Main Slidesउत्तर प्रदेशलखनऊसमाचार

बिहार की ‘पोस्टर पॉलिटिक्स’ से क्या मायावती–ओवैसी साथ आ रहे?

“बसपा AIMIM गठबंधन यूपी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। बिहार में बसपा MLA के पीछे लगे AIMIM पोस्टर से गठबंधन की अटकलें बढ़ीं। जानिए कितना असर पड़ेगा।”

लखनऊ। बसपा AIMIM गठबंधन यूपी को लेकर सियासी गलियारों में जोरदार चर्चा है। बिहार चुनाव नतीजों के बीच वायरल हुई एक तस्वीर ने यूपी की राजनीति में नई गर्मी पैदा कर दी है। यह तस्वीर बसपा के बिहार की रामगढ़ सीट से जीते इकलौते विधायक सतीश उर्फ पिंटू यादव की है, जिनके पीछे मीडिया से बात करते समय दो पोस्टर लगे थे—एक बसपा का और दूसरा AIMIM का।

बसपा बिहार प्रभारी अनिल चौधरी भी उसी मंच पर मौजूद थे। दोनों दलों के पोस्टर एक साथ लगने से यह कयास बेहद तेज हो गए हैं कि यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मायावती और असदुद्दीन ओवैसी मिलकर बड़ा राजनीतिक मोर्चा बना सकते हैं।

क्यों माना जा रहा है कि बसपा–AIMIM साथ आ सकते हैं?

1. पिछले चुनाव में दोनों का तालमेल

2020 के बिहार चुनाव में बसपा–AIMIM पहले भी गठबंधन में उतर चुके हैं। इस चुनाव में भी ओवैसी ने खुले मंच से अपील की—
“जहाँ AIMIM प्रत्याशी नहीं हैं, वहाँ बसपा को वोट दें।”

2. मायावती का बयान — बड़े दलों से गठबंधन नहीं

मायावती साफ कह चुकी हैं—

“किसी बड़े दल के साथ गठबंधन नहीं होगा।”

“छोटी और समान विचारधारा वाली पार्टियों से सीट शेयरिंग सम्भव है।” AIMIM इसी श्रेणी में पूरी तरह फिट है।

3. पोस्टर बिना टॉप लेवल अनुमति के संभव नहीं

सियासी सूत्र मानते हैं कि बसपा के मंच पर AIMIM का पोस्टर लगना ‘सिर्फ संयोग नहीं’।
यह संकेत है कि दोनों दल बैकडोर बातचीत में हैं।

बिहार में दोनों का प्रदर्शन — राजनीतिक केमिस्ट्री का नया संकेत

बसपा

  • 181 सीटों पर चुनाव
  • रामगढ़ से जीत
  • वोट शेयर 1.02% → 1.62%
  • कैमूर–रोहतास में मजबूत उपस्थिति
  • कई सीटों पर महागठबंधन को नुकसान

AIMIM

  • 25 सीटों पर चुनाव
  • 5 सीटों पर जीत
  • वोट शेयर 1.25% → 1.85%
  • सीमांचल में बंपर पकड़
  • 4 सीटों पर RJD–कांग्रेस को सीधा नुकसान

इन आंकड़ों ने दोनों पार्टियों को यह विश्वास दिया है कि साथ आने से वोट बैंक ट्रांसफरेबल और प्रभावी हो सकता है।

अगर बसपा AIMIM गठबंधन यूपी में हुआ — क्या बदलेगा?

1. मुस्लिम–दलित ब्लॉक बनेगा मेगा-पावर

UP के वोटर—

  • दलित: 20%
  • मुस्लिम: 19%
    दोनों मिलकर करीब 39% वोट का भारी आधार तैयार करते हैं।

2. पश्चिम यूपी में बड़ा उलटफेर

  • पश्चिम में यादव वोट कम, मुस्लिम–जाटव अधिक।
    ऐसे में BSP+AIMIM गठजोड़ BJP और SP दोनों के लिए चुनौती बन सकता है।

3. मायावती का दलित आधार + ओवैसी की मुस्लिम अपील

  • मायावती की 9 अक्टूबर रैली के बाद दलितों की वापसी दिखी
  • ओवैसी की सभाओं में मुस्लिम युवाओं की भारी मौजूदगी
  • बसपा के पास बड़ा मुस्लिम चेहरा नहीं — जिसे ओवैसी पूरा कर सकते हैं

सपा–AIMIM गठबंधन क्यों नहीं संभव?

• सपा–कांग्रेस का गठबंधन AIMIM के खिलाफ

ओवैसी साफ कह चुके हैं—
“कांग्रेस और भाजपा को छोड़कर किसी से गठबंधन हो सकता है।” सपा इस वक्त कांग्रेस के साथ है।

• सीमांचल में सपा नेताओं ने ओवैसी के खिलाफ प्रचार किया

• इमरान प्रतापगढ़ी, इकरा हसन, अफजाल अंसारी ने AIMIM के खिलाफ खुलकर बोला।

• सपा नहीं चाहती कि मुस्लिमों का नया प्रतिनिधि उभरे

• ओवैसी की बढ़ती पकड़ सपा के लिए सीधा खतरा है।

इसीलिए AIMIM के लिए बसपा सबसे स्वाभाविक विकल्प बन गई है।

क्या गठबंधन तय है?

दोनों दल अभी आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कह रहे। लेकिन राजनीतिक संकेत, पोस्टर, ओवैसी की अपील, बसपा की मुस्लिम आउटरीच— सब इशारा करते हैं कि यूपी में बसपा–AIMIM गठबंधन बेहद करीब है।

अगर मुस्लिम–दलित समीकरण में ओवैसी जुड़ते हैं और मायावती का कैडर सक्रिय रहता है, तो यूपी में 2027 का चुनाव नया इतिहास लिख सकता है। बसपा–AIMIM गठबंधन न सिर्फ SP–Congress के लिए बल्कि BJP के लिए भी बड़ा सिरदर्द साबित हो सकता है।

 

Related Articles

Back to top button