सपा में गुटबाजी की रार फिर तेज, रुचि वीरा बनाम एसटी हसन में नहीं थमी तकरार
“सपा में गुटबाजी की रार मुरादाबाद में फिर तेज हो गई है। सांसद रुचि वीरा और पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन के बीच टिकट विवाद, शादी की दावत और पोस्टरबाजी ने पार्टी की अंदरूनी कलह को उजागर कर दिया है।”
हाइलाइट्स :
- अखिलेश यादव ने इटावा के केदारेश्वर महादेव मंदिर का वीडियो किया साझा
- पीडीए के साथ अब ‘एम’ यानी मंदिर जोड़ने की चर्चा तेज
- संजय निषाद ने मंदिर को बताया चुनावी और राजनीतिक
- 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा की बदली रणनीति के संकेत
- PDAM (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक-मंदिर) बना नया सियासी फार्मूला
लखनऊ। सपा में गुटबाजी की रार एक बार फिर मुरादाबाद में खुलकर सामने आ गई है। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान शुरू हुआ सांसद रुचि वीरा और पूर्व सांसद डॉ. एसटी हसन के बीच टिकट विवाद समय के साथ कम होने के बजाय और गहराता नजर आ रहा है। अब यह खटास पूर्व सांसद की बेटी की शादी की दावत के बहाने फिर सतह पर आ गई है।
टिकट का घाव, दावत बनी बहाना
लोकसभा चुनाव में अचानक टिकट कटने से डॉ. एसटी हसन को जो राजनीतिक झटका लगा था, उसकी टीस आज भी समाजवादी पार्टी के भीतर महसूस की जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में बेटी की शादी की दावत में सांसद रुचि वीरा को आमंत्रित न किया जाना सपा के भीतर सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
खास बात यह रही कि दावत में भाजपा के दो विधायकों की मौजूदगी ने सपा खेमे में सवाल और गहरे कर दिए। सांसद समर्थकों का कहना है कि यह केवल सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीतिक संकेत भी था।
दावत बनी सियासी मंच
पूर्व सांसद की बेटी की शादी की दावत सामाजिक आयोजन से ज्यादा सियासी मंच बन गई। कौन आया, कौन नहीं आया, किससे किसने दूरी बनाई—हर गतिविधि को राजनीतिक नजरिये से देखा गया। कुंदरकी के पूर्व विधायक हाजी मुहम्मद रिजवान को भी आमंत्रित न किए जाने को गुटबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।
पार्टी के भीतर चर्चा है कि दावत में बुलाए गए नाम महज मेहमानों की सूची नहीं, बल्कि गुटों की पहचान भी थे।
पोस्टरबाजी से और भड़की तकरार
दावत विवाद अभी शांत भी नहीं हुआ था कि सिविल लाइंस स्थित सांसद आवास के सामने लगे पोस्टरों ने सियासी माहौल और गर्म कर दिया। सपा नेता कामिल मंसूरी की ओर से लगाए गए पोस्टरों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांठ विधायक कमाल अख्तर की तस्वीरें थीं।
इसे सीधे तौर पर शक्ति प्रदर्शन और एक गुट की ओर से दूसरे गुट को दिया गया संदेश माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह सब योजनाबद्ध तरीके से किया गया।
विधानसभा चुनाव से पहले संगठन की चिंता
2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और सपा मुखिया अखिलेश यादव लगातार एकजुटता का संदेश दे रहे हैं, इसके बावजूद मुरादाबाद इकाई खुलकर बंटी नजर आ रही है। जिला संगठन जनता के मुद्दों की बजाय अंदरूनी खेमेबंदी में उलझा हुआ दिख रहा है।
पार्टी के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता का कहना है कि अब विचारधारा नहीं, टिकट की राजनीति हावी है।
नेताओं के बयान
रुचि वीरा, सांसद, मुरादाबाद
“मुझे मुरादाबाद की जनता ने सांसद चुना है। दावत का निमंत्रण नहीं मिला, यह उनका निजी कार्यक्रम था। अभी विवाद का समय नहीं है, विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और हमें एकजुट होकर अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाना है।”
डॉ. एसटी हसन, पूर्व सांसद
“मैंने सपा के पक्ष में वोट करने की अपील की थी। शादी का कार्ड मिस प्लेस हो गया होगा। यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। कुछ नेता बेवजह इस मामले को तूल दे रहे हैं। हम सब एकजुट हैं।”
क्या संभल पाएगी सपा?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या समाजवादी पार्टी समय रहते मुरादाबाद की इस अंदरूनी सियासत को संभाल पाएगी, या फिर यही गुटबाजी आने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए सबसे बड़ी कमजोरी बन जाएगी।




