‘56% वाहन बिना बीमा के’, सुप्रीम कोर्ट सख्त; बिना इंश्योरेंस गाड़ियों पर ई-चालान, पेट्रोल रोकने का सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों पर सख्ती दिखाते हुए ई-चालान, ANPR कैमरों के उपयोग और पेट्रोल पंप पर ईंधन को वैध बीमा से जोड़ने का सुझाव दिया है। साथ ही नई कारों के लिए चार और दोपहिया वाहनों के लिए छह साल का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य करने का निर्देश दिया है।
नई दिल्ली। देश में बड़ी संख्या में बिना वैध बीमा के चल रहे वाहनों पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने सुझाव दिया है कि बिना वैध इंश्योरेंस वाले वाहनों की पहचान कर उनके खिलाफ ऑटोमैटिक ई-चालान जारी किए जाएं। इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसे वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने की व्यवस्था को वैध बीमा से जोड़ा जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य होने के बावजूद बड़ी संख्या में वाहन बिना बीमा के चल रहे हैं, जिससे सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिलने में कठिनाई होती है।
56 प्रतिशत वाहन बिना बीमा के
अदालत ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि देश में पंजीकृत 30.4 करोड़ वाहनों में से लगभग 16.5 करोड़ वाहन बिना वैध बीमा के हैं। यानी करीब 56 प्रतिशत वाहन अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के बिना सड़कों पर चल रहे हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े करीब 22 प्रतिशत मामलों में बिना बीमा वाले वाहन शामिल होते हैं, जिससे पीड़ितों को मुआवजा पाने के लिए लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
ANPR कैमरों से होगी पहचान, घर पहुंचेगा ई-चालान
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों को VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के डाटाबेस से जोड़ा जाए। इससे बिना वैध बीमा वाले वाहनों की स्वतः पहचान कर उनके मालिकों को ई-चालान भेजा जा सकेगा।
अदालत ने कहा कि जिन राज्यों में यह तकनीक पहले से लागू है, वहां इसे और प्रभावी बनाया जाए तथा अन्य राज्यों में भी चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए।
पेट्रोल पंप पर ईंधन देने से पहले होगी बीमा की जांच
सुप्रीम कोर्ट ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को संयुक्त रूप से एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है।
इस परियोजना के तहत पेट्रोल पंपों पर वाहन को ईंधन देने से पहले उसके वैध बीमा की डिजिटल जांच की जा सकती है। यदि वाहन का इंश्योरेंस समाप्त हो चुका होगा तो उसे तब तक ईंधन नहीं दिया जाएगा, जब तक बीमा नवीनीकृत नहीं कराया जाता। अदालत ने कहा कि इससे बिना बीमा वाले वाहनों की संख्या कम करने में मदद मिलेगी।
नई गाड़ियों के लिए बढ़ाई गई थर्ड-पार्टी बीमा अवधि
सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में दिए गए अपने पूर्व निर्देशों में संशोधन करते हुए नई गाड़ियों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा की अवधि बढ़ा दी है।
अब निर्देशों के अनुसार—
- नई कार खरीदने पर कम से कम 4 वर्ष का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य होगा।
- नई दोपहिया वाहन खरीदने पर 6 वर्ष का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना अनिवार्य होगा।
पहले यह अवधि कारों के लिए तीन वर्ष और दोपहिया वाहनों के लिए पांच वर्ष थी।
क्या कहता है कानून?
मोटर वाहन अधिनियम की धारा 146 के तहत सार्वजनिक सड़क पर चलने वाले प्रत्येक वाहन के लिए वैध थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य है।
यदि कोई व्यक्ति बिना वैध बीमा के वाहन चलाता है या चलाने देता है, तो पहली बार अपराध करने पर तीन महीने तक की जेल, 2,000 रुपये तक जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। दोबारा उल्लंघन करने पर तीन महीने तक की जेल, 4,000 रुपये तक जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।
ट्रैफिक पुलिस को मिलेंगे डिजिटल उपकरण
अदालत ने राज्यों को निर्देश दिया कि ट्रैफिक पुलिस को ऐसे हैंडहेल्ड डिवाइस या मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध कराए जाएं, जो सीधे VAHAN और इंश्योरेंस डाटाबेस से जुड़े हों। इससे मौके पर ही किसी वाहन का बीमा सत्यापित किया जा सकेगा और नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित होगा।
सड़क सुरक्षा और मुआवजा व्यवस्था होगी मजबूत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनिवार्य बीमा का उद्देश्य केवल नियमों का पालन कराना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटना में घायल या मृतक के परिजनों को समय पर आर्थिक सहायता सुनिश्चित करना भी है। इसलिए बिना बीमा वाले वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण आवश्यक है।


