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भारतीय वायुसेना को मिलेगा बड़ा बल, 114 नए राफेल जेट्स को हरी झंडी

“डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने 114 अतिरिक्त राफेल फाइटर जेट्स की खरीद को मंजूरी दी है। 3.25 लाख करोड़ रुपये के इस प्रस्ताव से भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ेगी और मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा।”

हाइलाइट्स:

  • DAC ने 114 अतिरिक्त राफेल जेट्स को दी मंजूरी
  • अनुमानित लागत 3.25 लाख करोड़ रुपये
  • IAF के 42 स्क्वाड्रन लक्ष्य को मजबूती
  • मेक इन इंडिया के तहत भारत में उत्पादन
  • अब CCS की अंतिम स्वीकृति का इंतजार

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना की क्षमता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की बैठक में वायुसेना के लिए 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी गई। इस प्रस्ताव की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या और आधुनिक युद्ध आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। वर्तमान में भारतीय वायुसेना के पास लगभग 29 स्क्वाड्रन सक्रिय हैं, जबकि आवश्यकता 42 स्क्वाड्रन की मानी जाती है। मिग-21 जैसे पुराने विमानों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की जरूरत बढ़ गई है।

मेक इन इंडिया को बढ़ावा

सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती कुछ राफेल विमान सीधे फ्रांस से तैयार अवस्था में आएंगे, जबकि अधिकांश विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। फ्रांस की कंपनी दसॉल्ट एविएशन भारतीय साझेदारों के साथ मिलकर उत्पादन करेगी। इससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

DAC के बाद CCS की मंजूरी जरूरी

डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल रक्षा खरीद को प्रारंभिक स्वीकृति देती है। अब यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास जाएगा। स्वीकृति के बाद अनुबंध प्रक्रिया पूरी की जाएगी। डिलीवरी में 5 से 7 वर्ष लगने की संभावना है।

राफेल की प्रमुख विशेषताएं

राफेल एक अत्याधुनिक मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों तरह के हमलों में सक्षम है। इसमें मेटियोर एयर-टू-एयर मिसाइल और स्कैल्प क्रूज मिसाइल जैसी लंबी दूरी की मारक क्षमता है। भारत पहले ही 36 राफेल विमान खरीद चुका है, जो अंबाला और हाशिमारा एयरबेस पर तैनात हैं।

रणनीतिक दृष्टि से अहम फैसला

चीन और पाकिस्तान के साथ बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए यह सौदा सामरिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 114 नए राफेल शामिल होने से भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता और वायु रक्षा प्रणाली और मजबूत होगी।

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