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यूपी राजनीति में बड़ा फेरबदल: नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस छोड़ी, संगठन पर मंडराया संकट

उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उनके साथ 72 नेताओं के भी अलग होने की चर्चा है, जिससे प्रदेश कांग्रेस की रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं।

लखनऊ। कांग्रेस संगठन में बढ़ी बेचैनी

उत्तर प्रदेश कांग्रेस को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कांग्रेस की सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया। यह घटनाक्रम ऐसे वक्त सामने आया है, जब पार्टी प्रदेश में संगठन को दोबारा खड़ा करने की कोशिशों में जुटी हुई है।

अचानक लिया गया फैसला

नसीमुद्दीन सिद्दीकी का इस्तीफा अचानक माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, वे लंबे समय से संगठन की कार्यप्रणाली और राजनीतिक दिशा को लेकर असंतुष्ट चल रहे थे। इस्तीफे के साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि कांग्रेस जनता के मुद्दों पर अपेक्षित आक्रामकता नहीं दिखा पा रही है।

अजय राय की सक्रियता

इस्तीफे की खबर मिलते ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय हरकत में आ गए। उन्होंने सिद्दीकी से संपर्क कर बातचीत शुरू की और उन्हें मनाने के प्रयास किए। पार्टी नेतृत्व फिलहाल नुकसान को सीमित रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।

मुस्लिम चेहरे पर असर

कांग्रेस ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी को उत्तर प्रदेश में एक प्रमुख मुस्लिम नेता के रूप में आगे बढ़ाया था। पश्चिमी यूपी में उनकी राजनीतिक पकड़ मानी जाती रही है। ऐसे में उनका जाना अल्पसंख्यक वोट बैंक की रणनीति के लिए चुनौती बन सकता है।

72 नेताओं के अलग होने की चर्चा

सूत्रों के अनुसार, नसीमुद्दीन सिद्दीकी के साथ करीब 72 अन्य नेताओं के भी कांग्रेस छोड़ने की खबर है। इनमें कई पूर्व विधायक और जिला स्तर के पदाधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

बसपा से कांग्रेस तक का सफर

नसीमुद्दीन सिद्दीकी लंबे समय तक बसपा सरकार में प्रभावशाली मंत्री रहे हैं। वर्ष 2018 में उन्होंने कांग्रेस जॉइन की थी, जिससे पार्टी को अल्पसंख्यक समाज में नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जगी थी। अब उनका जाना कांग्रेस के लिए राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों तरह का नुकसान माना जा रहा है।

आगे की राजनीति पर नजर

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति को प्रभावित कर सकता है। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी आगे कौन सा राजनीतिक रास्ता चुनते हैं और कांग्रेस इस झटके से कैसे उबरती है।

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