Breaking NewsMain Slidesउत्तराखंडनैनीतालभारतराजनीतिराज्य

उत्तराखंड के राज्यपाल ने यूसीसी और धर्मांतरण विरोधी बिल लौटाए,सरकार को झटका

“उत्तराखंड के राज्यपाल ने यूसीसी और धर्मांतरण विरोधी बिल लौटाए हैं। तकनीकी और प्रक्रियात्मक खामियों के चलते राज्य सरकार को विधेयकों पर दोबारा विचार करना होगा।”

हाइलाइट्स :

  • उत्तराखंड के राज्यपाल ने दो अहम विधेयक लौटाए

  • समान नागरिक संहिता (UCC) संशोधन बिल पर आपत्ति

  • धर्मांतरण विरोधी कानून में तकनीकी खामियां

  • धामी सरकार के लिए राजनीतिक झटका

  • विधानसभा से दोबारा पारित कराने की जरूरत

उत्तराखंड के राज्यपाल ने यूसीसी और धर्मांतरण विरोधी बिल लौटाए हैं, जिससे राज्य की बीजेपी सरकार को बड़ा झटका लगा है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा पारित दो महत्वपूर्ण संशोधन विधेयकों को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस भेज दिया है।

राज्यपाल ने जिन विधेयकों को लौटाया है, उनमें समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के कार्यान्वयन से जुड़ा संशोधन विधेयक और उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (धर्मांतरण विरोधी) संशोधन विधेयक शामिल हैं। राजभवन की ओर से कहा गया है कि इन विधेयकों में तकनीकी खामियां, ड्राफ्टिंग त्रुटियां, व्याकरण संबंधी गलतियां और प्रक्रियात्मक समस्याएं पाई गई हैं।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यूसीसी संशोधन विधेयक में दंड प्रावधानों को आधुनिक बनाने, उनके व्यावहारिक क्रियान्वयन और कानूनी स्पष्टता को लेकर कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई गई है। वहीं, धर्मांतरण विरोधी संशोधन विधेयक को इससे पहले दिसंबर की शुरुआत में भी इन्हीं कारणों से लौटाया जा चुका था।

गौरतलब है कि उत्तराखंड भारत का पहला राज्य है, जिसने समान नागरिक संहिता को लागू किया है। अगस्त 2025 में कैबिनेट से मंजूरी पाए इन संशोधनों का उद्देश्य यूसीसी को और अधिक सख्त व प्रभावी बनाना था। इसी तरह, उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम 2025 के तहत जबरन, लालच या धोखाधड़ी से कराए जाने वाले धर्मांतरण के खिलाफ कड़े प्रावधान जोड़े गए थे।

अब राज्य सरकार को इन विधेयकों में संशोधन कर दोबारा विधानसभा से पारित कराना होगा। उत्तराखंड के राज्यपाल ने यूसीसी और धर्मांतरण विरोधी बिल लौटाए जाने के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है।

Related Articles

Back to top button