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पूर्व पीएम शेख हसीना को मानवता विरोधी अपराधों में फांसी की सजा सुनाई

“शेख हसीना को मौत की सजा: बांग्लादेश के विशेष ट्रिब्यूनल ने पूर्व पीएम शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों में दोषी कर फांसी की सजा सुनाई है, साथ ही सभी संपत्ति जब्त करने का आदेश। इस फैसले को उन्होंने राजनीति प्रेरित बताते हुए ट्रिब्यूनल की निष्पक्षता पर सवाल उठाया है।

ढाका। शेख हसीना को International Crimes Tribunal‑1 (ICT-1), ढाका, बांग्लादेश ने फांसी की सजा सुनाई है।

क्या है मामला

2024 में बांग्लादेश में छात्र‐आंदोलन के रूप में शुरू हुए प्रदर्शन बाद में व्यापक राजनीतिक विरोध में बदल गए। इस दौरान सुरक्षा बलों ने क्रूरतापूर्वक दमन किया, और संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार लगभग 1,400 लोग मारे गए।

ट्रिब्यूनल का आरोप है कि शेख हसीना ने हत्या का आदेश देने, ड्रोन और हेलीकॉप्टर व घातक हथियारों का इस्तेमाल करवाने, तथा मानवताविरोधी अपराधों में सक्रिय भूमिका निभाई।

पूर्व गृह मंत्री असदुज़्ज़मान खान कमाल को भी मौत की सजा सुनाई गई है। जबकि एक अन्य उच्च पुलिस अधिकारी को पांच वर्ष की सजा दी गई है जिसने साक्ष्य देने वाला गवाह बनने के बाद समझौता किया।

शेख हसीना का बयान

शेख हसीना ने इस फैसले को “पक्षपाती” और “राजनीति प्रेरित” बताया है। उन्होंने कहा कि इस ट्रिब्यूनल के पास लोकतांत्रिक अधिकार नहीं हैं और यह निष्पक्ष नहीं है।

असदुज़्ज़मान खान कमाल ने कहा है कि यह अदालत अवामी लीग की नेतृत्व को समाप्त करने की कोशिश है।

घटनाक्रम और प्रतिक्रिया

ट्रिब्यूनल का फैसला 17 नवंबर 2025 को घोषित किया गया।

ढाका सहित पूरे देश में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। प्रदर्शन, ट्रांसपोर्ट बंदी और सार्वजनिक स्कूलों में व्यवधान जैसी घटनाएं सामने आई हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री भारत में निर्वासित हैं, extradition और भारत‐बांग्लादेश संबंधों पर भी असर हुआ है।

आगे क्या हो सकता है

अवामी लीग (Awami League) पर देशव्यापी बंदी का आह्वान किया गया है। भारत-बांग्लादेश द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बढ़ सकता है क्योंकि भारत में शेख हसीना सुरक्षित हैं। मानवाधिकार संगठनों ने ट्रायल की निष्पक्षता और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

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विशेष संवाददाता – मनोज शुक्ल

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