महंगाई-बेरोजगारी से ध्यान भटकाने के लिए भाजपा निकाल रही पदयात्रा: अखिलेश यादव, चुनाव आयोग पर भी साधा निशाना
सपा प्रमुख ने भाजपा पर पदयात्रा के नाम पर प्रदेश में अव्यवस्था फैलाने का लगाया आरोप, लखनऊ और कानपुर में ट्रैफिक जाम का मुद्दा उठाया; आधार को बायोमेट्रिक तरीके से मतदाता सूची से जोड़ने की मांग की। धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम को लेकर आयोजकों को भी दी चेतावनी।
अखिलेश यादव ने भाजपा की पदयात्रा पर निशाना साधते हुए महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया। सपा प्रमुख ने चुनाव आयोग से आधार को मतदाता सूची से जोड़ने की मांग की और धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम के आयोजकों को भी चेतावनी दी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा की पदयात्रा को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और जनता से जुड़े बुनियादी मुद्दों का जवाब देने के बजाय पदयात्रा के नाम पर लोगों का ध्यान भटकाने में जुटी है। अखिलेश ने दावा किया कि सत्ता के संरक्षण में निकाली जा रही इन पदयात्राओं से प्रदेश में अव्यवस्था फैल रही है और आम जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
गुरुवार को लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में आयोजित बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के पास महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, अन्याय और अत्याचार जैसे मुद्दों पर जनता को बताने के लिए कोई ठोस जवाब नहीं है। इसी वजह से वह सड़कों पर उतरकर लोगों को भ्रमित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि पदयात्राओं के कारण व्यापारी, छात्र और आम नागरिक परेशान हो रहे हैं। जनता को राहत देने के बजाय सरकार की गतिविधियां उनकी मुश्किलें बढ़ा रही हैं।
लखनऊ और कानपुर में ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर सरकार पर निशाना
अखिलेश यादव ने भाजपा की पदयात्रा के दौरान यातायात व्यवस्था प्रभावित होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि लखनऊ में भाजपा की पदयात्रा के कारण ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा गई और लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। इसी तरह त्योहारों के मौसम में कानपुर जैसे पहले से ही जाम की समस्या से जूझ रहे शहर में पदयात्रा निकालकर लोगों की मुश्किलें बढ़ाई गईं।
सपा प्रमुख ने कहा कि भाजपा को दस साल तक सत्ता में रहने के बावजूद अपनी उपलब्धियां बताने के लिए ऐसे आयोजनों का सहारा लेना पड़ रहा है। उनके मुताबिक, सरकार को जनता की समस्याओं पर जवाब देना चाहिए, लेकिन वह राजनीतिक गतिविधियों के जरिए असल मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।
आधार को मतदाता सूची से जोड़ने की अखिलेश ने उठाई मांग
अखिलेश यादव ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और नए मतदाताओं के पंजीकरण को लेकर भी निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि आधार कार्ड को बायोमेट्रिक व्यवस्था के माध्यम से मतदाता सूची से जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने आधार कार्ड को मेटल का बनाए जाने का सुझाव भी दिया, ताकि उसकी नकल तैयार करना मुश्किल हो सके।
सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद अब फॉर्म-6 के जरिए भाजपा समर्थक मतदाताओं की संख्या बढ़ाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने और मतदाता सूची में कथित फर्जी नाम जुड़ने से रोकने के लिए निगरानी करने को कहा।
अखिलेश ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे मतदाता सूची की जांच करें और किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर संबंधित स्तर पर शिकायत दर्ज कराएं। मतदाता सूची का मुद्दा आने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए प्रदेश की राजनीति में अहम होता जा रहा है।
ब्रज को हेरिटेज के रूप में विकसित करने का दिया भरोसा
इस बीच बांके बिहारी मंदिर, वृंदावन के गोस्वामी समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी गुरुवार को अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान ब्रज क्षेत्र और मंदिरों से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर ब्रज क्षेत्र को हेरिटेज के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिरों को सरकारीकरण से मुक्त रखा जाएगा। उनके इस बयान को ब्रज क्षेत्र के धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर सपा की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम को लेकर आयोजकों को चेतावनी
अखिलेश यादव ने कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रम को लेकर भी बिना नाम लिए आयोजकों पर निशाना साधा। उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए ऐसे आयोजनों से दूर रहने की सलाह दी, जिनके जरिए कुछ लोग अपनी राजनीतिक और सामाजिक धाक जमाना चाहते हैं।
उन्होंने लिखा कि ऐसे लोगों को आमंत्रित करने वाले आयोजकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। अखिलेश ने अपने पोस्ट में कहा कि ऐसे आयोजनों के बजाय किसी सच्चे विचारक और वाचक को आमंत्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने धार्मिक भावनाओं और ईशनिंदा से जुड़े मुद्दों का उल्लेख करते हुए आयोजकों को आगाह भी किया।
2027 से पहले भाजपा और सपा के बीच बढ़ेगी सियासी बयानबाजी
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो रही हैं। भाजपा जहां अपनी पदयात्राओं और जनसंपर्क अभियानों के जरिए जनता तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, वहीं समाजवादी पार्टी महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और मतदाता सूची जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर रही है।
अखिलेश यादव के ताजा बयान से साफ है कि सपा आने वाले दिनों में भाजपा के जनसंपर्क अभियानों को भी राजनीतिक मुद्दा बनाने की तैयारी में है। वहीं, आधार और मतदाता सूची को जोड़ने की मांग तथा एसआईआर पर लगाए गए आरोपों से चुनावी माहौल में निर्वाचन प्रक्रिया भी बहस का प्रमुख विषय बन सकती है।



