लखनऊ में नकली दवाओं का बड़ा खुलासा, ब्रांडेड कंपनियों के रैपर में बिक रही थीं फर्जी दवाएं
लखनऊ में नकली दवाओं के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। अमीनाबाद से बरामद नकली दवाओं की जांच देहरादून की अवैध फैक्ट्री तक पहुंची। यूपी पुलिस और एफएसडीए ने मुख्य सप्लायर को गिरफ्तार कर कई नामी कंपनियों के नकली रैपर, पैकेजिंग सामग्री और दवा निर्माण मशीनें बरामद की हैं।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में नकली दवाओं के बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि मरीजों को नामी दवा कंपनियों के रैपर और पैकेजिंग में नकली दवाएं बेची जा रही थीं। अमीनाबाद में हुई कार्रवाई से शुरू हुई जांच उत्तराखंड के देहरादून स्थित एक अवैध दवा निर्माण इकाई तक पहुंची, जहां बिना लाइसेंस के नकली दवाओं का निर्माण और पैकेजिंग की जा रही थी।
एफएसडीए और यूपी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में मुख्य सप्लायर राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा को गिरफ्तार किया गया है। मामले में कई अन्य आरोपियों को भी नामजद किया गया है और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
अमीनाबाद से मिला पहला सुराग
19 जुलाई को लखनऊ के अमीनाबाद इलाके में छापेमारी के दौरान 43 प्रकार की संदिग्ध दवाएं बरामद की गई थीं। इनमें से फ्लोजेन एए दवा का नमूना जांच में नकली पाया गया। इसके बाद एफएसडीए ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष प्रवर्तन टीम का गठन किया और पूरे सप्लाई नेटवर्क की जांच शुरू की।
डिजिटल जांच से खुली नेटवर्क की परतें
जांच के दौरान अधिकारियों ने मोबाइल फोन का डेटा, व्हाट्सएप चैट, पैकेजिंग डिजाइन और सप्लाई चेन से जुड़े दस्तावेजों का विश्लेषण किया। डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि नकली दवाओं की आपूर्ति का संचालन एक संगठित गिरोह कर रहा था, जिसका मुख्य सप्लायर गाजियाबाद निवासी राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा था।
एफएसडीए और गाजियाबाद क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने 22 जुलाई को राजनगर एक्सटेंशन स्थित केडब्ल्यू मॉल के पास से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
देहरादून में चल रही थी अवैध दवा फैक्ट्री
आरोपी के मोबाइल से मिले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच टीम उत्तराखंड के देहरादून पहुंची। यहां देवीपुर न्यू हाईवे रोड, ईस्ट होपटाउन स्थित एक परिसर में छापेमारी के दौरान अवैध दवा निर्माण इकाई का खुलासा हुआ।
फैक्ट्री में आधुनिक पैकेजिंग मशीनें, स्ट्रिप बनाने वाली मशीन, इंकजेट बेल्ट प्रिंटर, कंप्रेसर, हाई वोल्टेज स्टेबलाइजर, बड़ी मात्रा में सेमी-फिनिश टैबलेट और कैप्सूल, एल्युमिनियम फॉयल, ब्रांडेड रैपर और मास्टर कार्टन बरामद किए गए। जांच में सामने आया कि यहां बिना किसी वैध लाइसेंस के नकली दवाएं तैयार कर उन्हें प्रसिद्ध कंपनियों की पैकिंग में बाजार भेजने की तैयारी थी।
नामी कंपनियों के नकली रैपर बरामद
छापेमारी के दौरान कई चर्चित दवा ब्रांडों और कंपनियों के नाम से तैयार नकली पैकेजिंग सामग्री बरामद हुई। इनमें क्लेवैक्टम-625, राजो-डी कैप्सूल सहित सिप्ला, डॉ. रेड्डीज, इंटास, ल्यूपिन और एल्डर जैसी प्रमुख कंपनियों के नाम और पैकिंग सामग्री शामिल है।
अधिकारियों का मानना है कि इन नकली पैकेजिंग का इस्तेमाल कर दवाओं को असली बताकर बाजार में बेचा जा रहा था।
चार आरोपी नामजद, दो गिरफ्तार
इस मामले में गौरव त्यागी, राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा, विपिन भटनागर और विनय चंद को नामजद किया गया है। राजेंद्र सिंह उर्फ अरुण टुंडा और विनय चंद को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। सभी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
एफएसडीए ने शुरू की विस्तृत जांच
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के अनुसार, बरामद नकली दवाओं और पैकेजिंग सामग्री की विस्तृत जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए नकली दवाएं किन-किन राज्यों और मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाई गईं।
मरीजों की सेहत से बड़ा खिलवाड़
विशेषज्ञों का कहना है कि नकली दवाओं का कारोबार केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है। ऐसी दवाओं के सेवन से मरीजों का इलाज प्रभावित हो सकता है, बीमारी बढ़ सकती है और कई मामलों में जान का भी खतरा हो सकता है। ऐसे में इस पूरे नेटवर्क का खुलासा स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।




