईटी टीम के साथ जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. गौरव ग्रोवर भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान दानपात्रों की धनराशि की गणना प्रक्रिया, रिकॉर्ड प्रबंधन और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा की गई।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित अनियमितता किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका रही या नहीं।

श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला

राम मंदिर देश के सबसे प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में दान राशि जमा होती है। ऐसे में दान राशि से जुड़े किसी भी विवाद को संवेदनशील माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल प्रशासन और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की गहन पड़ताल में जुटी हुई हैं।

जांच रिपोर्ट का इंतजार

राम मंदिर दान राशि चोरी मामले में अब सभी की नजर एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दान राशि में किसी प्रकार की गड़बड़ी हुई है या नहीं तथा यदि हुई है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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