AI, तकनीक और संवाद से बदलेगा लोकतंत्र का स्वरूप: ओम बिरला
AI और तकनीक से बढ़ेगी विधायकों की कार्यक्षमता, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में डिजिटल लोकतंत्र, AI, विधायी सुधार और संवाद पर जोर दिया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
लखनऊ। AI और तकनीक से बढ़ेगी विधायकों की कार्यक्षमता—यह स्पष्ट संदेश लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन (AIPOC) के समापन समारोह में दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक लोकतंत्र को सशक्त बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटलीकरण और नवाचार को विधायी प्रक्रियाओं का अभिन्न हिस्सा बनाना होगा।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाएं तभी मजबूत होंगी, जब वे जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप, पारदर्शी और जवाबदेह हों। इसके लिए तकनीक का उपयोग समय की आवश्यकता है।
डिजिटल तकनीक से मजबूत होगी विधायी व्यवस्था
ओम बिरला ने कहा कि आज अधिकांश विधानसभाएं पेपरलेस हो चुकी हैं और पुराने विधायी दस्तावेजों, बहसों और बजट का डिजिटलीकरण किया जा चुका है। AI आधारित टूल्स से विधायकों को
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त्वरित शोध सामग्री,
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पूर्व बहसों का विश्लेषण,
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नीतिगत तुलना
जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे तथ्यपूर्ण और सार्थक चर्चा संभव हो सकेगी।
30 बैठकें जरूरी, तभी जीवंत रहेगा लोकतंत्र
लोकसभा अध्यक्ष ने राज्य विधानसभाओं में बैठकों की घटती संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि हर वर्ष कम से कम 30 दिन सदन की बैठकें होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि सदन जितना अधिक चलेगा, जनता की समस्याएं उतनी ही गंभीरता से उठेंगी और समाधान भी प्रभावी होंगे।
गतिरोध लोकतंत्र के हित में नहीं
ओम बिरला ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बार-बार होने वाला व्यवधान लोकतंत्र को कमजोर करता है।
उन्होंने कहा—
“सदन विरोध के लिए नहीं, बल्कि विचार और समाधान के लिए होते हैं।”
उनका कहना था कि लोकतंत्र में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन संवाद और तर्क ही उनका समाधान है।
लेजिसलेटिव इंडेक्स से होगी विधानसभाओं की जवाबदेही तय
लोकसभा अध्यक्ष ने ‘National Legislative Index’ की अवधारणा पर जोर देते हुए कहा कि इससे विधानसभाओं की
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उत्पादकता,
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कार्यकुशलता,
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पारदर्शिता
का तुलनात्मक मूल्यांकन किया जा सकेगा। यह पहल स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगी और जनहित में बेहतर कार्य संस्कृति विकसित करेगी।
पीठासीन अधिकारी हैं संविधान के प्रहरी
अपने संबोधन के अंत में ओम बिरला ने कहा कि पीठासीन अधिकारी लोकतंत्र की रीढ़ हैं। उनकी निष्पक्षता और संवैधानिक प्रतिबद्धता ही विधायिकाओं की गरिमा को बनाए रखती है।
उन्होंने विश्वास जताया कि सम्मेलन में लिए गए संकल्प देशभर में लोकतांत्रिक सुधारों को नई दिशा देंगे।




